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मंत्री आलम ने कहा- मनरेगा में कागजों पर हो रहा काम, मनरेगा कर्मचारी महासंघ खफा, जारी किया श्वेत पत्र

Ranchi : ग्रामीण विकास मंत्री ने 22 सितंबर को एक कार्यक्रम में मनरेगा के कामकाज में कमियों पर बात रखी थी. बीडीओ, डीडीसी की उपस्थिति में कहा था कि मनरेगा में कागजों पर काम हो रहा है. प्रखंडों में अधिकारी 7-8 सालों से जमे हुए हैं. ग्रामीणों की मिलीभगत से काम करते हैं. कुआं और बकरी शेड धरातल पर बने ही नहीं हैं. मनरेगा कर्मचारी महासंघ ने मंत्री के इस बयान पर नाराजगी जतायी है.

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष जॉन पी बागे ने श्वेत पत्र जारी करते हुए कहा है कि सोशल ऑडिट यूनिट के दबाव में मंत्री ऐसा बयान दे रहे हैं.

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यह बयान केवल मनरेगा कर्मियों के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की असफलता का भी प्रमाण पत्र है. इससे मनरेगा कर्मियों को पीड़ा हुई है. उनकी कार्य क्षमता इससे प्रभावित होगी.

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मनरेगा कर्मियों को बदनाम करने में लगा है जेएसएलपीएस

महासंघ के मुताबिक पिछले 8-10 महीने से जेएसएलपीएस वर्कर्स की ओर से मनरेगा और मनरेगा कर्मियों को बदनाम करने को कई हथकंडे अपनाये जा रहे हैं. पिछले दिनों जेएसएलपीएस के सोशल ऑडिट के कार्यकर्ताओं ने मनरेगा में करोड़ों रुपये के गबन होने की बात कही थी. अखबारों में बयान भी जारी किया था.

बाद में इस मामले में अपनी गलती मानी थी. अगर कहीं गड़बड़ी हुई है तो सरकार जरूर कार्रवाई करे पर इक्के-दुक्के मामले पर राज्यभर के मनरेगा कर्मियों को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए.

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मनरेगा पोर्टल पर एक-एक रुपये का हिसाब

मनरेगा के एक-एक रुपये का हिसाब मनरेगा पोर्टल पर दर्ज होता है. सभी तरह के भुगतान इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम के तहत किये जाते हैं. जिओ मनरेगा के तहत कार्य शुरू होने से पूर्व, कार्य के दौरान और इसके पूरा होने पर फोटो अपलोड किया जाता है.

ग्राम सभा एवं निगरानी समिति द्वारा क्रियान्वयन एवं प्राक्कलन के अनुरूप गुणवत्ता पर नजर रखी जाती है. जिला एवं प्रखंड के वरीय अधिकारियों द्वारा समय समय पर स्थल जांच और अनुश्रवण किया जाता है.

जेएसएलपीएस द्वारा सोशल ऑडिट एवं समवर्ती अंकेक्षण भी किया जाता है. मनरेगा की प्रत्येक एक्टिविटी पूरी तरह से पारदर्शी है. ऐसे में मंत्री के स्तर से इस तरह का बयान दिया जाना निंदनीय है.

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