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गोड्डा के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में कोयला का खनन असंवैधानिक : अधिवक्ता डीके सिन्हा

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Ranchi : झारखंड के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में राज्यपाल द्वारा कोल बियरिंग एक्ट लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं करने के सवाल पर अधिवक्ता दीपक कुमार सिन्हा ने कहा कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में कोयला का खनन करना असंवैधानिक और गलत है. क्योंकि, राज्यपाल द्वारा कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी नहीं की गयी है. ऐसे में उन्होंने पांचवीं अनुसूची के अनुपालन के लिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने की बात कही. न्यूज विंग से बातचीत में डीके सिन्हा ने कहा कि इस संबंध में एससीसीएल एवं कोयला मंत्रालय भारत सरकार के संज्ञान में लाने के उद्देश्य से आम सूचना भी प्रकाशित करायी गयी है. इसमें कहा गया है कि 1977 में तत्कालीन राष्ट्रपति संविधान की पांचवीं अनुसूची के पारा 6(2) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए गोड्डा जिला के बोआरीजोर और सुंदरपहाड़ी को अनुसूचित क्षेत्र घोषित कर दिया था. इसके बाद से ही दोनों प्रखंड अनुसूचित क्षेत्र बने हुए हैं. वर्ष 1970 से वर्तमान समय तक तत्कालीन बिहार के राज्यपाल एवं झारखंड बनने के बाद झारखंड के राज्यपाल ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के पारा -5 (1), 5(2), 5(3) एवं 5(4) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग नहीं किया है, जिसके कारण आदिवासी इलाके में विस्थापन का खतरा मंडरता रहता है. डीके सिन्हा ने कहा कि गोड्डा में जहां कोयला खनन की बात की जा रही है, वहां राज्यपाल की ओर से कोल बियरिंग एरिया (अधिग्रहण और विकास) अधिनियम 1957, सीबी एक्ट 1957 को अब तक बोआरीजोर और सुंदरपहाड़ी में लागू नहीं किया गया है. ऐसे में कोल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 1980-81 और 2001 में बोआरीजोर प्रखंड के कई गांवों में सीबी एक्ट 1957 के तहत कोल खनन एवं विकास के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए निकाली गयीं सभी अधिसूचनाएं असंवैधानिक एवं गलत हैं. साथ ही, इस संबंध में निकाली गयीं सभी अधिसूचनाओं को वापस करने के लिए महेंद्र कुमार महतो की ओर से नोटिफिकेशन को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने की बात कही.

इन जगहों पर होना है कोयला खनन

गोड्डा जिला के बोआरीजोर प्रखंड के मौजा केंदुआ, तेतरिया, बड़ा सिमरा, छोटा सिमरा, घाट सिमरा, सुआरमारी, घाटनीमा, चितरकोटी, नीमकला, हिजुकिटा, लालमटिया, बसडीहा एवं हर्राखा आदि मौजों में कोयला का खनन किया जाना है.

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