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खनिक बहाली मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पलटा झारखंड हाईकोर्ट का फैसला, कहा- कानून में नहीं है धोखाधड़ी की जगह

Ranchi: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी हासिल करने के लिए धोखाधड़ी को कानून द्वारा अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि वैध प्रक्रिया के दुरुपयोग का मतलब सही लाभार्थियों को नौकरी के लाभ से वंचित करना होगा.

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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम मेसर्स भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की एक इकाई के प्रबंधन की अपील को स्वीकार करते हुए यह फैसला झारखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ के एक आदेश के खिलाफ आया. उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में पीएसयू में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति समुदाय के 38 खनिकों को बहाल करने के लिए कहा था. साथ ही उन्हें 50 प्रतिशत पिछली मजदूरी का भुगतान करने को भी कहा था.

संबंधित मामला यह था कि जिन खनिकों का नाम संबंधित क्षेत्र के रोजगार कार्यालय की सूची में नहीं था, उन्हें रोजगार कार्यालय के दो कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध रूप से नियुक्त कर दिया गया था. रोजगार कार्यालय के दोनों कर्मचारियों को पहले ही बर्खास्त किया जा चुका है.

38 खनिकों की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए, न्यायमूर्ति एस.के. कौल और हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा, ‘विद्वान एकल न्यायाधीश के तर्कसंगत आदेश को अनुचित पाया गया है. तदनुसार खंडपीठ के फैसले को खारिज करते हुए अपील की अनुमति दी जाती है.’ पीठ ने पहले के एक फैसले का हवाला दिया और कहा कि अदालत की जिम्मेदारी है कि ‘धोखाधड़ी वाले रोजगार से बचाव करें, खासकर जब ऐसी नियुक्ति अधिकारियों पर धोखाधड़ी को कायम रखते हुए की जाती है.’

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