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आइरिश लेखिका एना बर्न्स की मिल्कमैन ने जीता Man Booker Prize

उपन्यास MilkMan लोगों को #MeToo के बारे में सोचने में मदद करेगा. यह अफवाह के नुकसान और खतरे के बारे में एक बहुत ही शक्तिशाली उपन्यास है. 

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NwDesk : अपने पाठकों के बीच अद्भुत लेखन शैली के लिए जानी जाने वाली आयरलैंड की लेखिका 56 वर्षीय एना बर्न्स को उनकी किताब मिल्कमैन (MilkMan)  के लिए प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार (Man Booker Prize) से सम्मानित किया गया है. यह पुरस्कार जीतने वाली वह पहली उत्तरी आइरिश लेखिका हैं.  मैन बुकर पुरस्कार उन्हें मंगलवार को दिया गया. आइरिश लेखिका एना 1987 में लंदन में रहने लगी थीं.  उनकी पहली किताब नो बोंस थी. लिटिल कंस्ट्रक्शंस और मोस्टली हीरोज भी उनकी किताब है. बता दें कि बर्न्स ने अमेरिकी लेखक रिचर्ड पावर,  कनाडाई उपन्यासकार एसी एडुगन समेत तीन अन्य लेखकों को पीछे छोड़ कर यह पुरस्कार जीता है. साल 1969 में स्थापित, मैन बुकर पुरस्कार मूल रूप से ब्रिटिश, आयरिश और राष्ट्रमंडल लेखकों के लिए था. साल 2014 के बाद अमेरिकियों को इसके लिए पात्र माना गया. साल 2016 में पॉल बेट्टी और साल 2017 में जॉर्ज सॉन्डर्स, इस पुरस्कार के अमेरिकी विजेता रहे हैं.

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एना बर्न की इस किताब में क्रूरता व यौन शोषण ह्यूमर के साथ प्रस्तुत की गयी है

बता दें कि  उपन्यास मिल्कमैन 1970 के समय काल में उत्तरी आयरलैंड में रहने वाली एक 18 वर्षीय लड़की के इर्द-गिर्द घूमता है. वह लड़की एक रहस्यमयी और उम्र में उससे कहीं बड़े एक व्यक्ति से संबंध बनाने के लिए विवश होती है. वह आदती यौन उत्पीड़न के लिए पारिवारिक रिश्तों, सामाजिक दबाव और राजनीतिक निष्ठा सरीखें हथियारों का इस्तेमाल कर रहा था. पुरस्कार देने का निर्णय लेने वाले जजों के अनुसार एना बर्न ने अपनी इस किताब में डार्क ह्यूमर का बेहतरीन प्रयोग किया है. लेखक, दार्शनिक और जज में से एक क्वाम एंथोनी एपियाह ने माना कि हम सबमें से किसी ने भी इस तरह का कुछ भी नहीं पढ़ा था. कहा कि एना बर्न की इस किताब में क्रूरता व यौन शोषण ह्यूमर के साथ प्रस्तुत की गयी है.

कहा गया कि उपन्यास MilkMan लोगों को #MeToo के बारे में सोचने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह अफवाह के नुकसान और खतरे के बारे में एक बहुत ही शक्तिशाली उपन्यास है.

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