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लद्दाख में सैनिक अलर्ट, चीन ने 1962 की जंग के गवाह गलवान नदी के पास लगाया टेंट

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New Delhi : चीन के वुहान से फैले कोरोना दिन ब दिन वीभत्स रूप लेता जा रहा है. एक ओर कई देश इस महामारी के टीके की खोज में लगे हैं तो दूसरी ओर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. तीन पहले सिक्किम से सटी सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच आपसी टकराव हुआ, लेकिन फिर इसे सुलझा लिया गया. लेकिन दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए तनाव के साथ ही चीन की सीमा से सटा लद्दाख भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है.

चीन और भारत की विवादित सीमा के लद्दाख क्षेत्र में अलर्ट है. आयी रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की पीएलए ने 1962 में हुई जंग के दौरान पुराने पड़ाव गलवान नदी के पास अपना टेंट लगाया है. साथ ही देमचोक क्षेत्र में निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है.

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 1962 की जंग का गवाह बना था ये क्षेत्र

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, टेंट लगाने की बात को तीन हफ्ते हो गये हैं, जिससे इस इलाके में तनाव की स्थिती है. वहीं इस बारे में अधिकारियों का मानना है कि संवाद चैनल्स के जरिए वहां के हालात को धीरे-धीरे नियंत्रित किया जायेगा. जबकि इस बारे में सेना का कहना है कि अस्थायी और कम समय का सैनिकों के बीच आमना-सामना होता ही रहता है, क्योंकि इसकी वजह भारत और चीन की सीमा के बीच का विवाद अब तक हल नहीं हो पाना है.

जबकि रक्षा सूत्रों के मुताबिक, 1962 में चीनी आक्रमण हुआ था और उस वक्त गलवान नदी का ये वही इलाका है, जहां उस समय दोनों देशों के सैनिक आपसे में भिड़े थे. ये इलाका उस आक्रमण का गवाह है और उसी दौरान से चर्चा में भी आया.ये बात और है कि दोनों देशों ने विवादित सीमा से अपने-अपने सैनिकों को पीछे कर लिया है.

पैंगोंग त्सो झील के पास निर्माण कार्य में लगा है चीन

यहां बता दें कि सब सेक्टर नॉर्थ में स्थित इस क्षेत्र में चीन की पीएलए लंबे समय से गश्ती करती रही है. जबकि दोनों देशों की ओर से इस इलाके में सैनिक गश्ती करते हैं.

इस बारे में सूत्रों का कहना है कि इस जो दोनों पक्षों के बीच टकराव  पैट्रोल पॉइंट-14 पर हुआ था. जिसके बाद माहौल को शांत करने के लिए उचित कदम उठाये गये. यह स्थान दौलत बेग ओल्डी हवाई क्षेत्र के पास है, जो एसएसएन में तैनात किये गये सैनिकों की लाइफलाइन भी है.

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लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि लद्दाख सीमा पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है. साथ ही जो रिपोर्ट सामने आयी है, उसमें कहा गया है कि पैंगोंग त्सो झील के पास दोनों देशों की सैनिकों के बीच हल्की झड़प हुई थी. वहीं खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की ओर से देमचोक क्षेत्र  में निर्माण कार्यों के लिए 1,000 से ज्यादा भारी वाहन लाये गये हैं.

नेपाल सीमा पर भी बढ़ायी गयी है चौकसी

जो इनपुट मिला है उसके मुताबिक, चीन की गतिविधि को देखते हुए नेपाल सीमा पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है. साथ ही लिपुलेख दर्रे के पास हो रहे सड़क के निर्माण में बदलाव के बाद सशस्त्र पुलिस के हजारों जवानों को कुछ समय पहले ही तैनात किया जा रहा है.

गलवान में हुआ टकराव के बाद सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की, पर सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा कि जोनों देशों की सीमा विवाद का हल नहीं होना ही इसकी वजह है. जबकि रक्षा सूत्रों की कहना है कि एसएसएन में तनाव चीन की आक्रामक पैट्रोलिंग के बाद ही बढ़ रहा था.

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