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झारखंड में उग्रवादी पकड़ हो रही कमजोर, पिछले चार साल में एनकाउंटर में 76 उग्रवादी मारे गये, 949 हुए गिरफ्तार

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Ranchi : कभी झारखंड को उग्रवादियों का गढ़ माना जाता था. छत्तीसगढ़ के बाद उग्रवादी घटनाओं में दूसरे नंबर पर रहनेवाले झारखंड में उग्रवादी संगठन कमजोर पड़ गये हैं. इसकी मुख्य वजह है कि पिछले चार साल में जहां 949 उग्रवादियों की गिरफ्तारी हुई, वहीं 76 उग्रवादी एनकाउंटर में मार गिराये गये. झारखंड में हुई उग्रवादी घटनाओं के पिछले चार साल के आंकड़ों को देखें, तो 2013 में झारखंड में 123 उग्रवादी घटनाएं हुई थीं, जो 2015 में घटकर 76 हो गयी. 2018 में अभी तक यह संख्या 21 पर सिमट गयी है. कई बड़े उग्रवादियों का मारा जाना, कई की गिरफ्तारी होना और कई उग्रवादियों के आत्मसमर्पण करने के कारण और हथियार की कमी होने की वजह से झारखंड में उग्रवादी घटनाओं में प्रत्येक साल कमी आ रही है.

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झारखंड में अब सिर्फ 13 जिले ही उग्रवाद प्रभावित

झारखंड पुलिस को एक और उपलब्धि हासिल हुई है. लगातार मशक्कत से पुलिस ने उग्रवादियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है. नतीजतन अब राज्य में 16 जिलों से घटकर 13 जिले ही उग्रवाद प्रभावित रह गये हैं. उग्रवादी संगठन के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और कई बड़े उग्रवादियों का संगठन से मोहभंग होने के कारण यह संभव हो पाया है.

पिछले चार साल में 949 उग्रवादी गिरफ्तार

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले चार साल में झारखंड के 949 उग्रवादियों को गिरफ्तार करके पुलिस ने जेल भेज दिया है.

  • 2014 में 16 उग्रवादी एनकाउंटर में मारे गये, जबकि 267 गिरफ्तार किये गये और दो उग्रवादियों ने सरेंडर किया.
  • 2015 में 28 उग्रवादी एनकाउंटर में मारे गये, जबकि 220 गिरफ्तार किये गये और 9 ने सरेंडर किया.
  • 2016 में 15 उग्रवादी मारे गये, 184 गिरफ्तार किये गये और 27 ने सरेंडर किया.
  • 2017 में चार उग्रवादी मारे गये, 208 उग्रवादी गिरफ्तार किये गये, जबकि 40 उग्रवादियों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिये.
  • 2018 में अब तक 13 उग्रवादी एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं, जबकि 70 गिरफ्तार किये गये हैं. वहीं, 21 ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है.

2014 से लेकर 2018 के बीच के आंकड़ों पर अगर नजर डालें, तो पुलिस एनकाउंटर में 76 नक्सली मारे गये हैं, जबकि 949 नक्सलियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है. वहीं, 99 नक्सलियों ने हथियार डाल दिये.

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झारखंड से पांच उग्रवादी संगठन पूरी तरह खत्म

झारखंड के विभिन्न जिलों में काम करनेवाले छोटे-छोटे उग्रवादी संगठन भी अब खात्मे के कगार पर हैं. इनमें पहाड़ी चीता, जेपीसी, जेजेएमपी, एसजेएमएम, एसपीएम पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं. जो बचे हैं, उनमें मूल रूप से माओवादी, टीपीसी व पीएलएफआई हैं. माओवादी भी अब 25 फीसदी बचे हैं. वहीं, पीएलएफआई उग्रवादी भी 60 फीसदी खत्म हो चुके हैं, सिर्फ 40 फीसदी को खत्म करना बाकी है. टीपीसी की कमर लगभग तोड़ी जा चुकी है. हाल में कई नक्सली, पीएलएफआई के उग्रवादी और टीपीसी उग्रवादियों की गिरफ्तारी होने से ये सभी संगठन कमजोर पड़ गये हैं.

उग्रवादियों के खिलाफ चल रहा पुलिस का डेवपलमेंट एक्शन प्लान

सारंडा एक्शन प्लान, सरयू एक्शन डेवलपमेंट प्लान, झुमरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, पारसनाथ एरिया डेवलपमेंट प्लान, चतरा एरिया डेवलपमेंट एक्शन प्लान, बानालात इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान, गिरिडीह-कोडरमा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, दुमका-गोड्डा बॉर्डरिंग एरिया डेवलपमेंट प्लान, खूंटी-सरायकेला-चाईबासा बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, सिमडेगा खूंटी बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान, जमशेदपुर एरिया एक्शन प्लान, पलामू-चतरा एरिया एक्शन प्लान व गढ-वा लातेहार-पलामू बॉर्डरिंग एरिया एक्शन प्लान.

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अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए दे रहे छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम

नक्सली संगठन सहित कई अन्य उग्रवादी संगठन अपनी पकड़ को कमजोर होते देख छोटी-मोटी घटनाओं को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं. हाल में देखें, तो नक्सलियों और उग्रवादी संगठनों द्वारा पोस्टरबाजी और वाहनों में आग लगाकर दहशत फैलाकर अपनी उपस्थिति एक बार फिर से दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है.

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