Opinion

घर लौट सकते हैं प्रवासी मजदूर और विद्यार्थी, बर्शते राजनीति नहीं बल्कि समझदारी से काम लिया जाये

Anand Kumar

Ranchi: दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों और राजस्थान के कोटा में अटके विद्यार्थियों को वापस लाने के मसले को संवेदनशीलता, खुले मन-मष्तिष्क और सावधानी के साथ हल किया जाना चाहिए. 19 अप्रैल को केंद्रीय गृह सचिव ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की नेशनल एग्जीक्यूटिव के चेयरपर्सन के नाते विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों (straned labours within the satate/UT ) के गमनागमन (movement) के संबंध में जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल जारी किया है.

वह दरअसल प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के बारे में कोई बात ही नहीं करता. यह आदेश 20 अप्रैल, यानी आज से जिन क्षेत्रों में कुछ शर्तों के साथ काम की इजाजत दी गयी है.  उनमें काम करनेवाले संबंधित राज्यों में पंजीकृत मजदूरों को रोजगार हेतु गमनागमन/संचलन आदि की इजाजत दिये जाने के बारे में है.

इसे भी पढ़ें – कोरोना महामारी ने सत्ता के दोहरे चरित्र पर से पर्दा हटा दिया !

advt

इसमें फंसे हुए प्रवासी मजदूरों के बारे में सिर्फ इतना कहा गया है कि संबंधित राज्यों में फंसे हुए वैसे पंजीकृत प्रवासी मजदूर जो राहत शिविर/शेल्टर में रखे गये हैं, उन्हें उसी राज्य में काम करना होगा. वे रोजगार के लिए किसी अन्य राज्य में नहीं जा सकते.

इसमें वैसे मजदूरों के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है, जो काम छोड़कर अपने राज्य लौटना चाहते हैं या वर्तमान में जिस राज्य में कार्यरत थे. वहां पंजीकृत नहीं हैं अथवा उन क्षेत्रों में काम करते हैं, जिन्हें कोई छूट नहीं मिली है.

ये आदेश किसी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश के अंतर्गत सिर्फ और सिर्फ काम के लिए मजदूरों के गमनागमन के बारे में है. आखिरी पंक्ति में यह भी कहा गया है कि राज्यों के अंदर आवागमन की स्थिति में यात्रा के दौरान मजदूरों के भोजन एवं पेयजल की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी.

इसे भी पढ़ें – बड़ी संख्या में छात्रों ने न्यूजविंग से बांटी अपनी परेशानी, घर जाने के लिए मदद की लगायी गुहार

दरअसल आपातकाल की स्थिति के अतिरिक्त राज्य सरकारों के लिए राज्य सूची के विषयों पर केंद्र सरकार के आदेशों/दिशा-निर्देशों का पालन करना बाध्यकारी नहीं है. इसलिए झारखंड सरकार यदि चाहे तो यहां के विद्यार्थियों और प्रवासी मज़दूरों को संबंधित राज्य सरकारों और रास्ते में पड़नेवाले राज्यों से बातचीत कर वापस ला सकती है.

ये कहने की जरूरत नहीं कि इस वापसी में कोविड-19 से बचाव के सभी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन किया जाये, ताकि आवागमन की ये प्रक्रिया सुगम और सुरक्षित बनी रहे. किन्तु दुर्भाग्य से परिजनों से दूर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक संताप झेल रहे विद्यार्थियों और प्रवासी मजदूरों को उनके परिवार से मिलाने का मामला वर्तमान में एक राजनीतिक मुद्दा भर बनकर रह गया है.

इसे भी पढ़ें – प्रधानमंत्री जी, आपने धर्म को लेकर बोलने में देर कर दी, आपके लोगों की नफरत कहीं दुनिया में अलग-थलग ना कर दे हमें

डिस्क्लेमर:  लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ये उनके निजी विचार हैं. 

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: