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कोरोना काल में बच्चों के मिड-डे मील का छिना निवाला, 49 फीसदी बच्चों को ही मिली नकद राशि

  • कोडरमा, गुमला, गिरिडीह, पाकुड़ जिले के 40 प्रतिशत बच्चों को कम अनाज दिया गया
  • नकद राशि देने में कोडरमा, गुमला, गिरीडीह, पाकुड़ और गढ़वा की स्थिति सबसे खराब
  • 22 अप्रैल से 7 मई के बीच की गयी सोशल ऑडिट

Pravin Kumar

Ranchi: राज्य में लॉकडाउन अवधि में सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के स्थान पर बच्चों को अनाज और नकद राशि देने का प्रावधान सरकार ने किया था. लेकिन 49 प्रतिशत बच्चों को ही नकद राशि मिल सकी. अनाज देने के मामले में भी भारी गड़बड़ी सामने आयी.

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80 प्रतिशत बच्चों को ही कोरोना काल में मध्याह्न भोजन का अनाज मिल सका. जबकि सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों एवं सरकारी स्कूलों में मिड-डे कार्यक्रम चलाये जाते हैं. कोरोना सकट के बीच में सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में यह अनियमितता सामने आयी है. इस पूरे मामले में लापवाही बरते जाने को लेकर झारखंड सोशल ऑडिट यूनिट और राज्य खाद्य अयोग के द्वारा कराये गये ऑडिट में ये खुलासे हुए हैं.

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कोरोना काल में बच्चों को बंटने थे अनाज और राशि

राज्य सरकार के सहायता प्राप्त स्कूल और सरकारी स्कूलों के लिए सरकार ने कोरोना संक्रमण काल में विशेष व्यवस्था की थी. स्कूल बंद रखे जाने के कारण यह व्यवस्था आयी थी. इसके स्कूली बच्चों के बीच मिड-डे मिल का अनाज और राशि का वितरण शिक्षकों द्वारा किया जाना था.

एक से पांच कक्षा तक के स्कूली बच्चों को 4.48 रुपये और 100 ग्राम चावल वहीं 6 से 8 तक की कक्षा के लिए 4.71 रुपये एवं 150 ग्राम चावल देना था. लेकिन 49 प्रतिशत बच्चों को राशि नहीं मिल सकी. राशि देने के मामले में कोडरमा, गुमला, गिरिडीह, पाकुड़ और गढ़वा की स्थिति सबसे खराब रही. जबकि अनाज के मामले में सबसे खराब गोड्डा, गिरिडीह, कोडरमा और जामताड़ा जिला की स्थिति ज्यादा खराब रही.

20 प्रतिशत बच्चों को नहीं मिला अनाज मध्याह्न भोजन का

सोशल ऑडिट यूनिट के द्वारा कराये गये समवर्ती ऑडिट के दौरान 1767 बच्चों के परिवार से मध्याह्न भोजन की जानकारी ली गयी. मध्याह्न भोजन के वितरण सबंधी आकड़ों का भी मिलान किया गया जिसमें 1414 स्कूली बच्चों के परिजन को ही अनाज ही मिला है जबकि 353 बच्चों को स्कूल से किसी तरह का अनाज प्राप्त नहीं हुआ है. यह ऑडिट में शमिल बच्चों के परिजनों का 20 प्रतिशत है. वहीं गोड्डा जिले में 27.3 प्रतिशत और गिरीडीह जिले में 14.9 प्रतिशत ऑडिट में शामिल बच्चों के परिजनों को अनाज नहीं मिला है.

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40 प्रतिशत बच्चों को कम मिला अनाज

मध्याह्न भोजन के तहत लॉकडाउन के दौरान स्कूल के बच्चों को मिलने वाला अनाज जिसकी मात्रा एक से पांच कक्षा तक की कक्षा के लिए 100 ग्राम चावल व 6 से 8 तक की कक्षा के लिए 150 ग्राम चावल तय था. लेकिन ऑडिट रिपोर्ट में हुए खुलासे के अनुसार मात्र 60 प्रतिशत बच्चों को ही निर्धारित मात्रा शिक्षकों ने उपलब्ध करायी. कोडरमा, गुमला, गिरिडीह, पाकुड़ जिले के 40 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन का कम अनाज बच्चों को दिया गया.

लॉकडाउन के दौरान स्कूलों में मध्याह्न भोजन बंद रहे लेकिन बच्चों को नकद और चावल देने का प्रावधान किया गया था. इसके तहत कक्षा 1 से 5 तक के स्कूली बच्चों को 4.48 रुपये एवं 6 से 8 कक्षा के बच्चों के लिए 4.71 रूपये देने थे लेकिन सोशल ऑडिट में हुए खुलासे के अनुसार 49 प्रतिशत बच्चों को राशि नहीं दी गयी.

1767 परिवारों से मध्याह्न भोजन की राशि के बारे में जानकारी ली गयी जिसमें 859 परिवारों ने ही कहा कि राशि मिली है जबकि 908 परिवारों को कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है. इस मामले में कोडरमा, गुमला, गिरीडीह, पाकुड़ और गढ़वा जिलों की स्थिति सबसे खराब रही.

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