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मिड डे मील : रसोइया बहनें बोलीं- नौ महीने से नहीं मिला है मानदेय, भूखे मरने की आ गयी है स्थिति

  • लॉकडाउन में स्कूल बंद होने के बाद से नहीं मिल रहा मानदेय
  • मात्र 1200 रुपये प्रति माह है मानदेय

Koderma : जिले के सरकारी विद्यालयों में हजारों बच्चों का खाना बनानेवाली मिड डे मील कर्मियों रसोइया बहनों को पिछले नौ महीने से मानदेय नहीं मिला है. रसोइया संध्या पांडेय, अनीता सिंह, मुनेजा खातून ने बताया, “गरीबी के कारण हम स्कूल में सैकड़ों बच्चों का खाना बनाते हैं. लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद है, लेकिन नौ माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण हमारे परिवार के सामने भूखे मरने की स्थिति आ गयी है.”

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संवेदनहीन है जिला प्रशासन : संजय पासवान

ज्ञात हो कि विद्यालय में खाना बनाने के लिए इन रसोइया बहनों को मात्र 1200 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है. पिछले नौ माह से यह मानदेय नहीं मिलने से इनकी माली हालात काफी खराब हो गयी है. इस संबंध में सीटू राज्य कमिटी सदस्य संजय पासवान ने कहा कि रसोइया यूनियन और कर्मचारी संघ द्वारा कई बार डीसी को ज्ञापन देकर मानदेय भुगतान का आग्रह किया गया है, लेकिन जिला प्रशासन संवेदनहीन है. इस काम में कई विधवा महिला सहित आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं बच्चों का खाना बनाती हैं, लेकिन लॉकडाउन में इनको मानदेय नहीं देना मानवता के खिलाफ है. जल्द भुगतान नहीं होने पर सीटू आंदोलन के लिए बाध्य होगा.

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