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पारा मेडिकल स्टाफ ने थाम रखी है कोरोना मरीजों के सांसों की डोर

24 घंटे मरीजों के लिए ड्यूटी पर रहते हैं तैनात

Ranchi: राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स को इंटीग्रेटेड कोविड सेंटर बनाया गया है. जहां लगभग 600 मरीज कोरोना का इलाज करा रहे हैं. जहां गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर, ऑक्सीजन से लेकर दवाएं और टेस्ट का जिम्मा पारा मेडिकल स्टाफ के कंधों पर हैं. जो सुबह से लेकर रात तक 24 घंटे मरीजों के लिए ड्यूटी में तैनात हैं. यूं कहे तो मरीजों के सांसों की डोर पारा मेडिकल स्टाफ ने थाम रखी है.

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बिना ब्रेक 1 महीने से कर रहे सैंपल कलेक्शनः

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इंटीग्रेटेड कॉमेडी सेंटर होने के कारण टेस्टिंग की व्यवस्था भी न्यू ट्रामा सेंटर में की गई है. जहां पर सैंपल कलेक्शन कर उसे लैब में भेज दिया जाता है. वहां पर 10 पारा मेडिकल स्टाफ बिना ब्रेक के सैंपल कलेक्शन में 1 महीने से जुटे हैं. वही वार्ड से जाकर एडमिट मरीजों का भी सैंपल कलेक्शन करना उनके लिए किसी चैलेंज से कम नहीं है. फिर भी वह अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी पर तैनात हैं.

150 स्टाफ मोर्चे पर है तैयारः

हॉस्पिटल में कोविड ड्यूटी में लगाए गए पारामेडिकल स्टाफ की संख्या डेढ़ सौ के करीब है. उसमें से कुछ पारा मेडिकल स्टाफ को छोड़ बाकी के पारा मेडिकल स्टूडेंट्स है. जिनकी ड्यूटी वेंटिलेटर मॉनिटरिंग, सैंपल टेस्टिंग, ऑक्सीजन सप्लाई, एक्स-रे के अलावा सैंपल कलेक्शन में लगाई गई है. ये लोग अलग अलग शिफ्ट में मरीजों की सेवा में लगे है. इतना ही नहीं पीपीइ किट पहनकर 8 घंटे की ड्यूटी में न जाने कितनी परेशानियों से दो चार हो रहे है. चूंकि एक बार पीपीइ किट पहनने के बाद वे नैचुरल कॉल के लिए भी नहीं जा सकते. ऐसे में उनकी स्थिति काफी खराब हो जाती है.

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