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मेनहर्ट घोटाला-14 : तकनीकी समितियों ने माना- टेंडर गलत हुआ है, सुझाव दिया- इसे रद्द करें, पर रघुवर दास ने शर्तों को ही बदल दिया

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Saryu Roy

तकनीकी परीक्षण कोषांगः योग्यता की जांच-

विधिवत जांच आरम्भ करने के पूर्व निगरानी के तकनीकी परीक्षण कोषांग के कार्यपालक अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता ने संचिका पर अपना मंतव्य दिया था, जिसका उल्लेख पुस्तक के पूर्व खंड-10 में है. इसके आधार पर निगरानी आयुक्त से उन्हें जांच करने की अनुमति मिल गयी. उन्होंने जांच आरम्भ की. इस बीच झारखंड में फिर थोड़े समय के लिए राष्ट्रपति शासन लग गया. श्री शिबू सोरेन द्वारा भाजपा गठबंधन का मुख्यमंत्री होने के बावजूद लोकसभा में यूपीए के पक्ष में वोट देने के कारण भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और गुरुजी की सरकार गिर गयी. कार्यपालक अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने जांच पूरी कर अपना जांच प्रतिवेदन मुख्य अभियंता को सौंप दिया. मुख्य अभियंता ने अगले ही दिन इसे निगरानी आयुक्त को भेज दिया. निगरानी आयुक्त ने इस पर कोई आदेश नहीं दिया. संचिका को छ: माह तक अपने पास दबाये रखा. गहन जांच के उपरांत निगरानी तकनीकी परीक्षण कोषांग के कार्यपालक अभियंता और अधीक्षण अभियंता के द्वारा सौंपे गये संयुक्त जांच का प्रतिवेदन निम्नवत है. प्रतिवेदन निगरानी परीक्षण कोषांग के मुख्य अभियंता को सौंपा गया है.

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मुख्य अभियंता

निगरानी आयुक्त की टिपृ. 13/टि. पर दिये गये आदेश के आलोक में प्रधान सचिव, नगर विकास विभाग, रांची से संबंधित अभिलेखों की मांग की गयी थी, जिसके क्रम में नगर विकास विभाग द्वारा उनके पत्रांक 2625 दिनांक 23.07.10 (पृ. 138/प.) से अभिलेखों की छायाप्रति उपलब्ध करायी गयी है. पूर्व में मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग की संचिका संख्या- न.वि.-05/2009 नगर विकास के टिप्पणी पृष्ठ 9-5/टि. पर उस संचिका में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निगरानी आयुक्त के आदेश के आलोक में तकनीकी परीक्षण कोषांग का मंतव्य अंकित किया गया था. उक्त समीक्षा टिप्पणी में विषयांकित मामले से संबंधित कतिपय अभिलेखों के अभाव में पूर्ण समीक्षा प्रतिवेदन नहीं दी जा सकी थी. अब उपलब्ध अद्यतन अभिलेखों के आधार पर पुन: इसकी समीक्षा की गयी, जिसका विस्तृत प्रतिवेदन निम्नवत प्रकार से है :-

  1. यह विषय वस्तु रांची में ड्रेनेज-सिवरेज निर्माण के लिए परामर्शी चयन के लिए आमंत्रित निविदा में निविदा शर्तों के अनुसार अयोग्य होने के बावजूद सिंगापुर की परामर्शी कम्पनी, मे. मेनहर्ट को परामर्शी नियुक्त करने में हुई अनियमितता तथा भुगतान से संबंधित है.
  2. सर्वप्रथम अक्टूबर 2003 में रांची शहर के सिवरेज एवं ड्रेनेज निर्माण के लिए मे. ओआरजी कम्पनी से परामर्शी के रूप में कार्य करने हेतु रांची नगर निगम द्वारा एकरारनामा किया गया था. ओआरजी कम्पनी द्वारा वार्ड संख्या-1 से 24 तक के लिए 10 प्रतियों में पीपीआर दिनांक 13.12.2004 (पृ. 119/प. द्रष्टव्य) को समर्पित किया गया. प्रशासक, नगर निगम, रांची ने अपने पत्रांक 1315 दिनांक 17.06.05 (पृ. 117/प. द्रष्टव्य) द्वारा M/S ORG को यह पत्र दिया कि राज्य सरकार के आदेश संख्या- 1158 दिनांक 15.06.05 द्वारा उनके फर्म से सिवरेज एवं ड्रेनेज योजना के लिए परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने संबंधित कोई कार्य नहीं किया जाये एवं रांची नगर निगम के साथ फर्म के एकरारनामा को रद्द किया जाये.
  3. M/S ORG कम्पनी से निविदा रद्द होने के पश्चात् आगामी निविदा के लिए, शर्तों से संबंधित 41 पृष्ठों के बिड डॉक्यूमेंटस का अनुमोदन एवं परामर्शी चयन के लिए एक समिति एवं एक उपसमिति का गठन दिनांक 25.06.05 को किये जाने का जिक्र संचिका में है. नगर विकास विभाग के इस कार्य से संबंधित मूल संचिका की टि. पृ. 4-3/टि. की छायाप्रति अवलोकनार्थ पृ. 140-139/प. पर संलग्न है. RFP की प्रति पर किसी अधिकारी का हस्ताक्षर अंकित नहीं है. उपलब्ध कराये गये Request for Proposal (RFP) (41 पृष्ठों में) की छायाप्रति पत्राचार शीर्ष के पृष्ठ 181-141/प. पर रक्षित है.
  4. नगर विकास विभाग के संकल्प संख्या 1412 दिनांक 09.07.05 द्वारा निविदा के निस्तार के लिए मुख्य समिति का गठन किया गया एवं संकल्प संख्या 1413 दिनांक 09.07.05 द्वारा इस समिति के सहयोग के लिए एक तकनीकी उपसमिति का गठन किया गया जिसका स्वरूप निम्न रूप से है:-

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संकल्प संख्या- 1412 दिनांक 09.07.05 द्वारा गठित समिति

(क) सचिव, नगर विकास विभाग – अध्यक्ष

(ख) प्रधान सचिव, वित्त विभाग – सदस्य

(ग) सचिव, भवन निर्माण विभाग – सदस्य

(घ) प्रशासक, रांची नगर निगम – सदस्य

(ड़) श्री अनिल कुमार, मुख्य अभियंता, सीडीओ पथ निर्माण विभाग – सदस्य

संकल्प संख्या 1413 दिनांक 09.07.05 द्वारा गठित समिति

(क) प्रशासक, रांची नगर निगम – अध्यक्ष

(ख) श्री केपी शर्मा, कार्यपालक अभियंता, भवन निर्माण विभाग – सदस्य

(ग) श्री उमेश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग  सदस्य संकल्प संख्या- 1412 दिनांक 09.07.05 को संशोधन करते हुए नगर विकास विभाग द्वारा अपने संकल्प संख्या- 1835 दिनांक 30.08.05 से मुख्य समिति को निम्न प्रकार से संशोधित किया गया :-

(क) प्रधान सचिव, वित्त विभाग – अध्यक्ष

(ख) सचिव, नगर विकास विभाग – सदस्य

(ग) सचिव, भवन निर्माण विभाग – सदस्य

(घ) प्रशासक, रांची नगर निगम – सदस्य

(ड़) श्री अनिल कुमार, मुख्य अभियंता, सी.डी.ओ. पथ निर्माण विभाग – सदस्य

उक्त तीनों संकल्पों की छाया प्रतियां पत्राचार शीर्ष पर रक्षित हैं (पृ. 184-

182/प. द्रष्टव्य).

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योग्यता जांच

  1. परामर्शी Quality Based system (QBS) के आधार पर ग्लोबल टेंडर निकालने हेतु दिनांक 30.06.05 को निविदा आमंत्रित की गयी. निविदा खोलने की तिथि 25.07.05 रखी गयी थी. इसमें दिनांक 18.07.05 को Pre bid meeting का प्रावधान था. Pre bid meeting के बाद निविदा खोलने की तिथि को बढ़ा कर 02.08.05 की गयी. उक्त निविदा में तकनीकी प्रस्ताव के मूल्यांकन में सर्वाधिक अंक प्राप्त करनेवाले निविदाकार का ही Financial bid खोलने एवं संबंधित फर्म को दर Negotiation वार्ता के लिए आमंत्रित करने का प्रावधान रखा गया था. तीन मुहरबन्द लिफाफा पद्धति के आधार पर निविदा आमंत्रित की गयी थी. प्रथम लिफाफे में योग्यता की न्यूनतम शर्तों का प्रस्ताव, द्वितीय लिफाफे में तकनीकी प्रस्ताव तथा तृतीय लिफाफे में वित्तीय प्रस्ताव का प्रावधान किया गया था. न्यूनतम योग्यता की शर्त थी कि फर्मों के विगत तीन वर्षों का औसत टर्न ओवर 40.00 करोड़ रुपया या अधिक होनी चाहिए तथा निविदाकारों को विगत तीन वर्षों में लगातार मुनाफा होना चाहिए. प्री-बिड मीटिंग, जिसमें निविदाकार भी उपस्थित थे, में यह प्रश्न उठने पर कि किन-किन तीन वर्षों का टर्न ओवर अंकित किया जाये, यह निर्णय दर्शाया हुआ है कि वर्ष 2002- 03, एवं 2003-04 के लिए परामर्शी का बाह्य अंकेक्षित प्रतिवेदन तथा वर्ष 04-05 के लिए आंतरिक अंकेक्षित प्रतिवेदन निविदाकारों द्वारा प्रस्तुत किया जाये (पृ. 108/प. द्रष्टव्य). साथ ही यह शर्त भी निहित थी कि फर्म को शहरी सिवरेज एवं ड्रेनेज कार्य के लिए परामर्शी के रूप में कुल 300 करोड़ रुपये की प्राक्कलित राशि के कार्य का अनुभव विगत पांच वर्षों में होना चाहिए.
  2. परामर्शी चयन के उक्त निविदा में निम्न चार फर्मों द्वारा भाग लिया गया :-

(i) M/s GKW Consultant.

(ii) M/s Meinhardt Pvt. Ltd

(iii) M/s Burchill Partners Pvt. Ltd.

(iv) M/s Tahal Consulting Engineers Ltd.

  1. दिनांक 12.08.05 को सचिव, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में निविदा में प्राप्त प्रस्तावों की समीक्षा बैठक समिति द्वारा की गयी. इसमें यह पाया गया था कि चारों निविदाकारों में से कोई भी निविदादाता प्रस्ताव में bid document में पूर्व से निर्धारित Essential Minimum Qualifying Criteria को पूरा नहीं करते हैं. तकनीकी उपसमिति ने सभी निविदाकारों के तकनीकी प्रस्तावों को Non-responsive करार दिया, जिसके आधार पर मुख्य समिति द्वारा आमंत्रित निविदाओं को रद्द किये जाने का निर्णय लिया गया. साथ ही यह निर्णय भी लिया गया कि पुनर्निविदा में पूर्व bid document में वर्णित विभिन्न शर्त्तों में आवश्यक परिवर्तन करना आवश्यक है. समिति का यह मत था कि वर्तमान बिड document में वर्णित इस आवधारणा को जिसमें कि निविदाओं का निष्पादन मात्र Quality के आधार पर किया जाये, में भी परिवर्तन करना वांछनीय है और उसके स्थान पर Quality & Cost दोनों को शामिल किया जाये ताकि वित्तीय नियमावली में वर्णित प्रावधानों के अंतर्गत निर्णय लिया जा सके. (बैठक की कार्यवाही पृ. 115/प. पर रक्षित है).
  2. दिनांक 17.08.05 को 10.00 बजे पूर्वाह्न में माननीय मंत्री, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में उपर्युक्त मुख्य समिति एवं उपसमिति की संयुक्त रूप से बैठक हुई. इसमें मुख्य समिति एवं उप समिति के सदस्यों को 17.08.05 को ही 4.30 बजे अपराह्न में Minimum Eligibility Criteria के Supporting document का अध्ययन कर eligibility के बिन्दु पर निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने का निर्देश दिया गया.
  3. दिनांक 17.08.05 को 4.30 अपराह्न में यथानिदेशित सचिव, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में मुख्य समिति एवं उपसमिति की संयुक्त बैठक में विमर्शोपरांत पूर्व के eligibility criteria जिसमें विगत पांच वर्षों में 300 करोड़ की एक शहरी सिवरेज-ड्रेनेज प्रणाली को विकसित करने हेतु Project Management Consultancy Services प्रदान करने का अनुभव आवश्यक था, को परिवर्तित करते हुए यह निर्णय लिया गया कि अगर किसी निविदादाता के द्वारा सिवरेज अथवा ड्रेनेज में से किसी भी घटक से संबंधित 300 करोड़ रुपये की परियोजना के Project Management का कार्य किया गया हो तो यह मान लिया जायेगा कि उस निविदादाता ने minimum eligibility की शर्त को पूरा कर लिया है. साथ ही तकनीकी उपसमिति को निदेशित किया गया कि वे उक्त निर्णय के आधार पर प्रस्तुत दस्तावेज के अध्ययन के उपरांत एक तुलनात्मक विवरणी मुख्य समिति के समक्ष उपस्थापित करें. (बैठक की कार्यवाही की छायप्रति पृ. 185/प. पर संलग्न). RFP में निहित eligibility criteria को बाद में परिवर्तित करना नियमानुकूल नहीं है, क्योंकि संशोधित शर्तों के स्थिति में पुन: निविदा की जानी चाहिए ताकि अन्य निविदाकार भी निविदा में शामिल हो सकें.
  4. 17.08.05 के 4.30 बजे अपराह्न की बैठक में दिये गये निदेश के क्रम में चारों फर्मों की निविदा अभिलेखों के आधार पर तकनीकी उपसमिति द्वारा एक तुलनात्मक विवरणी प्रस्तुत की गयी (पृ. 187-185/प. पर द्रष्टव्य), जिसमें एक Burchill Partners Pvt. Ltd. का Unaudited Turnover A/C रहने के कारण एवं विगत् तीन वर्षों में लगातार Profit का Details नहीं रहने के कारण उन्हें तकनीकी रूप से अयोग्य किया गया. इसी विवरणी में M/s Meinhard Pvt. Ltd. द्वारा वर्ष 2002-03 एवं वर्ष 03-04 का Profit Details प्रस्तुत करने एवं वर्ष 2004-05 का Profit Details सार संक्षेप नहीं उपलब्ध कराने का प्रमाण मिलता है. वर्णित निविदा शर्तों के अनुसार M/s Meinhard को भी वर्ष 2004-05 का टर्न ओवर नहीं प्रस्तुत करने एवं वर्ष 04-05 का Profit Details नहीं प्रस्तुत करने के कारण अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए था, क्योंकि यह फर्मों की eligibility हेतु आवश्यक था .

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सार संक्षेप :-

  1. निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग की आरम्भिक जांच के समय पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये गये. सारे दस्तावेज उपलब्ध होने पर तकनीकी परीक्षण कोषांग ने रांची के सिवरेज-ड्रेनेज का डीपीआर तैयार करने के लिए परामर्शी की योग्यतावाली शर्त की जांच की. पाया गया कि निविदा में वर्णित योग्यता की शर्तों पर मेनहर्ट अयोग्य था.
  2. निविदा मूल्यांकन के लिए गठित तकनीकी उपसमिति और मुख्य समिति ने माना था कि कोई निविदादाता निविदा की शर्तों के आधार पर हैं इसलिए निविदा को रद्द किया जाये और नया टेंडर गुणवत्ता और लागत प्रणाली पर आमंत्रित किया जाये. लेकिन नगर विकास विभाग ने मंत्री श्री रघुवर दास ने इस सुझाव को मानने के बदले निविदा शर्तों को ही परिवर्तित करने का निर्देश दे दिया.
  3. निविदा खुलने के बाद निविदा की शर्तों में परिवर्तन किया गया, जो अनियमित था. परिवर्तन करने का निर्णय तत्कालीन नगर विकास मंत्री के कार्यालय कक्ष में उनकी अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. इसके लिए मंत्री, नगर विकास विभाग पूरी तरह जिम्मेदार हैं.
  4. निविदा प्रपत्र में अंकित था कि जो निविदादाता योग्यता की शर्तों को पूरा नहीं करेगा, उसका तकनीकी लिफाफा नहीं खुलेगा. परन्तु अयोग्य होने के बावजूद मेनहर्ट का तकनीकी लिफाफा खोला गया.
  5. योग्यता के पैमाना पर पक्षपात हुआ और मेनहर्ट को नाजायज तरीके से योग्य करार दिया गया.

डिस्क्लेमर- (लेखक झारखंड के पूर्व मंत्री रह चुके हैं. यहां प्रकाशित विचार उनके निजी हैं. इसका न्यूज विंग से कोई संबंध नहीं है.)

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