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Mega Sports Complex – 2: सरकार खर्च करती थी सालाना 3.50 करोड़, अब JSSPS का खर्चा है 10 करोड़

Ranchi : 2011 में रांची में 34वें नेशनल गेम का आयोजन हुआ. इसके बाद होटवार के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्टेडियमों की देखभाल का जिम्मा राज्य सरकार ने साझा (झारखण्ड खेल प्राधिकरण, Sports Authority Of Jharkhand) को दे दिया. राज्य सरकार और साझा मिलकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की देखभाल के लिए सालाना तकरीबन 3.50 करोड़ खर्च करने लगे थे.

फिलहाल जेएसएसपीएस (झारखंड स्टेट स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी, Jharkhand State Sports Promotion Society) को सालाना 10 करोड़ तक का खर्च आ रहा है. हालांकि यह भी सच है कि नेशनल गेम के आयोजन के बाद से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की कायदे से देखभाल नहीं किये जाने पर खूब सवाल उठे थे.

स्टेडियम वीरान पड़ने लगे थे. सरकार को भी चिंता होने लगी थी कि देखरेख के अभाव में वर्ल्ड क्लास स्टेडियम का स्टैण्डर्ड लोकल ना हो जाए. सभी 9 स्टेडियमों में टूट-फूट शुरू भी होने लगी थी. कहीं फॉल्स सीलिंग गिरने लगी, कहीं फॉल्स वॉल. यहां तक कि एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग की दीवार भी गिरने लगी थी.

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2012 से साझा ने ली जिम्मेदारी

राज्य सरकार ने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की विशेष देखरेख के लिए साझा का गठन किया था. 2012 में गठित किये गये इस प्राधिकरण का असल रोल कॉम्प्लेक्स की देखरेख और समुचित प्रबंधन का था. स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स परिसर में ही उसे ऑफिस दिया गया. स्टेडियमों के रख-रखाव के लिए सरकार ने साझा के लिए 56 करोड़ रुपये का फिक्स्ड डिपोजिट करा दिया. इसके ब्याज के पैसे से ही साझा समूचे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और खेल गांव की देख रेख 2015 तक करता रहा. जानकारी के अनुसार 2 लाख रुपये से 10 लाख रुपये मंथली के खर्च से यह सब होता था. यानी तकरीबन साढ़े तीन करोड़ रुपये सालाना खर्च आता था.

खेलगांव में IIM, रांची को हॉस्टल आवंटित किये जाने से इसके भाड़े मिलते थे. इन पैसों का उपयोग भी कॉम्प्लेक्स की देख रेख में होता था. 2015 में JSSPS को हैंडओवर करने के पहले स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के अलावा मोरहाबादी स्थित फुटबाल स्टेडियम और सिल्ली के फुटबाल स्टेडियम का रख-रखाव, बागवानी, साफ-सफाई और मेंटेनेंस का काम भी राज्य सरकार करती थी.

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आउटसोर्सिंग से होता था देखरेख का काम

साझा के पास अपनी पूरी टीम नहीं थी. ऐसे में उसे दूसरों के जरिये ही काम कराना होता था. देखरेख के लिए आउटसोर्सिंग का सहारा लिया जाता था. अलग अलग स्टेडियमों के लिए 1-1 स्टेडियम मैनेजर रखे गये थे. स्पोर्ट्स बैकग्राउंड वाले कुल 12 लोगों को साझा ने अपने साथ रखा था. इनका काम स्टेडियम में दिखने वाली समस्याओं को पकड़ना था. इसी आधार पर साझा उसे ठीक कराता रहता था. फिलहाल 3 स्टेडियम मैनेजर ही बचे हैं.

स्टेडियम मैनेजर के अलावा साझा द्वारा इंजीनियरों की मदद से स्टेडियम में टूट-फूट को देखा जाता था. उसी आधार पर उसकी मरम्मत की जाती थी. सिक्योरिटी के काम के लिए उन लोगों को प्राथमिकता दी गयी जिनकी जमीन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने में ली गयी थी. इसी तरह गार्डनिंग के कामों में भी विस्थापितों को मौका दिया जाता रहा. एनबीसीसी (National building construction) के जरिये सिविल वर्क का काम कराया जाता रहा. इसके अलावा दूसरे विभागों के इंजीनियरों की भी मदद ली जाती थी. यह सब सिलसिला 2015 तक चलता रहा. साल 2015 के आखिर तक समूचा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जेएसएसपीएस के हाथों चला गया. अभी वही इसका संचालन कर रहा है.

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