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सिमडेगा मंडल कारा के प्रभारी अधीक्षक संजय को एनोस और मधु कोड़ा के बीच मुलाकात कराना महंगा पड़ा

सीओ के पुनर्विचार आवेदन के कथन को राज्य सरकार ने किया अस्वीकृत, दो वेतन वृद्धि पर लगाई रोक

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  • संजय कुमार ने अपनी स्वेच्छा से एनोस और मधु कोड़ा के बीच 40 मिनट तक मुलाकात कराया
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Ranchi: सिमडेगा के तत्कालीन सीओ सह सिमडेगा मंडल कारा के प्रभारी अधीक्षक संजय कुमार सिंह को पूर्व मंत्री एनोस एक्का और पूर्व सीएम मधु कोड़ा के बीच मुलाकात कराना महंगा पड़ा. राज्य सरकार ने सीओ के पुनर्विचार आवेदन को अस्वीकृत करते हुए, उसके खिलाफ लगाये गये दंड को बहाल रखा है. संजय के दो वेतन वृद्धि पर रोक लगायी गयी है. कहा गया है कि प्रभारी कारा अधीक्षक ने मुलाकात के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया.

क्या है प्रभारी कारा अधीक्षक पर आरोप

आरोप संख्या एक: मंडल कारा सिमडेगा में बंद पूर्व मंत्री एनोस एक्का को कारा दस्तक के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुये पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से मुलाकात के निमित विशेष सुविधा उपलब्ध कराने से विभाग की छवि धूमिल हुई है. यह अक्षमता, कर्त्तव्यहीनता और स्वेच्छाचारिता का द्योतक है.

आरोप संख्या दो: सिमडेगा मंडल कारा अधीक्षक संजय कुमार सिंह द्वारा बंदी एनोस एक्का को पूर्व सीएम मधु कोड़ा से काराओं में अधिष्ठापित विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से फोटोयुक्त पर्ची के बिना ही मुलाकात कराया गया.

आरोप संख्या तीन: एक ही दिन में एनोस एक्का के परिवार के सदस्य से मुलाकात करायी गयी. कारा हस्तक नियम में स्पष्ट प्रावधान है कि मुलाकात 15 दिनों के अंतराल में होगा.

आरोप संख्या चार: बंदी एनोस एक्का और पूर्व सीएम मधु कोड़ा को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक अपनी स्वेच्छा से लगभग 40 मिनट तक मुलाकात कराया गया. साथ ही इन दोनों की मुलाकात मुख्यालय अधीक्षक द्वारा अपने कार्यालय कक्ष के समाने वाले कक्ष में कराया गया, जो नियमानुकूल नहीं है.

समीक्षा के बाद ये आरोप हुए प्रमाणित

तत्कालीन सीओ सह सिमडेगा मंडल कारा के प्रभारी अधीक्षक संजय कुमार सिंह के खिलाफ लगे आरोप और इनके द्वारा समर्पित बचाव व बयान और संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये जांच प्रतिवेदन की समीक्षा की गयी. जिसमें यह पाया गया कि पूर्व सीएम मधु कोड़ा एवं पूर्व मंत्री एनोस एक्का के मुलाकात की सूचना कारा निरीक्षाणालय को तत्काल नहीं दी गयी. मुख्यालय से अनुपस्थित रहने की सूचना कारा निरीक्षाणालय को नहीं दी गयी. जब प्रश्नगत मुलाकात के समय आरोपी स्वयं कारा परिसर में उपस्थित थे, तो उन्हें स्वयं भी आश्वस्त हो जाना चाहिए था कि मुलाकाती की निर्धारित प्रक्रिया का अनुपालन किया जा रहा है या नहीं.

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