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मेदिनीनगर नगर निगम के नये वार्डों में विकास हवा-हवाई, अच्छी सड़क को तरसते हैं लोग

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Palamu : मेदिनीनगर नगर निगम के नवसृजित चार वार्डों में विकास हवा हवाई है. कहने को तो यह इलाका जिला मुख्यालय से बिल्कुल सटा हुआ है, लेकिन यहां की अव्यवस्था देखकर किसी सुदूर क्षेत्र की तरह नजर आता है. इस क्षेत्र के लोग एक अच्छी अदद सड़क के लिए तरसते हैं. लंबे समय से इस इलाके की नालियों की सफाई नहीं की गयी है.

भाजपा के गढ़ के रूप में है विख्यात

चैनपुर का इलाका भारतीय जनता पार्टी के गढ़ के रूप में विख्यात है. यहां व्यवसायी वर्ग की संख्या अच्छी खासी है. कारोबार की दृष्टिकोण से चैनपुर पलामू जिले में अलग पहचान रखता है. लेकिन यह इलाका कई मामलों में काफी पीछे है. स्वच्छता का नामोनिशान नहीं है. बरसात तो दूर बूंदा-बांदी होते ही सड़क नरक हो जाते हैं.

राजनीति का केंद्र बिंदु माना जाता है चैनपुर

पलामू की राजनीति का केंद्र बिंदु चैनपुर को माना जाता है. हाल के वर्षों में चैनपुर को शहरी इलाका होने का गौरव प्राप्त हो चुका है. चैनपुर में नगर निगम के चार वार्ड बनाये गए हैं. इसके बाद भी विकास की कोई पहल अब तक किसी स्तर पर नहीं दिख रही है.

कहा जाता है कि चैनपुर राजनीति के क्षेत्र में भाजपा का गढ़ माना जाता है. चुनाव में अन्य दलों की अपेक्षा सर्वाधिक वोट भाजपा के ही खाते में जाते हैं, लेकिन यह विडम्बना ही है कि भाजपा के कार्यकाल में भी यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम हैं.

तत्कालीन विधायक इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल में बनी थीं सड़कें

स्थानीय लोगों की माने तो एक दशक पूर्व तत्कालीन विधायक इंदर सिंह नामधारी के कार्यकाल में चैनपुर के मुख्य सड़क समेत गलियों की सड़कों का निर्माण कराया गया था. मुख्य सड़क गुजरते समय के साथ पूरी तरह जर्जर हो गयी है. हाल यह है कि बरसात तो दूर बेमौसम बूंदा-बांदी के बाद भी सड़क पर चलना दुभर हो जाता है. चैनपुर के मुख्य चौक-चैराहों पर जल जमाव के बाद गंदगी बजबजा उठती है. गांव के नालियों की स्थिति भी बदतर है. सफाई के अभाव में नालिया बजबजा रही हैं, जिनका पानी सड़क पर बहता रहता है. पिछले कुछ दिनों से नगर निगम के सफाईकर्मियों की थोड़ी सुगबुगाहट शुरू हुई है, लेकिन यह अब तक सड़क की झाड़ू-बहारू तक ही सिमटा हुआ है.

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नामधारी के बाद त्रिपाठी और अब आलोक चैरसिया हैं विधायक

इंदर सिंह नामधारी के बाद कांग्रेस के कृष्णानंद त्रिपाठी इस क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं. फिलहाल इलाके का प्रतिनिधित्व कथित भाजपा के विधायक आलोक चैरसिया कर रहे हैं. वैसे पूरे गांव में अतिक्रमण एक अलग मसला के रूप में उभरा है. सड़क पर दुकानों के लगाये जाने के कारण अक्सर लगने वाला जाम भी एक नयी समस्या खड़ी कर रहा है. इसके निदान के लिए भी किसी स्तर से अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया है. इसमें भी अधिकारियों की उदासीनता साफ तौर पर झलकती है.

सड़क की सुध नहीं, सेफ्टी की चिंता

हाल के दिनों में ही जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया. इस दौरान प्रशासनिक स्तर से लोगों को सड़क पर वाहन चलाते समय आवश्यक सावधानियां बरतने के साथ-साथ यातायात नियमों से संबंधित जानकारियां दी गयी. जागरूकता रथ निकाले गए. मैराथन दौड़ आयोजित हुई. अधिकारियों ने लोगों को दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का उपयोग करने और चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट का उपयोग करने की हिदायत दी गयी. लेकिन यह विडम्बना ही है कि दुर्घटना को रोकने के उपाय नहीं किये जाते हैं. गौर करें तो जिले से गुजरने वाली राष्ट्रीय मार्ग पड़वा मोड़ से हरिहरगंज तक एवं पड़वा मोड़ से गढ़वा तक पिछले कई वर्षों से जर्जर है. हालांकि इन मार्गों को बनाने का काम चल रहा है, लेकिन गति कछुए जैसी है. नतीजा इन मार्गों पर अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं. दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क पर सुरक्षा के उपाये नहीं किये गये हैं.

चैनपुर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क काफी जर्जर

इन्हें छोड़ भी दें तो प्रमंडलीय मुख्यालय से सटे सद्दीक मंजिल मोड़ से चैनपुर की ओर जाने वाली सड़क कई जगहों पर पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. कोयल पुल समेत शाहपुर-विवेकानंद चौक, पटेल रमन स्कूल, कर्बला, चेकनाका, थाना मोड़ एवं थाना के पास के अलावे दर्जनों स्थानों पर सड़क में बड़े गड्ढे उभर आये हैं. इन गड्ढों के कारण सड़क पर वाहन चलाना खतरों से खाली नहीं रहता. सावधानी के बावजूद अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं. हैरत तो यह है कि सड़क पर सुरक्षा के लिए नसीहत के साथ-साथ नियम व कानूनों की जानकारी देने वाले अधिकारियों को दुर्घटना रोकने के लिए इन जर्जर सड़कों को ठीक कराने की कोई सुध नहीं है.

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