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करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी पीएमसीएच की चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था

मरीजों को खरीदनी पड़ती हैं महंगी दवाईयां

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Dhanbad: पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल और अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये के खर्च किये जा रहे हैं. सरकार के आला अधिकारी, स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी और मुख्यमंत्री रघुवर दास बार-बार कहते रहे हैं कि पीएमसीएच को एक ऐसा बड़ा अस्पताल बनाना है, जहां बड़ी से बड़ी बीमारी की भी इलाज संभव हो सके. राज्य के गरीब लोगों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़े. सरकार की इन तमाम घोषणाओं के विपरीत पीएमसीएच में हालत खस्‍ताहाल है. यहां सफाई तक का कोई इंतजाम नहीं है. वहीं आये दिन चिकित्सा में लापरवाही का खामियाजा यहां के मरीज भुगत रहे हैं.

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सर्दी खांसी की भी दवा नहीं

यह जानकर हैरानी होगी कि अस्पताल में सर्दी खांसी तक की दवा उपलब्ध नहीं है. गुरुवार को अस्पताल में झरिया के एक व्यक्ति को सर्दी खांसी की दवा नहीं दी गयी. बताया गया कि सर्दी खांसी की दवा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में यहां आनेवाले मरीजों को मजबूरन दवाएं अस्पताल परिसर में स्थित दुकानों से खरीदनी पड़ती है. जहां शहर के अन्य मेडिकल शॉप की तुलना में अधिक कीमत पर दवायें मिलती हैं. मेडिकल शॉप के लोग रात दिन अस्पताल के वार्डों, आईसीओ व ऑपरेशन थियेटर के बाहर मंडराते रहते हैं. दवाओं पर अस्पतालकर्मी और डाक्टरों का कमीशन फिक्स होता है. इसी कारण यहां के डॉक्टरों की लिखी दवायें महंगी कीमत में उपलब्ध होती है. जबकि, राज्य के दूर इलाके से मरीज यहां आस लेकर आते हैं कि उनका यहां बेहतर और मुफ्त इलाज हो जायेगा. लेकिन, डॉक्टरों की लिखी कुछ दवाईयों को छोड़कर बाकी अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं होती है. दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं.

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मरीजों को करना पड़ रहा है पैसे खर्च

राज्य के कई जिलों से मुफ्त इलाज कराने की सोच कर आनेवाले मरीज और उनके परिजनों को दवाएं खरीदने में निजी अस्पताल की तुलना में कम नहीं, बल्कि कुछ ज्यादा ही खर्च करने पड़ते हैं. झरिया के एक मरीज वी पाण्डेय ने बताया कि उन्‍हें सर्दी-खांसी के साथ बुखार है. डॉक्टर ने जांच के बाद दवा लिखी और एमपी जांच करवाने की सलाह दी. लेकिन, जब मरीज दवा लेने गये तो उनको वहां सिर्फ बुखार की दवाई ही मिली. दवा काऊंटर पर पूछने पर कहा गया कि बाकी की दवाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं. बाहर के मेडिकल स्‍टोर से खरीद लें. एमपी जांच के लिए जाने पर भी उनसे 120 रुपये मांगी गयी. पूछने पर बताया गया कि केवल बीपीएल और राशन कार्ड वालों की ही मुफ्त में जांच होती है. नौबत यह है कि रोज बिगड़ती सेवा से इस अस्पताल की रेपुटेशन करोड़ों खर्च के बाद भी लगातार गिर रही है.

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