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मेडिका ने दी धमकी- 80 हजार जमा करो तभी मरीज ले जाने देंगे, हंगामा

परिजनों ने कहा ‘गरीब हैं, सरकारी अस्‍पताल में करायेंगे इलाज, तो मेडिका ने थमाया मोटा बिल’

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Ranchi: निजी अस्पतालों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रहा है. आये दिन मरीजों के परिजनों के साथ अस्‍पताल वालों की झड़प और नोक-झोंक सुर्खियां बन रही है. शनिवार को देर शाम फिर एक ऐसा ही मामला रांची के बुटी मोड़ स्थित भगवान महावीर मेडिका में देखने को मिला. यहां इलाजरत संजय कुमार के परिजनों और अस्पताल के डॉक्‍टर के बीच खूब हंगामा हुआ.

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क्‍या है पूरा मामला

दरअसल पंकज साव रोड असिडेंट में चोटिल हो गए थे. जिसके बाद उन्हें शुक्रवार की रात भगवान महावीर मेडिका अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शनिवार को जब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधक से कहा मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाय, इनका इलाज किसी सरकारी अस्पताल में करायेंगे. इस पर अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजन को 80 हजार रुपए की मोटी रकम जमा कराने को कहा. मरीज के परिजन सोनू मल्लिक ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन उन्हें धमकी दे रहा था कि पैसे जमा करो, तभी मरीज को ले जाने देंगे. इस पर मरीज के परिजनों ने कहा कि हमलोग गरीब परिवार से हैं इतना पैसा एक साथ नहीं दे पायेंगे. इसके बावजूद मेडिका प्रबंधन उनकी बात मानने को तैयार ही नहीं था. इसपर परिजनों ने कहा कि अभी मरीज को डिस्चार्ज कर दिया जाय. ताकि, किसी सरकारी अस्पताल में इनका ईलाज कराया जा सके. बाद में पैसे का भुगतान कर दिया जाएगा. इसपर भी अस्पताल प्रबंधन ने बात नहीं सुनी और मरीज के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो गया.

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चौमिन बेचता है पंकज

सड़क दुर्घटना में चोटिल पंकज साव बगोदर का रहने वाला है. वह रांची में ठेला लगाकर चौमिन बेचने का छोटा सा कारोबार करता है. डॉ संजय कुमार मरीज का इलाज कर रहे थे. पंकज को आईसीयू में भी भर्ती किया गया था.

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70 हजार जमा करो तब होगा MRI

मरीज के परिजनों ने बताया कि हमसे जबरन 70 हज़ार रुपए मांगा जा रहा है. डॉक्‍टर कहते हैं पहले 70 हजार रुपए जमा कराओ तब मरीज का MRI किया जाएगा. जब मरीज को डिस्चार्ज करने की बात कही गयी तो 80 हजार रुपए का बिल पकड़ा दिया गया.

पहले भी मरीज करते रहे हैं शिकायत

मेडिका अस्पताल में यह घटना कोई नयी नहीं है. प्रायः यहां मरीजों के परिजनों एवं डॉक्टरों के बीच हंगामा होता रहता है. अस्पताल प्रबंधनन द्वारा मरीज के परिजन से फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं. पैसे नहीं देने पर मरीज और उनजे परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है.

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