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42 दिनों से धरने पर मिड डे मील कर्मी, बच्चों को छोड़ कर रहीं संघर्ष

पीने के पानी से शौचालय तक की हो रही परेशानी.

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Ranchi : त्योहार के दिनों में हर कोई अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहता है. राजधानी में महिलाओं का ऐसा समूह है जो 42 दिनों से लगातार अपने हक के लिये राजभवन के समक्ष धरना में बैठी हुई हैं. झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया-संयोजिका अध्यक्ष संघ के बैनर तले 25 सितंबर से लगातार धरने में बैठी है. समय के साथ साथ अब इन महिलाओं की समस्याएं भी बढ़ती जा रही है. महिलाओं ने कहा कि रात में वो धरना स्थल पर ही सोती है. ऐसे में उन्हें विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. महिलाओं ने बताया कि रात में आधी महिलाएं जागती हैं, तो आधी महिलाएं सोती हैं. वहीं कुछ महिलाएं नवजात शिशुओं को लेकर धरने में बैठी हैं. उनके बच्चों की भी तबीयत खराब होने लगी है.

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त्योहारों में डटी हैं महिलाएं

संघ की गुमला जिलाध्यक्ष देवकी देवी ने कहा कि 25 सितंबर से महिलाएं धरना दे रही है. जिसमें कई बार तीज, जिउतिया, दुर्गा पूजा आदि त्यौहार आयें, जो महिलाओं के लिये काफी जरूरी है. ऐसे में धरना में बैठी महिलाओं द्वारा तीज से लेकर अष्टमी तक की पूजा का आयोजन धरना स्थल पर ही किया गया. वर्तमान में दिवाली का आयोजन भी राजभवन के समक्ष ही किया जाएगी.

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शौचालय से लेकर पीने के पानी की परेशानी

खूंटी जिला अध्यक्ष रजनी लुगून ने बताया कि कुछ दिनों तक महिलाओं को नगर निगम की ओर से चलंत शौचालय उपलब्ध कराया गया, लेकिन अब चलंत शौचालय राजभवन के समक्ष से हटा दिया गया है. जिससे महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है. महिलाओं ने बताया कि पीने के पानी के लिये बोतल वाले पेयजल या जो महिलाएं शहर के आस पास के इलाके से आती है, उन पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

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संयोजिका को वापस लाने की मांग

अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने बताया कि संघ की मुख्य मांग वर्ष 2016 से हटायें गये लगभग 8000 रसोईया संयोजिका को वापस नौकरी में लाया जाये. बच्चों की पढ़ाई का कारण बता कर इन महिलाओं को नौकरी से हटा दिया गया. जबकि ये महिलाएं भी किसी न किसी परिस्थिति से जुझ कर ही काम करती है. इस क्रम में महिलाओं ने बताया कि पहले मीड डे मील की शुरूआत में महिलाओं से 20 पैसा प्रतिदिन की दर से काम लिया गया, तब महिलाएं इस काम से जुड़ना नहीं चाहती थी, अब जब महिलाएं काम कर रही है तो उचित मानदेय तो मिल नहीं रहा वहीं इन महिलाओं को अचानक काम से हटा भी दिया जा रहा है.

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मिले न्यूनतम वेतन

अन्य राज्यों की तर्ज पर रसोइया कर्मी भी न्यूनतम वेतन की मांग कर रही है. वर्तमान में इन महिलाओं को 1500 रुपये प्रति दस माह दिया जाता है. बल्कि साल के दो माह इन्हें वेतन नहीं दिया जाता. जबकि तमिलनाडु जैसे राज्य में इन्हें चतुर्थ कर्मचारी का दर्जा दिया गया है. केरल में प्रतिदिन 400 रुपये, हरियाणा में प्रति दस माह 3500 रुपये के साथ छह माह का मातृत्व लाभ, वर्ष में दो पोशाक आदि की सुविधाएं दी जाती हैं. बता दें कि पिछले आठ माह से इन महिलाओं को वेतन नहीं दिया गया है.

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