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बच्चों की तस्करी पर मेयर ने जतायी चिंता, कहा- खानाबदोश बच्चों के लिए बने कल्याण समिति

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Ranchi : रांची की मेयर आशा लकड़ा ने बच्चों की ट्रैफिकिंग पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में आज भी ऐसी प्लेसमेंट एजेंसियां कार्यरत हैं, जो यहां के भोले-भाले बच्चों को मेट्रो सिटी में बेचने का काम कर रही हैं. ऐसी प्लेसमेंट एजेंसियो के रजिस्टर्ड नहीं होने के कारण इनपर लगाम लगाना मुश्किल होता था, लेकिन अब सरकारी तंत्र के प्रयासों से इस पर रोक लगायी जा सकी है. मेयर ने खानाबदोश बच्चों के कल्याण के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से कल्याण समिति बनाने की बात कही है. मेयर बुधवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं. यह कार्यक्रम सेव द चिल्ड्रेन, वर्ल्ड विजन इंडिया, बचपन बचाओ आंदोलन की साझेदारी में आयोजित किया गया था. इस दौरान राज्य की महिला एवं बाल विकास और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ लुईस मरांडी,  झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर, सेव द चिल्ड्रेन के महाप्रबंधक महादेव हांसदा, निगम के कई पार्षद, सभी जिलों के जिला परिषद सदस्य सहित वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भी उपस्थित थे.

आयोग गठन के बाद कम हुआ बच्चों का पलायन

मेयर ने कहा कि 2006 में बच्चों की ट्रैफिकिंग मामले में एक टीम ने सर्वे किया था. सर्वे में पता चला था कि कई प्लेसमेंट एजेंसियां बच्चों को खरीदने-बेचने का काम करती थीं. जब इसकी तहकीकात हुई, तो पता चला ऐसी अधिकतर प्लेसमेंट एजेंसियां रजिस्टर्ड ही नहीं थीं. सर्वेक्षण के बाद ही विभिन्न राज्यों में बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया गया. आयोग के सक्रियतापूर्ण कार्य करने के कारण आज ऐसी प्लेसमेंट एजेंसियों की संख्या कम हुई है. इससे बच्चों का पलायन भी कम हुआ है.

कल्याण समिति बनने से खानाबदोश बच्चे बढ़ सकेंगे आगे

मेयर आशा लकड़ा ने कहा कि आज भी राजधानी के कई चौक-चौराहों पर बच्चे फूल बेचते, गीत गाते मिल जायेंगे. उन्होंने दावा किया कि ये बच्चे न तो राजधानी के हैं, न ही राज्य के अन्य जिलों के, बल्कि ये बच्चे खानाबदोश समाज के हैं. इन बच्चों के कल्याण के लिए जरूरी है कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग इनके लिए अलग से कल्याण समिति बनाये. ऐसा होने से ये बच्चे जीवन में आगे बढ़ सकेंगे.

कार्यक्रम में कई बिंदुओं पर की गयी चर्चा

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बच्चों के कल्याण के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में कई बिंदुओं पर चर्चा हुई, जो इस प्रकार है-

  • बाल यौन-शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह, तस्करी आदि को रोकने के लिए समुदायों के दृष्टिकोण में सुधार करने का प्रयास प्रभावी.
  • कानूनों और नीतियों के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना, जो बच्चों की रक्षा करते हैं.
  • बच्चे के लिए अनुकूल समुदायों का निर्माण करना.
  • प्रत्येक समुदाय में समुदाय आधारित बाल संरक्षण प्रणाली तंत्र के कामकाज को सुदृढ़ करना.

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