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7 साल तक चुप रहने वाली मेयर आशा लकड़ा अब बोलने लगी हैं!

Ranchi: रांची की मेयर आशा लकड़ा आजकल खूब सुर्खियां बटोर रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि अमूमन हर दिन उनका एक बयान मीडिया में आ रहा है कि कोरोना महामारी से लड़ाई में राज्य सरकार ने निगम को कोई आर्थिक मदद नहीं दी है.

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उनका कहना है कि इस लड़ाई के लिए उन्होंने सरकार से 10 करोड़ की आर्थिक मदद मांगी थी. लेकिन यह मदद अभी तक नहीं मिली है. इससे नाराज वह लगातार बयानबाजी कर रही है. 7 साल से मेयर बनी हुई आशा लकड़ा का किसी सरकार के खिलाफ बयानबाजी का मामला पहली बार सामने आया है.

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पिछली रघुवर सरकार के खिलाफ कभी बयानबाजी नहीं वाली मेयर नई सरकार पर लगातार हमला बोल रही है. निगम की खास्ता आर्थिक हालत के लिए मेयर लगातार वर्तमान सरकार को जिम्मेवार बता रही है. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि 7 साल तक चुप रहने वाली मेयर अब बोलने लगी है.

शर्मनाक, 7 साल से मेयर बनी हुई है आशा लकड़ा, लेकिन राजधानी की व्यवस्था में नहीं है सुधार

मेयर का कहना है कि आर्थिक मदद के लिए उन्होंने सरकार से 2 बार पत्राचार किया है. उसी तरह उन्होंने नगर विकास सचिव विनय चौबे, राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर सरकार की शिकायत की है.

लेकिन रांची की मेयर के लिए यह काफी शर्मनाक बात है कि 7 साल तक इस पद पर बने रहने के बाद भी आशा लकड़ा राजधानी की व्यवस्था दुरूस्त नहीं कर पायी है. रघुवर सरकार के दौरान कभी भी सफाई नहीं होने, जलापूर्ति की समस्या की शिकायत तो मेयर ने नहीं की. लेकिन अब सारा ठीकरा वह नयी सरकार पर फोड़ रही है.

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जानिए वह घटनाक्रम जिसमें मेयर सरकार पर लगा रही आरोप

  • 8 और 14 अप्रैल को मेयर ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा था. 8 अप्रैल को लिखे पत्र में जहां उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से 10 करोड़ रूपये की आर्थिक मदद मांगी थी. वहीं 14 अप्रैल को उन्होंने इसी मांग के लिए सरकार को दोबारा पत्र लिखा. सरकार से मदद नहीं मिलने से नाराज मेयर ने आरोप लगाना शुरू कर दिया.
  • 17 अप्रैल को अपने सहयोगी डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मेयर ने सरकार पर यह आरोप लगाया कि निगम के अधिकांश कर्मी कोरोना हॉटस्पॉट बन चुके हिंदपीढ़ी के तीन वार्डों 21, 22 और 23 में काम कर रहे हैं. केंद्र ने राज्य सरकार को 284 करोड़ की आर्थिक मदद दी है. लेकिन इसमें से सरकार ने निगम को 10 करोड़ की आर्थिक मदद भी देना उचित नहीं समझा. समय रहते मदद नहीं मिली और पूरे शहर में कोरोना संक्रमण फैला, तो इसका जिम्मेवार कौन होगा.
  • 22 अप्रैल को इसी शिकायत को लेकर मेयर ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस दौरान निगम क्षेत्र में वैश्विक कोरोना महामारी एवं जलापूर्ति में आ रही समस्याओं से भी राज्यपाल को अवगत कराया. आशा लकड़ा ने कहा कि इस महामारी से लड़ने के लिए विगत दिनों सरकार से 10 करोड़ की आर्थिक मदद मांगी गयी थी. कई बार सरकार से पत्राचार भी किया गया, लेकिन हेमंत सरकार ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की है. जो कि इस आपातकाल में सरकार की लापरवाही दिखता है.
  • पेयजलापूर्ति समस्या को लेकर मेयर ने नगर विकास सचिव को 3 फरवरी को एक पत्र लिखा था. और इस बाबत उन्होंने 20 अप्रैल को सचिव से मुलाकात भी की थी. पेयजलापूर्ति समस्या की बात करते हुए मेयर ने कहा कि निगम जो राजधानीवासियों से वाटर यूजर चार्ज का पैसा वसूलता है, उसे निगम अब पेयाजलापूर्ति को सौंपा जा रहा है. निगम के समक्ष आ रही आर्थिक समस्या का एक कारण यह भी है. इसे देखते हुए 3 फरवरी को नगर विकास सचिव को पत्राचार कर वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 के लिए करीब 19.77 करोड़ रूपये की मांग की गयी है. लेकिन यह मदद भी निगम को अभी तक नहीं मिली है. इसे लेकर 20 अप्रैल को मेयर ने विभागीय सचिव से मुलाकात भी की है.

टिप्पणी..

यह तो सभी को पता है कि अपने पिछले कार्यकाल में निर्दलीय चुनाव लड़ मेयर आशा लकड़ा ने 2018 का नगर पालिका चुनाव बीजेपी की टिकट पर लड़ा था. उस समय बीजेपी सरकार सत्ता में थी. इस दौरान कई बार निगम की कमियां सामने आयी, लेकिन मेयर ने कभी भी तत्कालीन नगर विकास मंत्री सीपी सिहं और मुख्यमंत्री रघुवर दास पर निशाना नहीं साधा.

इसके अलावा 7 साल का कार्यकाल काफी ज्यादा होता है, इसके बावजूद मेयर ने राजधानी की व्यवस्था दुरूस्त करने की पहल नहीं की. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि राजधानी की सफाई व्यवस्था का जिम्मा पिछले दो साल पहले एस्सेल इंफ्रा कंपनी को मिला था. सभी जानते है कि वह कंपनी भी बीजेपी के किसी नेता से जुड़ी थी. पार्षद लगातार कंपनी पर सफाई व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते रहे, लेकिन मेयर काफी समय तक कंपनी को हटाने से पीछे हटते दिखी.

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