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सदन में उठा मामलाः 23 सालों से बंद पड़ा है कुष्ठ आश्रम और स्कूल, बिगड़ रही पहाड़िया समाज की सेहत और शिक्षा

Ranchi:  संथाल परगना प्रमंडल में पहाड़िया सेवा मंडल की ओर से कुष्ट रोगियों के लिये कुष्ट आश्रम बनाया गया था जो 23 सालों से बंद पड़ा है. सदन में विधायक नलिन सोरेन,प्रो स्टीफन मरांडी व लोबिन हेम्ब्रम ने इस पर चिंता जतायी है. सरकार से इसके लिये पहल करने की अपील की है. विधायकों ने सेवा मंडल के बंद पड़े संपत्तियों को एक न्यायिक जांच समिति बनाकर जांच करायी जाये. विधायकों के मुताबिक इन केंद्रों में झारखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल व मध्यप्रदेश के रोगी आकर यहां स्वास्थ्य लाभ करते थे. लेकिन, सरकार की उपेक्षा की वजह से यह केंद्र आज तक नहीं खुल पाया. यही नहीं, सेवा मंडल द्वारा पहाड़िया जातियों के लिये 6 मध्य विद्यालय, 160 प्राथमिक विद्यालय व 60 पहाड़िया पाठशाला चलाया जाता था. इनमें से ज्यादातर विद्यालय का अस्तित्व समाप्त हो चुका है. जिस वजह से पहाड़िया जनजाति समाज के लोगों की सेहत और शिक्षा, दोनों पर गहरा असर पड़ रहा है. सरकार का भी ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है. यह आश्रम देवघर, आमड़ापाड़ा, बोरियो, चांदवा, पालोजोरी, बाघमारा, फतेहपुर, हंसडीहा व गोड्डा में संचालित था.

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काफी पुराना है कुष्ट आश्रम

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यह आश्रम काफी पुराना रहा है. इस केंद्र की स्थापना 1963 में हुई थी. एकीकृत बिहार में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ सुशीला नायर ने किया था. वर्ष 1994 तक तो ये सारे संचालित हुये लेकिन वर्ष 1998 से बंद पड़े हैं. न्यायालय के आदेश से देवघर के तत्कालीन डीसी के सेवा मंडल का रिसीवर नियुक्त किया गया था, लेकिन इसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया.

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