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मैट्रिक-इंटर में पास हुए 527142 छात्र, कॉलेजों व प्लस टू स्कूलों में 392303 सीटें, कहां होगा 1.34 लाख छात्रों का एडमिशन

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  • इस साल मैट्रिक में 310158, इंटर आर्ट्स में 139462, साइंस में 53086 और कॉमर्स में 24436 स्टूडेंस रहे सफल, एडमिशन के लिये मारामारी.
  • चार साल से नॉलेज हब बनाने की होती रही घोषणा, न बना नॉलेज हब और न ही कॉलेजों में बढ़ी सीटों की संख्या
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Ranchi : राज्य में हायर एजुकेशन बेपटरी होता नजर आ रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल मैट्रिक और इंटर (आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस) में कुल 527142 छात्र सफल रहे. जिसमें मैट्रिक में 310158, इंटर आर्ट्स में 139462, इंटर साइंस में 53086 और कॉमर्स में 24436 छात्रों ने परीक्षा पास की.

जबकि राज्य के पांचों यूनिवर्सिटी और 18 संबद्ध कॉलेजों में सीटों की संख्या सिर्फ 142303 है. वहीं प्लस टू में सीटों की संख्या 250000 है. इस हिसाब से 1.34 लाख छात्रों का एडमिशन कहां होगा, कैसे होगा इसका स्पष्ट जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के पास भी नहीं है.

होते रहे हैं प्रयोग पर प्रयोग, पर नतीजा रहा सिफर

उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए, राज्य में प्रयोग पर प्रयोग होता रहा है. हायर सकेंडरी व्यवस्था, सेमेस्टर सिस्टम और इंटर की अलग से पढ़ाई की बात सामने आई. लेकिन कोई भी व्यवस्था टिक नहीं सकी. सेमेस्टर सिस्टम में लेटलतीफी अबतक है.

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, संबद्ध और अनुशंसित कॉलेज में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस में क्षमता के कम सीटें ही हैं. सरकार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इनमें से अधिकांश कॉलेज एक या दो कमरे में चलते हैं. न तो ढंग के शिक्षक हैं और ना ही पढ़ाई के साधन.

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किसी भी विवि को नहीं मिला सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा

राज्य के पहले से स्थापित पांचों विश्वविद्यालय में से किसी भी यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं मिल पाया है. हालांकि राज्य में सात यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन इसमें से दो डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और बिनोद बिहारी महतो अबतक फुल-फ्लेज में नहीं आ पाये हैं.

राज्य गठन के बाद कितनी सरकारें आयीं और गयीं लेकिन किसी ने भी उच्च शिक्षा को प्राथमिकता की सूची में नहीं रखा. हर बार घोषणा की गयी, प्रस्ताव तैयार किया गया. लेकिन सभी ठंढ़े बस्ते में चले गये. शिक्षा के स्तर में गिरावट का यह भी प्रमुख कारण रहा.

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राजभवन के एक भी निर्देश का नहीं हुआ अनुपालन

  • सत्र का नियमितीकरण हो, सही समय पर परीक्षा हो और रिजल्ट भी समय पर प्रकाशित हो.
  • सभी यूनिवर्सिटी महालेखाकार कार्यालय से शीघ्र करायें ऑडिट.
  • सभी यूनिवर्सिटी राजभवन के निर्देशों का अनुपालन हर हाल में करें. छात्र हित सर्वोपरि है.
  • जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में अलग कर संचालित करने का निर्देश.
  • कॉलेज में हो दक्ष एकाउंटेंट.
  • हर दिन शिक्षक कक्षाओं का रजिस्टर में लिखेंगे ब्योरा.
  • छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत हो.
  • शिक्षकों की कमी को दूर की जाये.
  • सत्र समय पर पूरा हो.
  • कॉलेजों में आधारभूत संरचनाओं का हो विकास.
  • गुणवत्ता युक्त शिक्षा को बढ़ावा मिले.

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क्या नहीं हो पाया

  • इंटर कॉलेज विकल्प के तौर पर स्थापित नहीं हो पाये.
  • दो पालियों में पढ़ाई शुरू नहीं हुई.
  • पिछड़े क्षेत्रों में दो से तीन कॉलेज खोलने की घोषणा धरी रह गयी.
  • हर जिले में महिला कॉलेज नहीं खुल पायी.

ऐसी है कॉलेज में सीटों की स्थिति

विश्वविद्यालयकितने कॉलेजकितनी सीटें
सिद्धो-कान्हो1221810
विनोबा भावे1833330
रांची विवि1529823
नीलांबर-पीतांबर047475
कोल्हान1417765

कुल संबद्ध कॉलेज 18 हैं, इसमें 32100 सीटे हैं.
प्लस टू स्कूलों में सीटों की संख्या है 250000.

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