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मसानजोर : बांध पर अधिकार की बात तो छोड़िये, करार तक पूरा नहीं किया बिहार, झारखंड और बंगाल सरकार ने

Akshay Kumar Jha

Jharkhand Rai

Ranchi/Dumka : झारखंड की जमीन पर बने मसानजोर डैम के पानी और पानी से बनी बिजली पर बंगाल सरकार का हक है, इसे लेकर गाहे-बगाहे दुमका के लोग आवाज उठाते रहते हैं. हाल के दिनों में दुमका से भाजपा विधायक और मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने सीधे तौर पर बंगाल सरकार को हिदायत दी थी कि मसानजोर डैम से बंगाल सरकार अपनी नजर हटा ले, वरना वह परिणाम भुगतने को तैयार रहे. झारखंड की उपराजधानी दुमका से करीब 30 किमी दूर मयूराक्षी नदी पर बने मसानजोर डैम पर बंगाल सरकार के कृषि विभाग का कब्जा है. जैसे ही मसानजोर डैम पहुंचते हैं, वहां एक बड़ा सा गेट लगा मिलता है, जिसपर पश्चिम बंगाल सरकार के सिंचाई विभाग की तरफ से वेलकम लिखा हुआ है. कुछ दिनों पहले दुमका बीजेपी के कुछ कार्यकर्ताओं ने उसी गेट पर झारखंड सरकार का लोगो चिपका दिया था. इसके रिएक्शन में बंगाल पुलिस वहां पहुंचकर झारखंड सरकार के लोगो को हटाने का काम कर रही थी. इसी को लेकर फिलवक्त दुमका की राजनीति गर्म है.

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पूरी नहीं  हुईं करार की  शर्तें

मसानजोर डैम को लेकर बंगाल और बिहार सरकार के बीच एक करार हुआ था. करार दस बिंदुओं पर हुआ था. लेकिन, अफसोस की बात है कि बंगाल सरकार की तरफ से करार की एक भी शर्त पूरी नहीं की गयी. बिहार सरकार और झारखंड सरकार ने भी कभी करार की शर्तों को पूरा करने का काम नहीं किया. इस पूरे मुद्दे को महज चुनावी एजेंडा बनाकर रख दिया गया. चुनाव आने से पहले मसानजोर की याद पॉलिटिक्स को आती है, लेकिन चुनाव बीतते ही मामला सुनहरी याद बनकर दफन हो जाता है. इस बीच मसानजोर डैम से विस्थापित हुए लोगों के वोट के साथ हर चुनावी मौसम में खिलवाड़ होता है. लेकिन, सच में उन्हें हक दिलाने की लड़ाई की बिगुल कोई नहीं फूंकता.

Samford

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क्या करार हुआ था बंगाल और बिहार सरकार के बीच

24 दिसंबर 1951 को भागलपुर के कमिश्नर के रमन और मयूराक्षी योजना के एडमनिस्ट्रेटर अनिल बिहारी गांगुली के बीच करार हुआ. करार में जो तय हुआ, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है. जानते हैं क्या हुआ था करार-

  1. मयूराक्षी बांध 1955 के जून महीने के पहले तैयार नहीं होगा और जब तक यह बांध नहीं बन जायेगा, मयूराक्षी जलाशय में जल नहीं भरा जायेगा.

(करार के मुताबिक काम हुआ)

  1. मयूराक्षी जलाशय में दुमका सदर सब-डिवीजन के कुछ गांव पूरे तौर से और कुछ गांव के केवल कुछ अंश ही डूबेंगे. लेकिन, इन गांवों के विस्थापितों को कम-से-कम छह महीने पहले सुरक्षित स्थानों पर बसा दिया जायेगा. संताल निवासियों को यदि वह चाहेंगे, तो यथासंभव संतालपरगना में ही फिर से बसा देने की पूरी चेष्टा की जायेगी.

(ऐसा कुछ भी नहीं हुआ)

  1. विस्थापितों की संपत्ति (घर या जमीन) मयूराक्षी जलाशय में डूबेगी, तो उसके बदले बंगाल सरकार विस्थापितों को घर और जमीन देगी. जो भी क्षति होगी, उसकी पूर्ति आदेशानुसार बंगाल सरकार करेगी. इन सब बातों के लिए बिहार सरकार ने बिहार के ही एक सरकारी कर्मचारी को नियमित किया है, जो रीसेटलमेंट अफसर कहलायेगा, जिसका कार्यकाल दुमका में ही होगा.

 (ऐसा कुछ नहीं हुआ)

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  1. जमीन के बदले जमीन पैदावार के हिसाब से ही दी जायेगी, न कि क्षेत्रफल के हिसाब से. विस्थापितों को जो जमीन दी जायेगी, उसके आस-पास सिंचाई की सुविधा होगी. इसके लिए वीरभूम और संतालपरगना में स्थान-स्थान पर अनुसंधान जारी है.

(न अनुसंधान पूरा हुआ और न ही विस्थापितों को ऐसी कोई जमीन मिली)

  1.  राजनगर थाना के अंतर्गत अस्तीगढ़, टाफा, गंगापुर, सुंदरबेला और आजमनगर के गांवों में 1300 एकड़ जमीन पर ट्रैक्टर से जोत-कोड़ का काम जारी है, लगभग 400 एकड़ जमीन तैयार हो चुकी है. मयूराक्षी बांध के आस-पास रानेश्वर थाने के अंतर्गत 15 गांव में लगभग 1000 एकड़ जमीन दी जा चुकी है. जमीन के लिए अनुसंधान संतालपरगना और विभिन्न जिलों में जारी है. संभव है वीरभूम में मयूराक्षी नहरों से पटनेवाली जमीन भी लोगों से लेकर विस्थापितों को दी जाये.

(रानेश्वर थाना क्षेत्र में कुछ जमीन विस्थापितों को दी गयी. बाकी बात कागजों में ही सिमटकर रह गयी)

  1. अलीगढ़ में कुछ नमूने के घर विस्थापितों के लिए बनाये गये हैं और इस साल फिर रानेश्वर थाना और राजनगर थानावाले पुनर्वास के स्थानों में नयी तरह के लगभग 100 घर बनाने की व्यवस्था की गयी है.

(ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गयी)

  1. मयूराक्षी बांध से जो बिजली उत्पन्न होगी, उससे 21 छोटे-छोटे शहर बचाने की व्यवस्था की जा रही है. इसमें बिजली से रेशम के कपड़े की बुनाई, धान कूटने और आटा पीसने आदि कार्यों का भी प्रबंध किया जायेगा. गृह उद्योग और धंधों को न शहरों में सुविधाएं और प्रोत्साहन मिलेंगे.

(यह सभी ख्याली पुलाव साबित हुआ)

  1. जितने गांव मयूराक्षी जलाशय के अंतर्गत जलमग्न होंगे, उन्हें चार भागों में बांट दिया गया है. हर भाग के लिए पांच सदस्यों की एक उप समिति बनायी गयी है, जिनसे समय-समय पर विस्थापितों के पुनर्वास के संबंध में आवश्यक सलाह ली जायेगी. यह सदस्य विस्थापितों के ही प्रतिनिधि हैं. इसी तरह कुमड़ाबाद नाम का शहर बसाने के संबंध में एक अलग उपसमिति बनायी गयी है.

(ऐसा कुछ नहीं हुआ)

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  1. विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा की देखभाल के लिए 8 सदस्यों की एक बड़ी समिति काम कर रही है. इसमें बिहार और बंगाल की सरकार की तरफ से 4-4 सदस्य हैं. मयूराक्षी योजना के अध्यक्ष भागलपुर डिवीजन के कमिश्नर संतालपरगना के डिप्टी कमिश्नर चीफ इंजीनियर बिहार और भी सेटलमेंट ऑफिसर भी इसके सदस्य होंगे.

(समिति ने करार के किसी शर्त को पूरा करने में मदद नहीं की)

  1. मयूराक्षी जलाशय से नहरों में जल जायेगा और नहरों से खेतों में. खेतों से अधिक से अधिक अन्न उपजाये जायेंगे. हर साल कई लाख मन अधिक धान वीरभूम, मुर्शिदाबाद और संतालपरगना जिलों में उगाये जायेंगे. इससे देश की आमदनी बढ़ेगी और वर्षा के अभाव में फसल नहीं सूखेंगे. दुमका शहर और आसपास के गांव को बिजली मिलेगी. इससे रोशनी के अतिरिक्त छोटे-छोटे गृह उद्योग-धंधों को बड़े पैमाने पर विस्तार करने में सहायता मिलेगी.

(50 साल से ज्यादा हो गये, ऐसा कुछ भी होता नहीं देखा गया है).

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