Jamshedpur

मरांग गोमके ने सबसे पहले की थी झारखंड अलग राज्य की मांग : विश्वनाथ

बोड़ाम में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की ओर से मनायी गयी मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की जयंती, जीवनी से कराया गया अवगत  

Patamda : झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा बोड़ाम प्रखंड कमेटी की ओर से बोड़ाम डाक बंगला में जयपाल सिंह मुंडा की जयंती मनायी गयी. मौके पर बतौर मुख्य अतिथि राज्य सरकार के आदिवासी परामर्शदातृ सदस्य विश्वनाथ सिंह सरदार ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा ने ही झारखंड अलग राज्य की मांग सबसे पहले की थी. वे भारतीय आदिवासियों और झारखंड आंदोलन के एक सर्वोच्च नेता थे. वे एक जाने माने राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, संपादक, शिक्षाविद् और 1925 में ऑक्सफोर्ड ब्लूका खिताब पाने वाले हॉकी के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे. उनकी कप्तानी में 1928 के ओलिंपिक में भारत ने पहला स्वर्ण पदक प्राप्त किया. वे एक आईसीएस अफसर भी थे, आदिवासियों के हक की लड़ाई के लिए उन्होंने 1938 में आदिवासी महासभा का गठन किया. बिहार से अलग एक अलग झारखंड राज्य की मांग की. 1950 में झारखंड पार्टी का गठन किया और 1952 में 32 विधायकों के साथ बिहार सरकार के सामने बड़े विपक्ष के तौर पर सामने आए थे. इसके बाद एनई होरो और बागुन सुम्बरई ने आंदोलन का नेतृत्व किया और लोगों को अलग झारखंड राज्य क्यों जरूरी यह बताते हुए लोगों को आंदोलन से जोड़ा. आंदोलनकारियों ने विश्वनाथ सिंह सरदार को सम्मानित भी किया.

 

सभा को कई ने किया संबोधित

 

सभा को बोड़ाम के जिला पार्षद स्वपन कुमार महतो, आंदोलनकारी विश्वजीत प्रमाणिक, दुर्योधन महतो, मनबोध महतो, आदित्य महतो, रामनाथ महतो, श्यामापद महतो व आनंदमय महतो ने भी संबोधित किया.

 

जयंती पर ये थे मौजूद

 

Sanjeevani

मौके पर मुख्य रूप से मलिंद्र सिंह, लावकिशोर हांसदा, हाकिम चंद्र महतो, शरत चंद्र महतो, रेवती मोहन गोप, माधव चंद्र महतो, निधिराम सिंह, अमर गोप, रानू मुर्मू, मदन टुडू, देबुलाल सहिस, मथन महतो, ईशान मुर्मू व चित्तरंजन महतो समेत दर्जनों लोग मौजूद थे.

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