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झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट jhargov.in में कई खामियां

अधिकतर विभागों की साइट अपडेट नहीं, कई विभागों के अलग से विकसित किये गये पोर्टल खुलते ही नहीं

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Ranchi: एक ओर पीएम मोदी और राज्य के मुखिया रघुवर दास डिजिटाइजेशन पर जोर देते हैं. पेपरलेस वर्क क्लचर की बातें होती हैं, वहीं दूसरी ओर झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट jhargov.in अपडेटेड नहीं है. सूचना तकनीक के जमाने में फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्सएप से जहां कुछ सेकेंड में सूचनाएं मिल रही हैं. वहीं झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी नहीं मिलने पर विभागों की किरकिरी भी हो रही है.

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सरकार की तरफ से वेबसाइट में सभी विभागों का ब्यौरा संलग्न किया गया है. इसके अलावा सरकार की पे ऑनलाइन, परमिट ऑनलाइन, ई-ग्रिवांस सेल, मुख्यमंत्री जन वन योजना, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री जन-धन योजना और झारखंड सरकार के आंकड़ों पर आधारित झारइडाटा का भी पोर्टल बनाया गया है. वेबसाइट में सरकार का प्रयास है कि फिंगर क्लिक पर कुछ ही पलों में सभी जानकारी लोगों अथवा ब्राउज करनेवाले व्यक्ति को मिल सके.

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कुछ विभागों के आंकड़ें ही होते हैं अपडेट

 

सरकार के 34 विभागों में से एक दर्जन से अधिक विभाग ही ऐसे हैं, जिनके आंकड़े प्रति दिन अपडेट किये जाते हैं. इन विभागों में सूचना और जनसंपर्क विभाग, कार्मिक प्रशासनिक और राजभाषा सुधार विभाग, नगर विकास और आवास विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्य कर विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, कृषि पशुपालन और सहकारिता विभाग, कैबिनेट सेक्रेटरीएट, खाद्य सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के विभाग, पेयजल और स्वच्छता विभाग, उद्योग विभाग, गृह विभाग, पर्यटन और खेलकूद विभाग ही ऐसे हैं, जिनके सभी आंकड़े (टेंडर, नोटिफिकेशन, बजट एलोकेशन, ऑफिस आर्डर) को अपलोड किया जाता है. अन्य विभागों के न तो पोर्टल खुलते हैं और न ही उनके आंकड़ों को कभी दुरुस्त किया जाता है.

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12 से अधिक विभागों के पोर्टल खुलते ही नहीं

राज्य सरकार के कई ऐसे विभाग हैं, जिनके द्वारा विकसित अलग पोर्टल खुलते ही नहीं हैं. इसमें श्रम नियोजन विभाग का jharkhandemployment.nic.in, niyojanprashichan.nic.in, झारखंड बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन का पोर्टल, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग का पोर्टल, Jharkhand.nic.mic, महिला और बाल विकास विभाग का अलग पोर्टल, भवन निर्माण विभाग, गृह विभाग का कारा महानिदेशालय का पोर्टल भी काम नहीं करता है. इसमें यह संदेश स्क्रीन पर आता है कि प्लीज अपडेट द फीचर्ड लिंक.

कुछ विभागों के पोर्टल से जुड़े हैं राष्ट्रीय पोर्टल

ई-ग्रिवांसेस, डिजिलॉकर, विधि विभाग समेत कुछ अन्य विभागों के पोर्टल को खोलने से वह सीधा राष्ट्रीय पोर्टल से जुड़ जाता है. ऐसे में राज्य के लोगों की समस्या और परेशानी का पता ही नहीं चलता है. उदाहरण के तौर पर ई-ग्रिवांस पोर्टल खोलने से उसमें देश भर के लोगों की परेशानी से संबंधित डैशबोर्ड का आंकड़ा परिलक्षित होने लगता है.

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सरकार का हुनर पोर्टल भी ऐसा ही है. इस पोर्टल को राज्य के युवाओं को दक्ष और उनकी कौशल क्षमता को संवर्द्धित करने के लिए विशेषज्ञों की राय उपलब्ध करानी थी. हुनर पोर्टल विशेषज्ञों की राय ही युवाओं को उपलब्ध नहीं करा सका. इसके विपरित सरकार की ओर से स्किल इंडिया का पोर्टल बना दिया गया. सरकार की यह एजेंसी अब कौशल विकास का काम देख रही है. इसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चयनित संस्थाओं की तरफ से दिये जा रहे प्रशिक्षण की जानकारी दी जा रही है. सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री तक संदेश पहुंचाने के लिए फेसबुक और ट्वीटर एकाउंट का भी संचालन किया जा रहा है.

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अब तक नहीं बन पाया सीएम डैश बोर्

राज्य के मुख्यमंत्री का सीएम डैश बोर्ड आज तक सरकार नहीं बनवा पायी. छत्तीसगढ़ और दूसरे राज्यों की तरह सीएम डैश बोर्ड बनाया जा रहा था. इसका उद्देश्य राज्य में चल रही योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी सन्निहित की जानी थी. तीन-चार साल में इसकी प्रगति अनपेक्षित नहीं है. सीएम डैश बोर्ड से पहले सरकार की तरफ से फाइल ट्रैकर व्यवस्था लागू की गयी थी. जिसमें फाइलों के आने और उसके निष्पादन की तिथि और संबंधित व्यक्ति का नाम पता चल पाता था. फाइल ट्रैकर तो विभागों में काम कर रहा है. इसके लिए सभी विभागों में लिपिकीय संवर्ग के एक व्यक्ति को जवाबदेही सौंपी गयी है.

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