Opinion

फिटनेस के साथ-साथ कई ज्वलंत मुद्दों को साधा जा सकता है

Rajesh Das

Sanjeevani

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कल राष्ट्रीय खेल दिवस के मौक़े पर भारत में फ़िट इंडिया कैंपेन शुरू किया है. यह एक अत्यंत सराहनीय पहल है. इस विषय पर मैंने भी उनका लगातार ध्यान आकृष्ट कराया था.

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इस अभियान के कई फ़ायदे हैं और इस अभियान के साथ देश के कई ज्वलंत मुद्दों को भी आसानी से जोड़ा जा सकता है.

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जैसे-

  1. देश में ऑटोमोबाइल की सोच से अलग हटकर हर शहरों-गांवों-क़स्बों में डेडिकेटेड साईकिल ट्रैक्स और वाकेबल सिटीज (पैदल चलने) की नीति को प्रोत्साहित किया जा सकता है.
  2. कम से कम निजी गाड़ियों की नीति से स्वतः देश भर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन बढ़ने शुरू हो जाएंगे, जिसका फ़ायदा पर्यावरण समेत देश की इकोनॉमी पर भी समान रूप से होगा.
  3. स्वस्थ दिनचर्या और फ़िटनेस का सीधा फ़ायदा मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, अगर देश के युवाओं में फ़िट रहने की भावना बलवती हो जाए, तो देश कई क्षेत्रों में अपनी सफलता के परचम लहरा सकता है. डिप्रेसन, आत्महत्या, नशे, अपराध करने समेत अन्य मानसिक अवसादों से एक बड़ी आबादी को मुक्ति दिलाने में भी फ़िट इंडिया कैंपेन एक बड़ी भूमिका निभा सकता है.
  4. वर्तमान में देश के निजी, कॉरपोरेट, और धीरे-धीरे पेशेवर हो रहे सरकारी तंत्र में भी काम कर रहे कर्मियों के जीवन में काफ़ी तनाव है, सब कुछ टारगेट के साथ जुड़ा हुआ है. निचले स्तर पर काम कर रहे लोगों के लिए कोई भी नहीं सोचता है, फ़िट इंडिया कैंपेन उनके जीवन में नये रंग भरने का वाहक साबित हो सकता है.
  5. हम क्या खाते हैं, और यह कितना स्वच्छ और शुद्ध है, इसका सीधा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है. वर्तमान में देश में खाद्य सामग्रियों के उत्पादन में अत्याधिक मुनाफ़ा कमाने के उद्देश्य से ग़लत तरीक़े हावी हो गए हैं. उसी प्रकार रेस्टोरेंट्स के किचन-बर्तन आदि की साफ़-सफ़ाई और वहां प्रयुक्त सामग्रियों में भी बहुत ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है. अगर ऐसा हो सके तो इलाज के लिए अभी जो अस्पतालों में क़तार लगी हुई है, वह काफ़ी छोटी हो जायेगी.
  6. फ़िट इंडिया कैंपेन का सीधा फ़ायदा देश के खेलों और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ेगा. अतः खिलाडियों को सही पोषण मिले इसपर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. प्रोटीन-कैल्शियम-कैलोरी अदि सही तरीके से देने की व्यवस्था की जानी चाहिए.

आप देख सकते हैं कि गरीब अफ़्रीकी देशों से भी खिलाड़ी सही भोजन, अच्छे प्रोटीन और अन्य पोषण के बूते अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब हैं.

  1. इसी प्रकार लगभग रोजाना देश के किसी ना किसी हिस्से से, किसी ना किसी जलाशय, नदी, समंदर, जल प्रपात आदि में बच्चों समेत वयस्कों के डूबकर हो रही मौतों से जुड़ी दुखद खबरें हमें लगातार प्राप्त होती रहतीं हैं, जो हमें अंदर तक उद्वेलित कर देती हैं.

खबरों को पढ़कर मन काफी दुखित हो जाता है, थोड़ा संताप रहता है, फिर जीवन अपनी पटरी पर लौट आता है, लोग इन खबरों को भूल जाते हैं, मगर जिनके परिवार में इस प्रकार की घटनाएं होती है, उनके दुख का अनुमान लगा पाना बेहद मुश्किल काम है.

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यहीं पर एक नवाचारी सरकारी नीति पूरे परिदृश्य को बदल कर रख सकती है. अगर भारत की सरकार देश के हरेक ब्लॉक के मुख्यालय में सर्वसुविधायुक्त  “प्रधानमंत्री तरणताल” का निर्माण करा दे,  जहां बच्चे तैराकी को खेल के साथ एक जीवन कला के रूप में सीख सकें तो इससे एक साथ कई हित साधे जा सकते हैं. एक अच्छा तैराक विपरीत परिस्थिति में पानी में खुद के साथ औरों की जान बचाने में भी कामयाब हो सकता है. इसके साथ तैराकी हमारे सर्वांगीण फिटनेस के लिए भी अच्छा है. तैरने से मन भी खुश रहता है, बुरी प्रवृतियों से बच्चों का मन भी दूर रह सकता है, और क्या पता यहीं से कोई माइकल फेल्प्स से भी बड़ा तैराक निकल जाये जो देश का मान बहुत ऊंचा कर सके.

फ़िटनेस के साथ और भी बहुत कुछ किया जा सकता है, श्रेष्ठ भारत तो आख़िर इन्हीं आधारभूत संरचनाओं के बूते ही सम्भव है!!

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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