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बालू के अवैध उठाव के कारण संकट में हैं कई बड़े पुल

Ranchi : रांची जिले के बुण्डू-तमाड़ बॉर्डर पर हाराडीह-बुढ़ाडीह पुल के ध्वस्त होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इसके पीछे अवैध बालू उठाव भी एक कारण है. ऐसी घटना राज्य के कई और जिलों में भी घट सकती है क्योंकि राज्य के कई जिलों बालू के अवैध उठाव का धंधा जोरों पर है.

खूंटी जिले में गुरमी और गानालोया के बीच बनई नदी पर बना पुल और माहिल और गानालोया गांव के मध्य इसी बनई नदी पर बने पुलों का पाया दब गया था. पुल पर आवागमन बंद हो चुका था.

हालांकि बाद में संवेदक के द्वारा इन दोनों पुलों की मरम्मत करा दी गयी. लेकिन खूंटी जिले में पुलों के धंसने की आशंका अब भी बनी हुई है.

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अधिकारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं

खूंटी जिले में बालू का अवैध उत्खनन बेरोक-टोक चलता है. जिसे देख हर आम आदमी की जुबां पर एक ही बात होती है कि बिना संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बालू का इस तरह अवैध उत्खनन और परिवहन संभव नहीं है.

बहरहाल जिले की विभिन्न नदियों से बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है. मुरहू के बनई नदी, तोरपा और कर्रा में कारो, रनिया में सोदे के पास कोयल नदी से और इसके अलावा अन्य नदियों से बालू का अवैघ उत्खनन और परिवहन होता है.

इसमें उच्च स्तरीय पुलों के नीचे से भी बालू का उठाव होता है. आज भी बनई, कारो, कोयल नदियों पर बने उच्च स्तरीय पुलों के नीचे से बालू का अवैध उत्खनन बेरोक-टोक होता है. जिससे खूंटी में भी पुलों के धंसने की आशंका बनी हुई है.

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नदियों पर संकट

बालू उठाव के कारण जिले की नदियों पर भी संकट मंडरा रहा है. नदियां अपने सतह से दस फीट नीचे चली गयी हैं. जिससे जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है.

अगर बालू के अवैध उत्खनन और परिवहन पर लगाम नहीं लगाया गया, तो निकट भविष्य में तमाड़ में पुल धंसने जैसी घटनाओं की पुनरावृति खूंटी जिले में भी होगी. साथ ही नदियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जायेगा.

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