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मैनहर्ट घोटाला-8: टेंडर खुल जाने के बाद मूल्यांकन करने वाली तकनीकी उप समिति और मुख्य समिति ने कहा- निविदा रद्द कर दी जाए, लेकिन नहीं हुआ

Saryo Roy
Ranchi: निविदा शर्तों में गैरकानूनी परिवर्तन- ‘ओआरजी और स्पैन ट्रायवर्स मॉर्गन’ को रास्ते से हटाने के बाद झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने रांची शहर के सिवरेज ड्रेनेज निर्माण एवं पर्यवेक्षण का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने के लिये परामर्शी का चयन करने हेतु 30 जून 2005 को एक ग्लोबल टेंडर (वैश्विक निविदा) प्रकाशित किया. इसका निविदा प्रपत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2005 थी. निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विशिष्टियों को समझने-समझाने के लिये निविदा पूर्व (प्रि-बिड) बैठक 18 जुलाई 2005 को विभागीय सचिव के कक्ष में हुई.

इस बैठक में निविदा प्रपत्र का क्रय करने वाली फर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुये और निविदा प्रपत्र के विविध पहलुओं पर अपना सुझाव दिया. उन्होंने प्रपत्र में कतिपय संशोधन भी पेश किया, जिनमें से कुछ को सरकार ने स्वीकार भी किया. इस आलोक में 4 निविदादाताओं ने निविदा प्रपत्र भर कर जमा किया. निविदा प्रपत्र भर कर जमा करने की अंतिम तिथि 25 जुलाई, 2005 को अपराह्न 4 बजे तक थी . तदुपरांत निविदा प्रपत्रों का मूल्यांकन हुआ. सरकार ने मूल्यांकन के लिये एक तकनीकी उपसमिति गठित किया. रांची नगर निगम के प्रशासक को इस तकनीकी उपसमिति का अध्यक्ष और दो कार्यपालक अभियंताओं, श्री केपी शर्मा और श्री उमेश गुप्ता को सदस्य नामित किया. इसके अतिर्नित चार सदस्यों वाली उच्चस्तरीय मुख्य समिति बनाई गई. इसमें नगर विकास विभाग, वित्त विभाग और भवन निर्माण विभाग के सचिव और पथ निर्माण विभाग के केन्द्रीय निरूपण संगठन के मुख्य अभियंता सदस्य रखे गये.

यह निविदा विश्व बैंक के क्वालिटि बेस्ड सिस्टम (टइड) अर्थात गुणवत्ता आधारित प्रणाली पर आधारित थी. इस प्रणाली में निविदा तीन मुहरबंद लिफाफों में आमंत्रित की जाती है. पहले लिफाफा में निविदादाताओं से उनकी योग्यता की विशिष्टियां, दूसरे लिफाफा में उनकी तकनीकी विशिष्टियां और तीसरे लिफाफा में कार्य की वित्तीय लागत मांगी जाती है. निविदा प्रपत्र में योग्यता और तकनीकी उत्कृष्टता के मापदंड निर्धारित रहते हैं. योग्यता के मापदंड पर खरा उतरने वाले निविदादाताओं के ही तकनीकी लिफाफे खोले जाते हैं. योग्यता के एक भी मापदंड पर अपूर्ण रहने वाले निविदादाता के तकनीकी एवं वित्तीय लिफाफे नहीं खोले जाते. उन्हें निविदा प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया जाता हैं. इसके बाद निविदा का तकनीकी मूल्यांकन होता है.

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जो निविदादाता तकनीकी मूल्यांकन में सर्वांधिक अंक प्राप्त करता है, केवल उसी का वित्तीय लिफाफा खोला जाता है. यानी इस प्रणाली में वित्तीय प्रतिस्पर्धा नहीं होती है. इसलिये निविदा में भाग लेनेवाला प्रत्येक निविदादाता वित्तीय लागत बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है. फलतः परियोजना के निर्माण में लागत अधिक आती है. यह प्रणाली अतिविशिष्ट प्रकार की संरचनाओं के निर्माण हेतु आमंत्रित निविदाओं में शामिल की जाती है. जैसे हवाई जहाज, पनडुब्बी, युद्धक विमान, रॉकेट आदि. इसके अतिरिक्त सामान्य विशिष्टयों वाले निर्माण कार्यों के लिये परामर्शी का चयन करने के लिये विश्व बैंक की एक अन्य प्रणाली भी है, जिसे क्युबीसीएस यानी क्वालिटी एवं कॉस्ट बेस्ड सिस्टम (गुणवता एवं लागत आधारित प्रणाली) कहा जाता है. इसमें योग्यता और तकनीकी विशिष्टता के साथ ही लागत में भी निविदादाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा होती है. जिस कारण परियोजना की लागत कम से कम आती है. झारखंड राज्य में आम तौर पर यही निविदा प्रणाली अपनाई जाती है.

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रांची शहर के लिये सिवरेज एवं ड्रेनेज निर्माण का कार्य अतिविशिष्ट श्रेणी में आता है या नहीं इस पर भिन्न-भिन्न विचार हो सकते हैं. परंतु झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने इसे अतिविशिष्ट श्रेणी का कार्य माना और यह कार्य सम्पन्न कराने हेतु एक अदद परामर्शी नियुक्त करने के लिये विश्व बैंक की गुणवता आधारित प्रणाली (टइड) अपनाया. इसके लिए प्रकाशित निविदा प्रपत्र में अंकित था कि निविदा तीन मुहरबंद लिफाफों में आमंत्रित की जा रही है. निविदादाता एक लिफाफा में अपनी योग्यता का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे. दूसरे लिफाफा में अपनी तकनीकी क्षमता का प्रमाण देंगे. तीसरे लिफाफा में कार्य की लागत के बारे में अपनी इच्छा अभिव्यक्त करेंगे. निविदा प्रपत्र के आरंभ में ही स्पष्ट रूप से उल्लेख किया हुआ था कि निविदा प्रपत्र में अंकित योग्यता के किसी भी एक बिंदु पर निविदादाता की योग्यता कम पडे़गी, यानी वह अपूर्ण होगा, तो वह आगे की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के लिये अयोग्य माना जायेगा और उसका तकनीकी लिफाफा नहीं खोला जायेगा. वह प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जायेगा.

निविदा में योग्यता की उपर्युक्त दो शर्तें महत्वपूर्ण थीं. एक, निविदादाता के विगत तीन वर्षों का औसत टर्न ओभर 40 करोड़ रूपया से कम नहीं होना चाहिये. दूसरा, निविदादाता द्वारा विगत 5 वर्षों में सिवरेज और ड्रेनेज के क्षेत्र में कम से कम 300 करोड़ रूपये का परामर्शी कार्य करने का अनुभव होना चाहिये. जो निविदादाता योग्यता की इन शर्तों को पूरा करते, उन्हीं का तकनीकी लिफाफा खुलता और निविदा में वर्णित तकनीकी विशिष्टताओं के आधार पर उनकी तकनीकी क्षमता आंकी जाती. तकनीकी मूल्यांकन में जो निविदादाता सर्वाधिक अंक लाता, केवल उसी का वित्तीय लिफाफा खोला जाता और वित्तीय निगोशियेशन (दर वार्ता) के उपरांत उसे कार्य आदेश दे दिया जाता. निविदा प्रपत्रों के मूल्यांकन में क्या हुआ और मूल्यांकन कैसे हुआ यह सरकार को समर्पित तकनीकी उपसमिति के प्रतिवेदन से समझा जा सकता है.

तकनीकी समिति ने निविदा प्रपत्र भरने वाले किसी भी निविदादाता को निविदा की शर्तों के अनुसार योग्य नहीं पाया. निर्णय किया कि यह निविदा रद्द कर दी जाय और दूसरी निविदा गुणवता एवं लागत आधारित प्रणाली पर निकाली जाए. यह निर्णय इस संबंध में दिनांक 12.8.2005 को इस हेतु आमंत्रित निविदा प्रस्तावों की समीक्षा हेतु गठित तकनीकी समिति की बैठक में लिया गया. इसमें 1. सचिव, नगर विकास विभाग, झारखंड, रांची, अध्यक्ष, 2. प्रधान सचिव, वित्त विभाग, झारखण्ड, रांची, सदस्य, 3. प्रशासक, रांची नगर निगम, सदस्य, 4. मुख्य अभियंता, सीडीओ, पथ निर्माण विभाग उपस्थित हुए .

इस बैठक की कार्यवाही निम्नवत् हैं

‘‘आज दिनांक 12.08.2005 को पूर्वाह्न 11.00 बजे रांची नगर निगम के लिए समेकित सिवरेज-ड्रेनेज परियोजना के कार्यान्वयन हेतु कन्सलटेंट के चयन हेतु आमंत्रित निविदा में प्राप्त तकनीकी प्रस्तावों पर विचार करने हेतु सचिव, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति की एक बैठक सम्पन्न हुई. बैठक में सरकार द्वारा गठित तकनीकी उप-समिति के अध्यक्ष (प्रशासक, रांची नगर निगम) के द्वारा तकनीकी प्रस्तावों के आंशिक मूल्यांकन के उपरान्त एक तुलनात्मक विवरणी समिति के समक्ष प्रस्तुत की गई. समिति के द्वारा उक्त तुलनात्मक विवरणी पर विचार किया गया.

यह पाया गया कि चारों में से कोई भी निविदादाता बीड डॉक्यूमेंट में पूर्व से निर्धारित Essential minimum qualifying criteria नहीं करते है. इस तरह उप-समिति ने सभी निविदादाताओं के तकनीकी प्रस्तावों को Non-responsive पाया है . उपर्युक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों में समिति द्वारा रांची नगर निगम की समेकित सिवरेज-ड्रेनेज परियोजना के कार्यान्वयन हेतु आमंत्रित निविदाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया. यह भी निर्णय लिया गया कि इस परियोजना के लिए पुन: निविदा आमंत्रित करने के पूर्व बीड डॉक्यूमेंट में यथा-वर्णित विभिन्न शर्तों में आवश्यक परिवर्तन (परिवर्द्धन) करना आवश्यक एवं वांछनीय होगा.

समिति का यह भी मत है कि वर्तमान में बीड डॉक्यूमेंट में वर्णित इस आवधारणा को कि निविदाओं का अंतिम निष्पादन निविदादाता के मात्र क्वालिटी के आधार पर किया जाए, इसमें भी परिवर्त्तन करना वांछनीय एवं आवश्यक है, और उसके स्थान पर क्वालिटी एवं काॅस्ट दोनों को शामिल किया जाना चाहिए, जिससे कि झारखंड वित्तीय नियमावली में वर्णित प्रावधानों के अनुसार निर्णय लिया जा सके.

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तकनीकी समिति का यह निर्णय संबंधित संचिका में संधारित कर विभागीय सचिव के माध्यम से विभागीय मंत्री का मंतव्य प्राप्त करने के लिए भेजा गया. विभागीय सचिव ने संचिका पर विभागीय मंत्री के आदेशार्थ निम्नांकित मंतव्य अंकित कर संचिका मंत्री के पास भेजा. मंत्री, नगर विकास विभाग रांची शहर के लिए एक समेकित सिवरेज एवं ड्रेनेज सिस्टम का विकास करने के उद्देश्य से मैंनेजमेंट कंसलटेन्सी सेवाएं प्रदान के करने के लिए एक कंसलटेंसी के चयन हेतु जो निविदा आमंत्रित की गयी थी, उनके आकलन का कार्य सरकार के द्वारा गठित तकनीकी उप समिति को सौंपा गया था.

तकनीकी उपसमिति के द्वारा सर्वप्रथम इस महत्वपूर्ण बिंदु पर अपना आकलन प्रस्तुत किया गया है कि टेंडर डाक्यूमेंट में निविदादाता के लिए जो न्यूनतम आवश्यक अर्हताओं (एलिजिबिलिटि क्रायटेरिया) अपेक्षित की गयी है, उनकी पूर्ति चारों निविदादाता के द्वारा की गयी है या नहीं. उप समिति से प्राप्त तुलनात्मक विवरणीय से स्पष्ट हुआ कि चारों ने निविदादाताओं में से किसी ने योग्यता के संबंध में सरकार द्वारा पूर्व से निर्धारित न्यूनतम अर्हताओं (मिनिमम एसेंसियल रिक्वायरमेंट इन रिस्पेक्ट टू एलिजिबिलिटि) को पूरा नहीं किया है.

तकनीकी उप समिति के अध्यक्ष के द्वारा प्रस्तुत समीक्षा प्रतिवेदन पर विचार करने के उपरांत समिति के द्वारा यह निर्णय लिया गया कि चुंकि निविदादाताओं के द्वारा निर्धारित अनिवार्य अर्हताएं पूरी नहीं की गयी हैं, इसलिए उनके निविदा पर आगे विचार किया जाना विधिसम्ङ्कत एवं नियमानुकूल नहीं होगा. वर्णित परिस्थितियों में निविदा के रद्द करने का निर्णय समिति के द्वारा आज की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया. चूंकि सरकार रांची शहर में समेकित सिवरेज एवं ड्रेनेज प्रणाली को अधिष्ठापित करने के लिए कटिबद्ध है, इसलिए यह आवश्यक है कि इसके लिए पुन: एक निविदा निकाली जाए.

परंतु ऐसा करने के पूर्व यह आवश्यक होगा कि पूर्व में जिन न्यूनतम अर्हताओं को पूरा करने की अपेक्षा निविददाताओं से की गई है, उनमें आवश्यक परिवर्तन किया जाए. इसके साथ ही इस बिन्दु पर भी निर्णय लिया जाना आवश्यक है कि इस कार्य को किसी कंसल्टेंसी को सुपुर्द करने का निर्णय न केवल टेक्निकल प्रोपोजल के आकलन के आधार पर, मात्र उनकी क्नवालिटी के आधार पर लिया जाए वरन टेक्निकल एवं वित्तीय दोनों प्रकार के प्रस्ताव के समेकित आकलन के बाद ही लिया जाए.

इस कार्य में मात्र क्वालिटी के आधार पर निविदा के अंतिम निष्पादन की शर्त रखी गयी थी, उनके स्थान पर क्वालिटी एवं कॉस्ट दोनों के आधार पर आकलन एवं निष्पादन करने की शर्त रखी जाए. बीड डॉक्यूमेंट को नये सिरे से तैयार करने के लिए तकनीकी समिति को आवश्यक निर्देश दिया जा सकता है. उस समिति में सिवरेज एवं ड्रेनेज सिस्टम का ज्ञान रखने वाले कुछ अनुभवी एवं ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों को सम्मलित किया जाना श्रेयस्कर होगा, जिससे कि इस प्रणाली को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार की जाने वाली बीड डॉक्यूमेंट में सभी आवश्यक एवं अपेक्षित शर्तों का समावेश किया जा सके. आज दिनांक 12.08.2005 को सम्पन्न हुई समिति की बैठक की कार्यवाही संचिका से पृष्ठ-49 पर देखी जा सकती है.

संचिका विभागीय मंत्री के पास पहुंची तो उन्होंने तकनीकी समिति के विधिसम्मत एवं नियमानुकुल निर्णय को अस्वीकार कर दिया और विभागीय सचिव के मंतव्य से असहमति व्यक्त किया. संचिका पर उन्होंने निम्नांकित आदेश दिया.

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‘‘दिनांक 17.08.2005 को अपराह्न में 1.00 बजे निविदा समिति एवं तकनीकी
समिति की संयुक्त बैठक मेरे कार्यालय कक्ष में रखी जाए.’’
ह./- रघुवर दास (मंत्री)/16.08.2005
तकनीकी समिति के उपर्युक्त निर्णय के पश्चात् निविदा रद्द करके परामर्शी चयन के लिये नये सिरे से निविदा प्रकाशित करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था. परंतु जिन निहित स्वार्थी शक्तियों ने ओआरजी और स्पैन को अपने रास्ते से हटाया था, वे पुन: सक्रिय हो गईं.

तत्कालीन वित्त सह नगर विकास विभाग मंत्री ने 16.8.2005 को संचिका में आदेश देकर अगले दिन अपराह्न 1 बजे अपने कार्यालय कक्ष में तकनीकी उपसमिति और मुख्य समिति के सदस्यों की संयुक्त बैठक बुलाई. उन्होंने निर्देश दिया कि वर्तमान निविदा की शर्त्तों में ही कतिपय संशोधन कर इनपर फिर से विचार किया जाय. मंत्री ने आदेश दिया कि इसके लिये मुख्य समिति और तकनीकी समिति के सदस्य आज ही मेरे कार्यालय कक्ष में शाम 4.30 बजे बैठक कर इस बारे में निर्णय लें.

मंत्री के निदेशानुसार उसी दिन शाम 4.30 बजे उनके कार्यालय कक्ष में दोनों समितियों की संयुक्त बैठक हुई. 17.08.2005 को 1.00 बजे अपराह्न माननीय मंत्री, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में रांची सिवरेज-ड्रेनेज परियोजना के कार्यान्वयन हेतु आमंत्रित निविदा में प्राप्त तकनीकी प्रस्तावों की समीक्षा हेतु आयोजित बैठक की कार्यवाही निम्नवत हैं.

आज दिनांक 17.08.05 को माननीय मंत्री, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में रांची सिवरेज-ड्रेनेज परियोजना के कार्यान्वयन हेतु आमंत्रित निविदा में प्राप्त तकनीकी प्रस्तावों की समीक्षा हेतु अपराह्न 1.00 बजे बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें तकनीकी प्रस्तावों की समीक्षा हेतु सरकार द्वारा गठित मुख्य समिति एवं तकनीकी उपसमिति के अधोलिखित सदस्य उपस्थित हुए.

1. सचिव, नगर विकास विभाग.
2. प्रधान सचिव, वित्त विभाग.
3. सचिव, भवन निर्माण विभाग.
4. प्रशासक, रांची नगर निगम.
5. के.पी. शर्मा, कार्यपालक अभियंता.
6. श्री उमेश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता.

इस बैठक में पथ निर्माण विभाग के केन्द्रीय निरूपण संगठन (सीडीओ) के मुख्य अभियंता, श्री अनिल कुमार उपस्थित नहीं हुए. मंत्री, नगर विकास विभाग ने मुख्य समिति के द्वारा प्रस्तुत 12.08.05 के बैठक की कार्यवाही के संबंध में उपस्थित सदस्यों से उनके अभिमत प्राप्त करने के उपरांत यह निदेश दिया गया कि चूंकि तकनीकी समिति के दो सदस्य तुलनात्मक विवरणी से असहमत हैं, इसलिए मुख्य समिति एवं तकनीकी उप-समिति के सभी सदस्य एक साथ बैठकर Documents in support of Minimum Eligibility criteria का पुन: एक बार अध्ययन करें एवं Eligibility के बिंदु पर निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचे. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य समिति एवं तकनीकी उपसमिति के सभी सदस्यगण आज ही 4.30 बजे अपराह्न मेरे कार्यालय कक्ष में बैठक कर निर्णय लें.

(ह./- रघुवर दास)/दिनांक 16.08.2005 मंत्री के आदेशानुसार मुख्य समिति और तकनीकी समिति के सदस्य 17 अगस्त 2005 को ही शाम 4.30 बजे बैठे और प्रकाशित एवं मूल्यांकित निविदा में अंकित योग्यता की दो शर्तों में से एक में परिवर्तन कर दिया. प्रकाशित और मूल्यांकित मूल निविदा की यह शर्त थी कि निविदादाता को कम से कम एक सिवरेज और ड्रेनेज परियोजना का काम करने का अनुभव हो, जिसकी लागत 300 करोड़ रूपया से कम न हो.

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मुख्य समिति और तकनीकी समिति की संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि इस शर्त को इस हद तक संशोधित कर दिया जाए कि उस निविदादाता को भी योग्य माना जायेगा, जिसे 300 करोड़ रूपया लागत के केवल सिवरेज या केवल ड्रेनेज परियोजना में से किसी एक के परामर्श प्रबंधन का अनुभव हो. 17.08.05 को अपराह्न 4.30 बजे सचिव, नगर विकास विभाग की अध्यक्षता में आयोजित मुख्य समिति एवं तकनीकी उप-समिति के सदस्यों की बैठक की कार्यवाही का विवरण निम्नवत है. इसमें अधाेलिखित सदस्य उपस्थित हुए.

1. सचिव, नगर विकास विभाग
2. प्रधान सचिव, वित्त विभाग
3. सचिव, भवन निर्माण विभाग
4. प्रशासक, रांची नगर निगम
5. के.पी. शर्मा, कार्यपालक अभियंता
6. श्री उमेश गुप्ता, कार्यपालक अभियंता

पथ निर्माण विभाग के केंद्रीय निरूपण संगठन (सी.डी.ओ.) के मुख्य अभियंता, श्री अनिल कुमार ने इस बैठक में भी भाग नहीं लिया. माननीय मंत्री, नगर विकास विभाग के द्वारा यथा आदेशित मुख्य समिति एवं तकनीकी उप-समिति के सदस्यों के द्वारा निविदा में प्राप्त Documents in support of Minimum Eligibility पर विचार- विमर्श किया गया.

दिनांक 12.08.05 को यह View लिया गया था कि किसी भी निविदादाता के लिए न्यूनतम Eligibility criteria के रूप में यह साबित करना आवश्यक है कि उनके द्वारा पिछले 5 वर्षों में 300 करोड़ की एक शहरी सिवरेज-ड्रेनेज प्रणाली को विकसित करने हेतु Project Management Consultancy Services प्रदान किया गया हो.

आज की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत view पर सहमति बनी कि अगर किसी निविदादाता के द्वारा सिवरेज अथवा ड्रेनेज दोनों में से किसी भी घटक से संबंधित 300 करोड़ रूपये की परियोजना के Project Management का कार्य किया गया हो तो यह मान लिया जाएगा कि उस निविदादाता के द्वारा Minimum Eligibility के इस शर्त को पूरा कर लिया गया है. तकनीकी उपसमिति को यह निदेश दिया गया कि वे उक्त के आधार पर प्रस्तुत दस्तावेजों के अध्ययन के उपरांत एक तुलनात्मक विवरणी मुख्य समिति के समक्ष शीघ्र उपस्थापित करें.

(ह./- अध्यक्ष, मुख्य समिति)

नियमानुसार निविदा खुल जाने के बाद और उसका आंशिक या पूर्ण मूल्यांकन हो जाने के बाद उसकी शर्तों में परिवर्तन नहीं किया जा सकता. ऐसा करना अनुचित, नियम विरुद्ध, पक्षपातपूर्ण एवं भ्रष्ट आचरण माना जाता है. निविदा खुल जाने के बाद इसकी योग्यता शर्तों में सिवरेज और ड्रेनेज की जगह सिवरेज या ड्रेनेज कर देने से अर्थात सिवरेज और ड्रेनेज दोनों के कार्य का अनुभव होने की शर्त को बदलकर इसकी जगह सिवरेज या ड्रेनेज में से किसी भी एक का अनुभव होने की शर्त तक सीमित कर देना एक बड़ा परिवर्तन है.

इसने निविदा के मूल चरित्र को बदल दिया. यदि यह बदली हुई शर्त पूर्व से ही निविदा में रहती तो हो सकता था कि ऐसा अुनभव रखने वाले कतिपय अन्य संस्थान भी निविदा में भाग लेते. निविदा खुल जाने के बाद शर्तों में यह परिवर्तन करना ऐसी संस्थाओं को निविदा में भाग लेने से रोक देना है, जो संविधान प्रदत्त अवसर की समानता के अधिकार का उल्लंघन है.

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इसके साथ ही निविदा मूल्यांकन के बाद योग्यता की शर्त में परिवर्तन करना कार्य की गुणवत्ता से समझौता करना है जो विश्व बैंक की गुणवत्ता आधारित प्रणाली की भावना के विपरीत है. ऐसा करना भ्रष्ट एवं पक्षपातपूर्ण आचरण का द्योतक है.

सार संक्षेप

1. निविदा खुल जाने के बाद इसका मूल्यांकन करने वाली तकनीकी उपसमिति और मुख्य समिति ने निर्णय लिया कि निविदा रद्द कर दी जाए और नई निविदा गुणवत्ता और लागत दोनों को ध्यान में रखकर प्रकाशित किया जाए.

2. तत्कालीन वित्त और नगर विकास विभाग के मंत्री श्री रघुवर दास ने तकनीकी उपसमिति और मुख्य समिति के इस मंतव्य को नकार दिया और उन पर निविदा का पुनः मूल्यांकन करने के लिये दबाव डाला.

3. उपर्युक्त दबाव के कारण निविदा समिति और मुख्य समिति ने उसी दिन मंत्री की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में बैठक किया और उनके निदेशानुसार निविदा शर्तों में परिवर्तन कर दिया.

4. निविदा खुल जाने और इसके योग्यता वाले लिफाफा का मूल्यांकन हो जाने के बाद निविदा की शर्त में परिवर्तन का निर्देंश देना नियम विरूद्ध है. यह नगर विकास मंत्री के पक्षपातपूर्ण एवं भ्रष्ट आचरण का द्योतक है.

5. मंत्री, नगर विकास विभाग के नियम विरूद्ध आदेश का पालन करना भारतीय प्रशासनिक सेवा के सचिव स्तर के पदाधिकारियों के ‘‘आचरण संहिता के विरूद्ध है. यह केन्द्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों के भी विरूद्ध है.’’ इसके बावजूद उन्होंने मंत्री के अवैधानिक आदेश को क्रियान्वित किया.
6. यह निर्णय निविदा की मूल भावना (गुणवत्ता आधारित प्रणाली) पर आघात है और परिवर्तित शर्त की कसौटी को पूरा करनेवाले अन्य संभावित निविदादाताओं को निविदा में भाग लेने के अवसर से वंचित करता है.

7. निविदा शर्त में बदलाव करने के इस गैरकानूनी निर्णय में किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. निविदा शर्तों में यह बदलाव इस बारे में भविष्य के निर्णयों का संकेत है.

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