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मंडल डैम: झारखंड के अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर का गांव चेमोसरिया भी डूब जायेगा

विस्थापित होंगे 6000 से अधिक लोग, पुनर्वास के लिए केंद्र से मांगे 117 करोड़

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  • विस्थापित होनेवालों में 5000 आदिवासी, 300 दलित और 681 अन्य जातियों के लोग
  • परियोजना में भारत सरकार 1378.61, बिहार सरकार 213 और झारखंड सरकार 31 करोड़ रुपये खर्च करेगी

Pravin Kumar

Ranchi: जिस मंडल डैम का शिलान्यास करने पांच जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं उसके निर्माण से झारखंड के अमर शहीद नीलांबर-पीतांबर का गांव चेमोसरिया भी डूब जायेगा. यही नहीं इसके निर्माण से 6000 से अधिक लोग विस्थापित भी होंगे. इनमें 5000 आदिवासी, 300 दलित सहित 681 अन्य जातियों के लोग शामिल हैं. इनके विस्थापन और पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से 117 करोड़ रुपये की मांग की है. डैम के निर्माण से 38,508.21 एकड़ भूमि जलमग्न होगी, जिसमें 3,044.38 एकड़ रैयती जमीन 12,756.51 एकड़ गैर मजरुआ जमीन तथा 2,266.72 एकड़ वनभूमि शामिल है. फॉरेस्ट क्लीयरेंस के तहत स्टेज वन का क्लीयरेंस हो चुका है. जिसमें पलामू टाइगर रिजर्व के आठ गांवों को हटाया जाना है.

बिहार की 92,000 हेक्टेयर भूमि हो सकेगी सिंचित

मंडल डैम परियोजना से झारखंड की 19,604 हेक्टेयर भूमि और बिहार की 92,000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा. परियोजना में कुल 1,11,521 हेक्टेयर भूमि पर खेती का आकलन किया गया है. जिसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस योजना को पूरा करने में कुल 1622 करोड़ रुपये की लागत आयेगी. इसमें भारत सरकार 1378.61 करोड़ रुपये खर्च करेगी. बिहार सरकार को 213 और झारखंड सरकार को 31 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे.

सरकारी और स्थानीय लोगों के दावे अलग-अलग

सरकार का कहना है कि डैम के निर्माण से 15 गांव ही प्रभावित होंगे. जबकि 1972 के सरकारी सर्वे में 17 गांवों को डूब क्षेत्र में बताया गया था. इसमें झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी नीलांबर-पीतांबर का गांव चेमोसरिया भी डूब क्षेत्र में आ गया है. डूब क्षेत्र में आनेवाले गांवों में भंडरिया प्रखंड के कुटकू, मतगड़ी, खुर्रा, खाड़ीमहुआ व तुबेर, लातेहार के बरवाडीह प्रखंड के मेराल, करमडीह, सेलदाग, बेरे, तनवाई सहित अन्य गांव डूब क्षेत्र में शामिल हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी दावे से दोगुने गांव प्रभावित होंगे.

मुख्य बिंदु

  • डैम की ऊंचाई: 67.80 मीटर
  • लंबाई: 409 मीटर
  • जलसंग्रहण क्षमता: 330.10 मीटर
  • बराज की कुल लंबाई: 819.60 मीटर
  • कैनाल की लंबाई: 109 किलोमीटर
  • वन भूमि: 1007.29 हेक्टेयर
  • प्रभावित गांव: 15(सरकारी आंकड़ा)

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