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धरोहर के साथ छेड़छाड़, हाईकोर्ट में मामला लंबित, इसके बावजूद जारी है निर्माण

दरगाह के मैदान में बिना नक्शा पास कराएं बनायी जा रही दुकानें

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Ranchi:  राजधानी के रिसालदार बाबा मजार के पास चल रहे निर्माण से विवाद बढ़ गया है. इस मामले में  2018 से हाई कोर्ट में केस चल रहा है. डोरंडा महापंचायत की ओर से यह केस अल्पसंख्यक सुन्नी वक्फ बोर्ड पर किया गया है. महापंचायत की ओर से रिट याचिका तब दायर की गयी थी, जब उस स्थल में पुनर्निमार्ण के लिए नींव डाली गयी थी.

ताकि स्थल के निमार्ण पर रोक लगायी जा सके. इसके बावजूद स्थल में निमार्ण कार्य है. गौरतलब है कि दरगाह को मुस्लिम समुदाय सामाजिक धऱोहर के रूप में मान्यता देता है. यह सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति है.

इस संबध में हाई कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड से जानकारी मांगी थी. जिसमें सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर ये कोर्ट को यह जानकारी दी गयी कि दरगाह कमेटी बिना अनुमति के निमार्ण करा रही है.

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धरोहर से न हो छेड़छाड़

इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 28 जनवरी 2019 को कहा था कि उक्त स्थल पर राजधानी में  एक सामाजिक धरोहर है. इससे छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए. इस संबध में अरगोड़ा सीओ ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए कमेटी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इसके बावजूद स्थल में निमार्ण जारी है. केस की अगली सुनवाई 24 जून को की जानी है.

वहीं केस चलने के दौरान ही डोरंडा महापंचायत की ओर से डीसी, डोरंडा थाना, झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड को निमार्ण कार्य रोकने के लिए कहा गया. लेकिन न ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कोई पहल की गयी और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई पहल हुई.

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डीसी की रिपोर्ट में निमार्ण की जानकारी दी गयी

इस संबंध में हाई कोर्ट ने डीसी को एक मजिस्ट्रेट के जरिये स्थल का निरीक्षण कर एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था. डीसी की ओर से रिपोर्ट हाई कोर्ट में सौंपी गयी. जिसमें यह बताया गया कि मजार में निमार्ण कार्य कराया जा रहा है. वो भी बिना किसी अनुमति के.

निर्माण से संबंधित दस्तावेज की कॉपी.

मामले की वकालत कर रहे हाई कोर्ट अधिवक्ता अनुज कुमार ने जानकारी दी कि मामले पर रिट याचिका तब दायर की गयी थी जब दरगाह में नींव डाली गयी थी. लेकिन सुनवाई चलने के दौरान ही दरगाह में पिलर आदि बना दिया गया. वहीं डीसी समेत अन्य रिपोर्ट में भी जानकारी मिली है कि बिना नक्शा के ही दरगाह में निमार्ण किया जा रहा है.

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विभाग की सचिव वंदना डाडेल ने समिति को जांच कर रिपोर्ट दो महीने में सौंपने को कहा था. लेकिन अभी तक समिति ने जांच रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है.

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बिना नक्शा के किया जा रहा है निर्माण

यही नहीं स्थल के बाहर स्थित मैदान जहां सालाना उर्स मेला लगाया जाता है, वहां भी साल 2012 से कमेटी की ओर से निमार्ण किया जा रहा है. मैदान में कई दुकान और एटीएम खोल दिये गये हैं.

वर्तमान में एक दो दुकानें अर्धनिर्मित हैं. डोरंडा महापंचायत की ओर से इस संबध में रांची डीसी को पत्र लिखा गया था. वहीं 20 मई को नगर आयुक्त को भी मैदान में हो रहे निमार्ण कार्य, जिसका नक्शा पास नहीं है, पर रोक लगाने की मांग की गयी थी. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

सौ साल से अधिक पुराने पेड़ों को काटा गया

भवन के भीतर सौ साल से अधिक पुराने दुर्लभ पनौला और चंपा के पेड़ थे. जिनको निमार्ण के लिए काटा गया. काटने के पूर्व न ही इसकी जानकारी महापंचायत को और न ही वन विभाग को दी गयी. महापंचायत ने इससे मामले में वन विभाग और डोरंडा थाना को शिकायत की. लेकिन दोनों ही स्तरों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

क्या कहता है नियम

1978 वक्फ बोर्ड के नियमों के तहत कोई भी धार्मिक स्थल वक्फ की संपत्ति होती है. बोर्ड की ओर से एक मैनेजर नियुक्त किया जाता है जो स्थल की देखरेख करता है. मैनेजर वक्फ बोर्ड की ओर से जारी आदेशों का पालन करता है. इसकी जानकारी देते हुए हाईकोर्ट के अधिक्ता अनुज कुमार ने कहा कि उक्त स्थल पर ट्रस्ट बना लिया गया है.

जबकि वक्फ बोर्ड नियमों के अनुसार ऐसा नहीं किया जा सकता है. उन्होंने जानकारी दी कि मामला मामला धरोहर से छेड़छाड़ का है. लेकिन लोगों को भ्रमित करने के लिए अतिक्रमण का नाम दिया जा रहा है.

दूसरे पक्ष का बयान  

वहीं रउफ गद्दी ने जानकारी दी कि निमार्ण के संबध में कोई  मामला कोर्ट में लंबित नहीं है. धरोहर वक्फ बोर्ड की संपति है. वहां नर्वनिमार्ण कराया जा रहा है. धरोहर से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा रही है.

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