NEWSWING
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

1993 के बाद नेता व मैनेजर हुए मालामाल, सबसे ज्यादा बढ़ी सैलरी : आईएलओ

121

New Delhi : भारत में 1993-94 से 2011-12 के बीच सांसदों, विधायकों, सीनियर अधिकारियों और मैनेजरों का औसत वास्तविक दैनिक वेतन लगभग दोगुना आंका गया है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की यह रिपोर्ट है. आईएलओ की इंडिया वेज रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है. नैशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन के डेटा के विश्लेषण पर बनी रिपोर्ट में दर्ज है कि इस सालों में सांसदों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और मैनेजरों का वास्तविक औसत वेतन 98% बढ़ा है.

इसे भी पढ़ें- मिनिस्टर साहब स्टिंग देखिये ! ओरिजिनल सर्टिफिकेट के लिए वसूले जा रहे हैं 5000 रुपये

प्रोफेशनल्स के वेतन में 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी

जहां तक प्रोफेशनल्स के वेतन की बात है, तो उनके वेतन में 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. जबकि पिछले दो दशकों में प्लांट और मशीनों के ऑपरेटरों का औसत वास्तविक दैनिक वेतन सिर्फ 44 प्रतिशत बढ़ा. हालांकि पेशेवरों की जिन श्रेणियों में वेतन सबसे ज्यादा बढ़ा, उनमें 2004-05 के बाद बढ़ोतरी की गति कम हुई. इसी क्रम में जिन श्रेणियों में सबसे कम वेतन बढा, उनमें 2004-05 के बाद वेतन बढ़ने की रफ्तार बढ़ी.

इसे भी पढ़ें- BJP कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और आशा लकड़ा से ज्यादा तरजीह मिस्फिका को

प्राइवेट सेक्टर की सैलरी पर भी पड़ा असर

palamu_12

रिपोर्ट के अनुसार कम कौशल वाले व्यवसायों में 2004-05 से 2011-12 के बीच दैनिक वेतन 3.7 प्रतिशत बढ़ा. शहरी भारत में 1993-94 से 2001-05 की अवधि में खासकर प्रोफेशनल और प्रशासनिक श्रेणी में समान रफ्तार से वेतन बढ़ा. रिपोर्ट में दर्ज है कि वेतन आयोग की वजह से ना सिर्फ सरकारी और पब्लिक सेक्टर में उच्च वेतन बढ़ोतरी हुई, बल्कि इसका असर प्राइवेट सेक्टर की सैलरी पर भी पड़ा. हालांकि रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं और पुरुषों का औसत दैनिक वेतन एक समान नहीं बढ़ा.

इसे भी पढ़ें- भूख लगने पर महिला ने रोटी चुराकर खा ली, तो मालिक ने नंगा कर बांध दिये हाथ-पैर, पूरे बदन पर लगाया मिर्च पाउडर का लेप

अन्य के मामलों में महिला-पुरुषों के वेतन में रहा सबसे कम गैप

उच्च स्तरीय श्रम माने जाने वाले सांसदों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और मैनेजरों के मामले में महिला-पुरुषों के वेतन में सबसे कम गैप रहा. 2011-12 में इस श्रेणी की महिलाओं का औसत वेतन पुरुषों के वेतन के मुकाबले 92 प्रतिशत रहा. दूसरी ओर प्रोफेशनल वर्कर्स के मामले में महिलाओं का वेतन पुरुषों के वेतन का सिर्फ 75 प्रतिशत रहा. गौरतलब है कि कम कौशल वाले रोजगारों में महिलाओं का वेतन पुरुषों के वेतन के मुकाबले सिर्फ 69 प्रतिशत रहा है. साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि कम वेतन वाले रोजगारों में अनुसूचित जातियों की संख्या सबसे ज्यादा है. रिपोर्ट में महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फायदे मिलने की संभावना पुरुषों के मुकाबले कम बताई गयी है.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

ayurvedcottage

Comments are closed.

%d bloggers like this: