West Bengal

ममता का एकतरफा प्रस्ताव, सीएए वापस लेने पर ही होगी पीएम से बातचीत

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Kolkata: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) और एनआरसी के प्रस्तावित क्रियान्वयन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के लिए शर्त रखी है. हालांकि पीएम की ओर से बातचीत के लिए कोई आमंत्रण नहीं दिया गया है.

मुख्यमंत्री ने खुद ही कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता के लिए तैयार हैं लेकिन इसके पहले सीएए को वापस लेना होगा. मंगलवार को धर्मतल्ला में गांधी मूर्ति के पास उन्होंने कैनवास पर तस्वीरें उकेरीं.

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ममता ने बनायी पेंटिंग

सीएए और एनआरसी के खिलाफ आयोजित मौन प्रदर्शन में ममता के साथ कई अन्य चित्रकारों ने भी तस्वीरें बनायी. मुख्यमंत्री ने एक चिंतित महिला की तस्वीर बनायी है.

उसकी एक आंख में N और दूसरे में O लिखा गया है. इसके अलावा महिला के माथे पर सीएए लिखा गया है. महिला की साड़ी सफेद है और उस पर एक तरफ एनपीआर और दूसरी तरफ एनआरसी लिखा गया है.

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तस्वीर में ऐसा लगता है जैसे महिला काफी चिंतित है और रो रही है. इसके बाद सीएम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति सबको लेकर चलने की है, सभी धर्मों का सम्मान करने की है लेकिन आज हिंसा और नफरत की राजनीति हो रही है.

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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी की किसी से भी वार्ता हो सकती है. मैं भी पीएम के साथ वार्ता के लिए तैयार हूं लेकिन पहले नागरिकता अधिनियम को वापस लिया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा है कि सीएए सिर्फ एक कानून नहीं है, यह मानवता और भारत के लिए शर्मनाक है.

इसके अलावा ममता बनर्जी ने इस अधिनियम के खिलाफ लगातार आंदोलन की एक बार फिर घोषणा की. उन्होंने कहा है कि 31 जनवरी से छात्र संगठन रानी रासमणि रोड में जारी विरोध प्रदर्शन की कमान संभालेगा और एक-दो फरवरी को सीएए-एनआरसी के विरोध में राज्यभर में जुलूस निकाला जायेगा.

पांच फरवरी को सीएए एवं एनआरसी के खिलाफ पार्टी की ओर से ब्लॉक स्तर पर मानव श्रृंखला बना कर विरोध किया जायेगा. छह फरवरी को हाथों में सीएए एवं एनआरसी विरोधी तख्तियां लिए पार्टी कार्यकर्ता मौन जुलूस निकालेंगे.

सात फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के बाद बजट अधिवेशन होगा. आठ और नौ फरवरी को पार्टी प्रतिनिधि ब्लॉक स्तर पर एससी-एसटी समुदाय के लोगों के घर जाकर उनकी समस्याओं पर उनसे चर्चा करेंगे. 10-13 फरवरी तक पार्टी के नेता बूथ स्तर पर बैठक करेंगे. ममता ने कहा कि असम एनआरसी के जरिए बांग्ला भाषी लोगों को नागरिकता से बाहर कर दिया गया.

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