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सिर्फ 28 हजार के लिए बेकार पड़ी है रिम्स की छह लाख रुपए की मैमोग्राफी मशीन

मशीन का कार्ड रीड़र एक माह से है खराब.

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Ranchi: राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग का मैमोग्राफी मशीन पिछले एक माह से खराब पड़ा हुआ है. जिसके कारण प्रतिदिन औसतन पांच मरीजों को बगैर मैमोग्राफी कराएं वापस लौटना पड़ रहा है. मैमोग्राफी मशीन को बनाने को लेकर विभागीय प्रभारी सोने लाल राय रिम्स प्रबंधन से कई बार आग्रह कर चुके हैं. बावजूद इसके प्रबंधन की ओर से मशीन को बनाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई.

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बाहर में मरीज को चुकानी पड़ रही है भारी रकम

मशीन की कीमत लगभग छह से सात लाख रुपए है और सिर्फ 28 से 30 हजार के खर्चे के कारण मशीन को बेकार होने के लिए छोड दिया गया है. प्रभारी ने बताया कि मैमोग्राफी मशीन का कार्ड रीडर खराब है. इसके मरम्मत के लिए मेडिसिटी कंपनी के इंजीनियरों को बुलाया गया था, लेकिन मेडिसिटी के इंजीनियर द्वारा इसे बनाने में असमर्थता जाहिर कर दी गई है. वहीं रिम्स प्रबंधन इसे बनवाने को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है.  जिसका खामियाजा मरीजों को बाहर में मोटी राशि चुका कर भुगतनी पड़ रहा है.

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रिम्स में होता है नि:शुल्क जांच, बाहर खर्च करने पड रहे हैं 2000 रुपये

मैमोग्राफी जांच के लिए मरीजों को रिम्स अस्पताल में कोई शुल्क नहीं देना होता है. क्योंकि यह जांच रिम्स में नि:शुल्क है. वहीं बाहर के जांच केंद्रों में मैमोग्राफी के लिए 2000-2500 रुपए चार्ज है. रिम्स अस्पताल के रेडियोलोजी विभाग मैमोग्राफी मशीन खराब होने की वजह से मरीजों को जेब ढीली करने को विवश होना पड़ रहा है.

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क्या कहते है रिम्स निदेशक

रिम्स के निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव से जब पुछा गया कि मशीन क्यों खराब पडी है तो उन्होंने बताया कि इस बारे में तो जानकारी ही नहीं है. विभाग के लोग मुझे अवगत ही नहीं कराते है. उन्होंने तुरंत विभाग के अध्यक्ष सुरेश टोप्पो से बात की जिसके बाद उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द मशीन ठीक करवा दी जायेगी.

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क्या है मैमोग्राफी

मैमोग्राफी मशीन से महिलाओं के स्तन कैंसर की जांच की जाती है. मैमोग्राफी से स्तन कैंसर के प्रारंभिक जांच में ही पता चल जाता है कि मरीज को स्तन कैंसर है या नहीं. लेकिन रिम्स में मशीन खराब होने की वजह से इसकी सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है.

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