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गहनों की चमक से महिलाओं को स्वावलंबी बना रहीं यशोदा,  दिल्ली-मुंबई के बुटिक में है इनके बनाये गहनों की मांग

देशज डिजाइन के गहनों को बनाने में है महारत हासिल

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Ranchi: वर्तमान समय में हर इंसान चाहता है कि खुद को संपन्न बनाये. ऐसे में हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो दूसरों को भी संपन्न बनाने की चाहत रखते है. विशेषकर ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने की चाहत बहुत कम लोग रखते हैं. इन्हीं में से एक हैं 32 वर्षीया यशोदा देवी. खुंटी के मुरहू की रहने वाली यशोदा देवी पिछले दस सालों से ग्रामीण महिलाओं को गहना बनाना सीखा रही हैं. बिना किसी संगठन और बिना कोई संस्था खोले ये अपने घर में ही महिलाओं को गहने बनाना सिखाती हैं. सिर्फ महिलाओं को ही नहीं कुछ पुरुष भी इनके साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. खुद यशोदा बतातीं हैं कि ज्वेलरी बनाना उन्होंने अपने पिता से सीखा. देशज डिजाइन की गहनों को बनाने में उनको महारत हासिल है.

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15 महिलाएं अपना व्यवसाय चला रही हैं

यशोदा ने बताया कि इनसे काफी संख्या में आसपास की महिलाओं ने ज्वेलरी बनाना सीखा है. जिनमें से 15 महिलाएं ऐसी हैं जो अब अपना व्यवसाय चला रही हैं. कुछ महिलाएं और पुरूष ऐसे भी हैं, जो इनसे काम सीखकर इनके साथ ही काम कर रहे हैं. यह उनके रोजगार का बेहतर विकल्प है.

दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में है यशोदा के गहनों की मांग

यशोदा न सिर्फ मुरहू में ग्रामीणों को प्रशिक्षित  करती हैं, बल्कि ये खुद अपने घर में गहने बनाकर बाजार में बेचती भी हैं. न सिर्फ झारखंड में बल्कि दूसरे राज्य में छत्तीसगढ़,  हैदराबाद,  दिल्ली,  मुंबई जैसे शहरों की बुटिक में इनके गहनों की मांग की जाती है.  यशोदा ने बताया कि दिल्ली और मुंबई से उनके पास अधिक ऑर्डर आते है. यहां के बुटिक में इनके बनाये  गहनों की मांग अधिक है.

बाजार से खरीदती हैं कच्चा माल

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यशोदा के बनाये गहने काफी अलग होते हैं. बाजार में मिलने वाले गहने अमूमन मशीन के बनाये होते हैं. उन्होंने बताया कि ये कच्चा माल बाजार से खरीद कर लाती हैं. जिसमें तांबा, पीतल समेत अन्य मेटल होते हैं. इन मेटलों को घर में पिघला कर सांचा में अलग-अलग आकृति दी जाती है. सांचा में आकार पकड़ लेने के बाद इन गहनों को आकर्षक बनाया जाता है. जिसके लिए मोती,  गोटा,  ग्लिटर, धागों और घुंघरू का इस्तेमाल किया जाता है.

देशज परंपरा को आगे बढ़ाने की थी चाह

यशोदा अपने पिता और दादा की देशज परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गहना बनाने का काम कर रही हैं. उन्होंने ये काम अपने पिता से सीखा. शादी के बाद उन्हें लगा कि घर की आर्थिक सहायता करनी चाहिये. ऐसे में इन्होंने छोटे स्तर पर घर से काम शुरू किया. देखते ही देखते इनका व्यवसाय बढ़ता गया. साथ ही ग्रामीण भी इनसे प्रशिक्षण लेकर अपना व्यवसाय करने लगे.

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