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2022 तक झारखंड को दूध उत्पादन में बनायें आत्मनिर्भर : रघुवर दास

राज्य में सात नये कृषि विवि खोलने का प्रस्ताव, नवनिर्मित शीतगृहों को जल्द कार्यान्वित करने को कहा

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Ranchi : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 2022 तक झारखंड को दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा है कि डेयरी इंडस्ट्री से जनजातीय महिलाओं को जोड़ने की आवश्यकता है. इससे रोजगार का सृजन होगा और जनजातीय महिलाएं गाय पालन में आगे भी आयेंगी.

प्रोजेक्ट भवन मंत्रालय में कृषि, सहकारिता और पशुपालन विभाग की समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के सर्वांगीण विकास के लिए हमारी सरकार समर्पित है. उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में कृषि विकास दर में 19 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है.

उन्होंने कहा कि सितंबर माह से कृषि विभाग के अधिकारी सभी जिलों में आदिवासी महिला किसानों के साथ बैठक करें एवं गाय पालन के प्रति उन्हें प्रोत्साहित करें.

होटवार में एक लाख लीटर क्षमता का डेयरी प्लांट 

बैठक में कृषि सचिव पूजा सिंघल ने बताया कि झारखंड में पहली बार रांची के होटवार में एक लाख लीटर क्षमता का अति आधुनिक डेयरी प्लांट तथा एक मिनरल मिक्सर प्लांट एवं बाईपास प्रोटीन प्लांट की स्थापना की गयी है. पलामू, सारठ (देवघर), रांची, जमशेदपुर एवं गिरिडीह जिले में भी 50 हजार लीटर क्षमता के डेयरी प्लांट की स्थापना का कार्य प्रगति पर है.

कृषि सचिव ने बताया कि वर्ष 2018-19 में 59.50 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध उत्पादन हुआ है तथा वित्तीय वर्ष 2019-20 में प्रतिदिन 62.50 लाख लीटर दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.

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61928 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा पहुंची

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में उन्नति हो इसके लिए राज्य सरकार ने जल संग्रहण एवं जल संचयन के लिए 77,444 डोभा, 5526 तालाबों का जीर्णोद्धार कराया है. 3334 परकोलेशन टैंक का निर्माण किया जिससे 61928 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा पहुंची.

साथ ही साथ कृषि यांत्रिकीकरण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत कुल 964 कृषि यंत्र (ट्रैक्टर), विशेष सिंचाई सुविधा अंतर्गत कुल 2659 डीप बोरिंग का कार्य कराया गया है.

राज्य के किसानों को फसल बीमा अंतर्गत 283 करोड़ की राशि का भुगतान किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार कुल 1313 बीज ग्राम का भी गठन किया गया है जिसमें 1073 धान,186 दलहन और 50 बीज ग्राम तिलहन के शामिल हैं.

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उन्होंने कहा कि ई-नाम में सूचीबद्ध लगभग 75000 किसानों को मोबाइल फोन के लिए उनके खाते में डीबीटी के माध्यम से दो हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा रही है. इस योजना के अंतर्गत इस वर्ष अब तक 22000 किसानों के बीच वितरण किया गया है. सितंबर तक रजिस्टर्ड सभी किसानों को मोबाइल फोन दे दिया जायेगा.

राज्य में कृषि महाविद्यालयों की स्थापना

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालयों के रूप में राज्य में सात नए महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है. इन महाविद्यालयों के सुचारू रूप से संचालन के लिए कुल 435 पदों का सृजन भी किया गया है. इनमें से कुछ महाविद्यालयों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है और शेष में जल्द ही पढ़ाई शुरू होगी.

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प्रत्येक जिले में मत्स्य बिक्री केंद्र बनाएं

मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों में मत्स्य बिक्री केंद्र बनाये जाने का निर्देश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड वर्तमान में देश के मछली उत्पादन में अग्रणी राज्यों में स्थापित हुआ है. वर्ष 2014 तक राज्य में मछली का उत्पादन 1 लाख 4 हजार मैट्रिक टन था जो वर्ष वार बढ़कर वर्ष 2018-19 में 2 लाख 8 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है जो रिकॉर्ड उपलब्धि है.

2014 तक जहां सिर्फ 108 करोड़ मछली बीज का उत्पादन होता था वह बढ़कर 2018-19 में 1036.29 करोड़ हुआ है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के मछुआरों को मछुआ आवास एवं वेदव्यास आवास योजना का पूरा लाभ मिल रहा है. वेदव्यास आवास योजना के अंतर्गत राज्य में कुल 2100 आवास बनाये जायेंगे.

जिलों में पोल्ट्री फेडरेशन के ब्रांच स्थापित करने का निर्देश दिया

मुख्यमंत्री ने कृषि सचिव को निर्देश दिया कि जिलों में पोल्ट्री फेडरेशन का ब्रांच स्थापित किए जायें. खासतौर पर ट्राइबल जिलों में पोल्ट्री फेडरेशन के ब्रांच खुलने से वहां की आदिवासी महिलाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त होगा.

कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के उद्देश्य राज्य के सभी जिलों में पांच हजार मैट्रिक टन क्षमता के एक-एक शीतगृहों का निर्माण किया जा रहा है. नवनिर्मित शीतगृहों को जल्द से जल्द कार्यान्वित करने का निर्देश मुख्यमंत्री ने विभागीय सचिव को दिया.

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