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बेटियों को बचपन से ही बनायें सशक्त, विषम परिस्थितियों में दृढ़ता कम न होने दें : रेखा शर्मा

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Khunti : समय के साथ लोगों की मानसिकता में काफी बदलाव आया है. पहले महिलाएं घर की दहलीज तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब वह जमाना नहीं है. महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत सिद्ध कर रही हैं. उक्त बातें राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहीं. वह मंगलवार को इप्सोवा की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस समारोह के अवसर पर बोल रही थीं. कार्यक्रम का आयोजन कालामाटी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खूंटी में किया गया था. रेखा शर्मा ने कहा कि बचपन से ही अगर लड़कियों को सशक्त बनाया जाये, तो भविष्य में होनेवाली अनहोनियों से इन्हें बचाया जा सकता है. विषम परिस्थितियों का दृढ़ता से लड़कियां सामना कर सकें, इसके लिए जरूरी है कि समाज में सकारात्मक सोच का सृजन हो. पुरुषों को भी चाहिए कि महिलाओं के प्रति नजरिया बदलें. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक दिन की बात नहीं है कि महिलाओं के प्रति आदर दिखाया जाये, बल्कि यह एक व्यावहारिक चीज है.

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घरेलू हिंसा के प्रति जागरूक नहीं महिलाएं

इस दौरान झारखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कल्याणी शरण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भम्रण करने से जानकारी होती है कि महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति कितनी असंवेदनशीलता है. ऐसी महिलाएं भी हैं, जिन्हें यह पता नहीं होता कि घरेलू हिंसा क्या है. उन्होंने कहा कि आयोग कोर्ट में सबसे अधिक मामले घरेलू हिंसा के आते हैं. महिलाओं को सही जानकारी नहीं होने के कारण सबसे अधिक घरेलू हिंसा होती है, क्योंकि महिलाएं अपने लिए आवाज उठाने से डरती हैं.

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शहीद विजय सोरेंग की पत्नी को किया सम्मानित

इस दौरान पुलवामा हिंसा में शहीद विजय सोरेंग की पत्नी कारमेला बा को सम्मानित किया गया. साथ ही, शहीदों को श्रद्धांजलि देकर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी.

ये थे उपस्थित

मौके पर इप्सोवा अध्यक्ष पूनम पांडे, झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर, बीडीओ सुचित्रा मिंज, अरुणा नाथ, सुरेश चंद्र गोप, सुरेश चंद्र घोष, नीलिमा सोरेन समेत अन्य उपस्थित थे.

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