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इस साल 15 जनवरी को मनायी जायेगी मकर संक्रांति, दो दिन है योग

विभिन्न तरह के तिलकुट और लाई की सौंधी खुशबू से अटा बाजार

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Ranchi: आस्था का पर्व मकर संक्रांति मंगलवार को पूरे श्रद्धा के साथ मनाया जायेगा. श्रद्धालु गंगा नदी में इस दिन श्रद्धा की डुबकी लगाते हैं. हिंदू समाज में इसी दिन से खरमास की समाप्ति मानी जाती है. और लोग सभी मांगलिक कार्य करना शुरू कर देते हैं. आचार्य संतोष मिश्र ने बताया कि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में जाने को ही संक्रांति कहते हैं. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. एक जगह से दूसरी जगह जाने अथवा एक-दूसरे का मिलना ही संक्रांति कहलाता है. आचार्य ने बताया कि हालांकि कुल 12 सूर्य संक्रांति हैं, लेकिन इनमें से मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति प्रमुख हैं. इस संक्रांति के दौरान सूर्य उत्तरायण होते हैं यानी पृथ्वी का उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है. उत्तरायण देवताओं का अयन है. आचार्य मिश्रा ने बताया कि इस साल मकर संक्रांति में खास संयोग बन रहा है, जिसकी वजह से यह और भी खास हो रही है. मकर संक्रांति के योग इस बार 2 दिन बन रहा है. 14 जनवरी सोमवार को रात्रि 8:08 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, अगले दिन 15 जनवरी दोपहर 12 बजे  तक मकर राशि में ही रहेंगे. इसी कारण 15 जनवरी को ही देश भर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जायेगा.

देश भर में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है यह त्योहार 

मकर संक्रांति को देश भर में मनाया जाता है. अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं. दक्षिण भारत में इसे पोंगल के नाम से जाना जाता है. गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण कहा जाता है. तो वहीं हरियाण और पंजाब में मकर संक्रांति को माघी और लोहड़ी, असम में भोगली बिहू के नाम से जाना जाता है. मकर संक्रांति के अवसर पर पतंग उडाने की भी परंपरा रही है. इसके साथ ही इस दिन खिचड़ी का खाने की भी मान्यता है.

तिलकुट और तिल सामग्री से भरे बाजार, आने लगी तिलकुट की सौंधी खुशबू

मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चुड़ा, तिल, गुड़, चूड़ा, दही, चीनी, तिलबा, सोहनपापड़ी, घीबर, तिलपट्टी, लाई सहित विभिन्न व्यंजन खाने की परंपरा है. देवताओं को भी तिल और गुड़ का ही भोग लगाया जाता है. इसके बाद प्रसाद स्वरूप सभी इसे ग्रहण करते है. राजधानी रांची में मकर संक्रांति को देखते हुए बाजार पूरी तरह सज चुका है. बाजार में तिल की सौंधी-सौंधी खुशबू लोगों को अपनी और आकषित कर रही है. महावीर चौक पर तिलकुट की दुकान लगाने वाले दिलीप कुमार साह ने बताया कि काफी वर्षों से तिलकुट बेचते आ रहे हैं. पहले उनके पिता महावीर लाल साह और उनसे पहले उनके पिताजी फंदी साह दुकान लगाते थे. अपने बचपन से ही तिलकुट बनाने का काम कर रहा हूं. उन्होंने बताया कि तिल, चीनी, खोवा,  और गुड़ से तिलकुट तैयार किया गया है.

कीमत प्रति किलोग्राम 

चूड़ा (अरवा)60 रुपये
चुडा (उसना)32 रुपये
भुरा60 रुपये
दही100 रुपये
तिलकुट (चीनी)260 रुपये
तिलकुट (गुड़)260 रुपये
तिलपट्टी280 रुपये
लाई खोवा320 रुपये
लाई (चुडा-मुढ़ी)20 से 25 रुपये
तील का लड्डु250 रुपये
रेबड़ी200 रुपये

 

मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त

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पुण्य काल मुहूर्त सुबह 07:14 से 12:36 तक (कुल समय  5 घंटे 21 मिनट)

महापुण्य काल मुहूर्त – 07:14 से 09:01 तक (कुल समय 1 घंटे 47 मिनट)

महाकुंभ का भी हो जायेगा शंखनाद 

मकरसंक्रांति के साथ ही प्रयागराज में महाकुंभ भी आरंभ हो जायेगा. मकर संक्रांति से शुरु होकर यह मार्च 2019 (शिवरात्रि) तक चलेगा. माना जाता है कि प्रयागराज में होने वाला कुंभ प्रकाश की ओर ले जाता है, यह एक ऐसा स्थान है जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक सूर्य का उदय होता है.  हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है. पवित्र गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं. इन्हें शाही स्नान भी कहा जाता है.

इन तारीखों को होंगे कुंभ मेले के शाही स्नान 

मकर संकांति14 एवं 15 जनवरी 2019 सोमवार एवं मंगलवार
 पौष पूर्णिमा21 जनवरी 2019 सोमवार
 पौष एकादशी31 जनवरी 2019 गुरुवार
 मौनी अमावस्या4 फरवरी 2019 सोमवार
 बसंत पंचमी10 फरवरी 2019 रविवार
 माघी एकादशी16 फरवरी 2019 शनिवार
 माघी पूर्णिमा19 फरवरी 2019 मंगलवार
 महाशिवरात्रि04 मार्च 2019 सोमवार

 

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