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मकर संक्रांतिः भोलेनाथ को लगाया गया दही, चूड़ा और तिल के लड्डू का भोग

Dumka : मकर संक्रांति के अवसर पर बाबा बासुकीनाथ धाम में भक्तों की भीड़ उमड़ी. लोगों ने हर्षोल्लास के साथ संक्रांति का आनंद लिया. फौजदारी दरबार में उपस्थित होकर सभी ने बाबा से आशीष मांगा.

स्नान दान के महापर्व पर बाबा दरबार में आने से पहले श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवगंगा में आस्था की डुबकी लगायी. भक्तों की भीड़ औऱ कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए मंदिर में अरघा के ही माध्यम से भोलेनाथ को जल चढ़ाया गया.

भक्तों ने जल के साथ तिल और तिल से निर्मित सामग्रियां भी अर्पित कीं. मंदिर प्रशासन की ओर से मकर संक्रांति के मौके पर भोलेनाथ को दही, चूड़ा और तिल के बने लड्डू का भोग लगाया गया.

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दही, चूड़ा चढ़ाने की रही है परंपरा

पंडा धर्म रक्षिणी सभा, बासुकीनाथ के अध्यक्ष मनोज पंडा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन से सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण हो जाते हैं. इसके बाद शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं.

बासुकीनाथ में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार स्थानीय श्रद्धालु नागेश कामना ज्योतिर्लिंग को दही, चूड़ा और तिल चढ़ा कर मकर संक्रांति पर्व मनाते हैं.

दूसरे राज्यों से बासुकीनाथ धाम आये श्रद्धालुओं ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण बाबा की स्पर्श पूजा नहीं कर पाने का मलाल है. पर फिर भी खुशी इस बात की है कि भोलेनाथ की नगरी में आकर मकर संक्रांति पर्व मनाने का अवसर मिला. श्रद्धालुओं ने दुनियाभर से कोरोना महामारी समाप्त करने की भोलेनाथ से कामना की.

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प्रशासन था मुस्तैद

मकर संक्रांति के मौके पर भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन की ओऱ से कई स्तरों पर व्यवस्था की गयी थी. भक्तों को बाबा मंदिर परिसर में अनुशासित तरीके से बनाये रखने में पुलिस के जवान लगातार मुस्तैदी बनाये हुए थे. अरघा सिस्टम के जरिये ही बाबा को जल चढ़ाने का प्रावधान किया गया था.

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