Ranchi

ऑडिट रिपोर्ट तो फाइल कर रही राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियां, लेकिन इलेक्ट्रोल बॉन्ड की नहीं दे रही जानकारी

Ranchi: इलेक्ट्रोल बॉन्ड के जरिये राजनीतिक दलों को मिलने वाले चुनावी चंदे पर हाल के दिनों में काफी सवाल खड़े किये गये. एक आंकड़े के मुताबिक, अन्य राजनीतिक दलों की बजाय बीजेपी को सबसे अधिक इलेक्ट्रोल बॉन्ड से चंदे मिले.

भले ही इलेक्ट्रोल बॉन्ड राष्ट्रीय पार्टियों को राहत देती हो, लेकिन क्षेत्रीय पार्टियों के लिये तो यह मुसीबत है. इसी साल 12 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राजनीतिक दल इलेक्ट्रोल बॉन्ड से मिलने वाले चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देगी. जिसमें राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय पार्टियों को शामिल किया गया.

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड की क्षेत्रीय पार्टियां जिसमें जेवीएम, जेएमएम और आजसू प्रमुख है. इन्होंने चुनाव आयोग को पेश किये अपने ऑडिट रिपोर्ट में इलेक्ट्रोल बॉन्ड की जानकारी नहीं दी है.

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एडीआर से चुनाव आयोग का हवाला देते हुए जानकारी दी गयी कि साल 2017-18 और 2018-19 में इन तीनों पार्टियों ने ऑडिट रिपोर्ट तो फाइल की लेकिन इलेक्ट्रोल बॉन्ड से मिलने वाले चंदे की जानकारी नहीं दी गयी.

राज्य में न के बराबर बिक्री हुए है इलेक्ट्रोल बॉन्ड

राज्य में केंद्र सरकार की ओर से मात्र एक बैंक को ही इलेक्ट्रोल बॉन्ड की बिक्री के लिये अधिकृत किया गया है. जो राजधानी स्थित कचहरी एसबीआइ बैंक है. बैंक के पास बॉन्ड उपलब्ध होते हुए भी बिक्री अधिक नहीं हो रही है. जिससे संभावित है कि क्षेत्रीय पार्टियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा.

हालांकि गोपनियता की बात करते हुए बैंक प्रबंधन कितने बॉन्ड बिके इसकी जानकारी नहीं देना चाहते. हालांकि किसी पार्टी को कहां से कितना चंदा मिला, इसकी जानकारी के लिये एडीआर की ओर आरटीआइ भी किया गया.

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लेकिन चुनाव आयोग ने पांच नवंबर को इसके जवाब में कहा कि इस तरह की सूचना आयोग के पास संकलित नहीं है. एडीआर के राज्य प्रतिनिधियों से जानकारी मिली की इलेक्ट्रोल बॉन्ड से चंदा सिर्फ राष्ट्रीय पार्टियों को मिल रहा है.

क्या कहा क्षेत्रीय नेताओं ने

इस संबंध में जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव आयोग को पार्टी की ओर से सभी जानकारियां दी जाती है. जहां तक बात है इलेक्ट्रोल बॉन्ड कि तो यह देखना होगा कि जेएमएम को कितने चंदे इलेक्ट्रोल बॉन्ड से मिले. इन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोल बॉन्ड के कारण क्षेत्रीय दलों में काफी असर पड़ा है.

केंद्र सरकार ने काले धन को व्हाइट करने के लिये इस कानून को लाया. तब भी इसका विरोध किया गया था. लेकिन अब क्षेत्रीय पार्टियों पर इसका बहुत असर है. सुप्रियो ने कहा कि अब तक इलेक्ट्रोल बॉन्ड के जरिये 90 प्रतिशत फंड बीजेपी को मिला.

ऐसे में क्षेत्रीय पार्टियां तो खस्ता हाल में है ही. वहीं आजसू के केंद्रीय सचिव सह प्रवक्ता देवशरण भगत ने कहा कि चुनाव आयोग की वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया होगा. पार्टी सभी जानकारी आयोग को देती रहती है. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रोल बॉन्ड से पार्टी को चंदा मिला है या नहीं यह देखना होगा.

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