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धनबाद नगर निगम के अपर नगर आयुक्त महेश संथालिया पहले लेक्चरर थे, सुनिए और समझिये

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Dhanbad: धनबाद नगर निगम के अपर नगर आयुक्त झारखंड प्रशासनिक सेवा में आने से पहले लेक्चरर थे. पढ़ाते थे. क्या पढ़ाते थे. हड़प्पा सिविलाइजेशन. इतिहास या कुछ और? धनबाद में पहले एसडीओ थे लौटे तो धनबाद नगर निगम में अपर नगर आयुक्त बन कर. बिल्डरों से संबंधित सवाल को लेकर जब न्यूज विंग संवाददाता उनसे मिला तो वे इतिहास पढ़ाने लगे. उन्होंने जो कहा उसे उसी रूप में रखने का यहां प्रयास कर रहे हैं ताकि वह जो कहना चाह रहे हैं वह लोग समझ सकें.

पहले ग्राउंड लेवल पर जाइये

पहले ग्राउंड लेवल तक जाकर देखिये कि बात क्या है. अखबार में जो भी छ्पा पहले उससे जान लें कि क्या मामला है. आपका काम तो खोजना और उसको समझ कर सत्यापन करना है न. तो पहले सत्यापन कीजिये. हमारे पास तो सारा डाटा आपको एक साथ मिल जायेगा तो आपकी मेहनत खत्म हो जायेगी. मुझे भी तो आपसे फीडबैक मिलेगा कि क्या हो रहा है. हो सकता है कि कहीं-न-कहीं समस्या हो. मैं भी जानना चाहता हूं कि पदाधिकारी कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहे हैं. मुझे भी चीजों को जानने दें. सबसे पहले आपको भी जानना होगा कि समस्या कहां हैं और कैसे संचालित होती है. पहले आपको किसी भी मुद्दे का फीडबैक लेना चाहिए कि वास्तव में समस्या क्या, कैसे और कहां है. नगर निगम करप्शन करने में लगा है. ऐसा लोग कहते हैं. अगर ऐसा है तो जरूर कहिये.

हड़प्पा संस्कृति की बात की

और नहीं तो हड़प्पा संस्कृति की तरह 3000 साल पहले वाला चाहते हैं तो कर लें. जहां 60 प्रतिशत लोग रहते हैं तो उससे हम 40 प्रतिशत लोग बाहर कैसे हो जायेंगे. इसलिए पहले आपको किसी भी चीज की जांच करके सत्यापन करना चाहिये. वहां जाएंगे और पूछेंगे कि आप कैसे भवन बनवा रहे हैं. क्या आधार है. संभव है वह खराब तरीके से पेश आएं. फिर, संवाददाता से इतिहास ज्ञान की भी बात पूछी.

किसी भी चीज को ग्राउंड जीरो लेवल से जानिये

अब यहां भवनों का एक्सटेंशन खत्म हो गया है. देखने की बात है कि क्या आम आदमी नियम का पालन कर रहा है. हमें आपसे भी तो जानकारी चाहिए आप खोजी हैं. यहां जो भी भवन बन रहा है उससे संबंधित बेसिक चीज तो आपको जानना ही चाहिये. क्या आपने पूछताछ की है. किसी भी चीज को ग्राउंड जीरो लेवल से जानिए. जो निर्माण हो रहा है 5 अप्रैल 2016 के बाद उसके निर्माण की वैधता खत्म हो गई है. तब भी निर्माण कैसे हो रहा है इसको सत्यापित कीजिए. किसी भी चीज को कर रहे हैं तो उसका आधार जानिए. नौकरशाह पर भरोसा करना छोड़ दीजिए. यह सबसे बेकार और भ्रष्टतम संस्था है. ऐसा लोग मानते हैं. सभी मानते हैं कि हम तो बेईमान लोग बैठे हैं, ऐसा लगता है.

100 से अधिक भवन बन रहे हैं

नजर उठा कर देखिये तो 100 से अधिक भवन बन रहे हैं. रिपोर्ट निकाल कर देखिये.असल में होता क्या है. एग्जिक्यूटिव को बदले कोई अल्टरनेटिव उपाय तैयार नहीं किया गया है. आर्टीफिसियल इंटेलिजेंस की जो बात कर रहे हैं वो आनेवाली पीढ़ी का विनाश कर रहे हैं. यह बता दें कि यहां चंद्रशेखर अग्रवाल डंडा लेकर बैठे हैं. कोई हेरफेर नहीं कर सकता. पहले नक्शा पास कराने का 5%, 7% जो चलता था, वह खत्म हो गया है. बिल्डरों का रीचार्ज खत्म हो गया. किसी ने नगर निगम से दोबरा रीचार्ज नहीं करवाया. न ही धनबाद में कोई टाउन प्लानिंग है. आप कहेंगे कि माडा से पास हुआ.

कैसे चलेगी निगम की व्यवस्था

आप क्या उम्मीद करते हैं? नगर निगम का डेढ़ लाख से डेढ़ करोड़ तक सिर्फ कचरा लेबर का बिल है. 2 लाख 57 हजार यहां पर हाउस होल्ड है. पर लोग क्या भुगतान करते हैं? 3900 लोग ही सिर्फ भुगतान करते हैं. बाकी 2 लाख 20 हजार भुगतान नहीं करते हैं. नगर निगम को निकम्मा बोलते हैं. इसका कोई अल्टरनेटिव उपाय है. प्लानिंग है? आप जिस संस्था को जिम्मेदारी दे रहे हैं. अगर वो कुछ गलत करेगा तो आपके पास बर्बादी के अलावा कुछ नहीं बचेगा. 5 अप्रैल के बाद भवन बनना नहीं था. और 5 अप्रैल 2018 को वैधता खत्म हो गयी है. जरा पूछिये इन लोगों से आप. उनलोगों से सूचना नहीं निकाल पायेंगे.

हम से आपको जो भी जानकारी चाहिये मैं सब दूंगा. आप बिल्डरों से भी मिलकर पता करके हर पहलू को जान कर आइये. सारी जानकारी मैं अवश्य दूंगा.

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