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‘बेदाग’ सरकार की पार्टी के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा ”घोटाला है राजधानी की सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना”

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Nitesh Ojha

  • मुख्य सचिव से भी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं सांसद
  • 2006 में मैनहर्ट कंपनी ने बनाया था डीपीआर
  • 2015 में ज्योति बिल्डटेक ने संभाला, सितम्बर 2018 तक करना था काम पूरा
  • अब 30 सितम्बर 2019 को कार्य करने का मिला निर्देश
  • पहले थी लागत 327 करोड़, अब पुनरीक्षित लागत होगी 600 करोड़ रुपये
  • ‘बेदाग’ सरकार की मेयर आशा लकड़ा ने भी योजना की स्थिति पर जतायी है नाराजगी

Ranchi: रांची नगर निगम क्षेत्र में चल रही सीवरेज– ड्रेनेज परियोजना एक बार फिर चर्चा में है. ऐसा इसलिए नहीं कि यह परियोजना पूरी हो चुकी है. बल्कि इसलिए कि ‘बेदाग’ सरकार का दावा करनेवाली रघुवर सरकार की पार्टी के राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने जिला विकास समन्वय व अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में योजना में हो रहे घोटाले की बात कही है. श्री पोद्दार ने कहा है कि घोटले का जिम्मा लेने को कोई तैयार नहीं है. अपने ऑफिशियल ट्विटर साइट में उन्होंने कहा है कि परियोजना पूरी तरह से एक बड़ा फ्रॉड है. इसके तहत न ही प्रॉपर कॉम्पैक्टिंग हुई है और न ही क्यूरिंग. ऐसे में साफ है कि उक्त परियोजना पूरी तरह से एक घोटाला है.

जानिए क्या है कि सीवेरज– ड्रेनेज परियोजना

सीवरेज– ड्रेनेज परियोजना रांची नगर निगम क्षेत्र में चल रही एक प्रमुख योजना है. योजना का कार्य वर्ष 2006 में शुरू किया गया था. परियोजना का डिजाइन और डीपीआर सिंगापुर की मैनहर्ट कंपनी ने तैयार किया था. योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना था. योजना में सीवरेज की कुल लंबाई 192 किमी और ड्रेनेज की कुल लंबाई 207 किमी तय की गयी थी. इसकी प्राक्कलित राशि 359 करोड़ रुपये निर्धारित थी.

मुख्य सचिव से भी कर चुके हैं कार्रवाई की मांग

ऐसा नहीं है कि सांसद ने परियोजना को लेकर पहली बार सवाल उठाया हो. अगस्त माह में भी उन्होंने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिख सीवरेज पाइप लाइन बिछाने के तरीके और अपनाई जा रही तकनीक पर कड़ी आपत्ति जतायी थी. उन्होंने सम्बंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली की जांच कर कार्रवाई की मांग की थी. कहा था कि योजना की लंबाई बढ़ने से राशि में भी बड़ा परिवर्तन होना तय है. लेकिन योजना की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. शनिवार को हुई दिशा की बैठक में उन्होंने कहा है कि सीवरेज ड्रेनेज के नाम पर केंद्र के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है. इसके लिए निगम में 80 करोड़ की राशि का भुगतान भी कर दिया लेकिन आज तक सीवरेज– ड्रेनेज नहीं बना. इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह भी किसी को नहीं पता.

संवेदक ने भी माना 327 करोड़ की जगह 600 करोड़ आयेगी लागत

वर्तमान में राजधानी में सीवरेज परियोजना का कार्य ज्योति बिल्डकॉम टेक प्राइवेट लिमिटेड कर रही है. कंपनी ने विभाग को बताया है कि यह काम 1 अक्टूबर 2015 को प्रारंभ किया था. योजना को सितम्बर 2018 तक पूरा किया जाना था. योजना का प्रस्तावित सीवर नेटवर्क 180 किमी था. बाद में किये सर्वे से उपरांत उक्त लंबाई 350 किमी हो गयी. कतिपय क्षेत्र में सीवर की गहराई अत्यधिक हो जाने के कारण लंबाई को 250 किमी कर दिया गया. वर्तमान लागत 327 करोड़ है. ड्रेनेज कम्पोनेट की लागत 129 करोड़ है, जिसमें करीब 9 करोड़ खर्च हो चुका है. योजना में एक STP (जिसकी क्षमता 37 एमएलडी होगी) का भी निर्माण किया जाना है. जिसका निर्माण कंपनी 31 मार्च 2019 तक ही कर पायेगी. वहीं ड्रेनेज के नेटवर्क को पूरा करने में भी अभी डेढ़ वर्ष लगेंगे. बताया कि इससे योजना की कुल पुनरीक्षित लागत 600 करोड़ हो जाएगी.

तकनीकी कार्यपालक अभियंता और संवेदक को भी मेयर लगा चुकी हैं फटकार

ऐसा नहीं है कि इस ‘बेदाग’ सरकार के सांसद ही योजना को लेकर नाराज हैं. बल्कि भाजपा से जुड़ी मेयर आशा लकड़ा ने भी योजना पर अपनी नाराजगी जतायी है. समीक्षा बैठक में उऩ्होंने संवेदक ज्योति बिल्डटेक के अधिकारियों को कार्य में लापरवाही बरतने पर फटकार लगायी थी. कहा था कि कंपनी की लापरवाही के कारण सड़कों पर जगह-जगह गड्डे खुले छोड़ दिये गये हैं. मेयर ने योजना का कार्य देख रह निगम के तकनीकी कार्यपालक अभियंता यूएन तिवारी पर गलत रिपोर्ट पेश करने की बात कही थी. इसके कारण योजना की प्रगति से अधिकारी पूरी तरह अनभिज्ञ थे.

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