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महेश पोद्दार ने हेमंत से पूछा- फूलो-झानो, सिनगी दई पर अत्याचार करनेवाले कौन सी भाषा बोलते थे? वे तो आज भी मौज कर रहे!

संजय सेठ ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

Ranchi : सीएम हेमंत सोरेन के भोजपुरी, मगही के प्रति भाषाई बयान पर भाजपा सांसद महेश पोद्दार और सांसद संजय सेठ ने नाराजगी जाहिर की है. महेश पोद्दार के मुताबिक इसके जरिये सरकार अपनी नाकामियां, कमजोरियां छिपाने में लगी है. इसलिए काटने-बांटने-छांटने की राजनीति हो रही है जिसे बन्द किया जाना चाहिए. ऐसे बयान से राज्य का माहौल तनावपूर्ण होता है. ऐसी कोशिशों से आग भड़केगी. इसकी आंच सीएम की कुर्सी तक भी पहुंचेगी.

संजय सेठ ने कहा कि भोजपुरी, मगही व अन्य भाषाओं पर मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान बेहद दुखद और शर्मनाक है. संविधान पर आस्था रखते हेमंत सोरेन ने सीएम पद की शपथ ली है, उसी संविधान ने इन भाषाओं को मान्यता दी है. देश के कई विश्वविद्यालयों और विदेशों में भी इन भाषाओं की पढ़ाई होती है.

कई सुप्रसिद्ध रचनाएं हुई हैं. ऐसे में सीएम के द्वारा भाषाई स्तर पर विभेद करना यह दर्शाता है कि वे संविधान में आस्था नहीं रखते हैं.

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झारखंड के इतिहास को करें यादः महेश

महेश पोद्दार ने ट्विटर पर कहा है कि सरकार को वर्तमान सामाजिक संदर्भ में बात करते हुए फैसला लेना चाहिए. भाषा के आधार पर झारखंडियों के साथ अत्याचार-दुराचार करने वालों की पहचान का शौक अगर सीएम को है तो जरा झारखंड के इतिहास को याद करें.

फूलो, झानो, सिनगी देई आदि और उनके समकालीन झारखंडी महिलाओं पर अत्याचार-अनाचार करनेवालों की भाषा पर गौर करें. सच यह है कि ऐसे भाषाई लोग तब भी डोमिनेटिंग थे, आज भी हैं.

जिन लोगों ने झारखंडियों की आज़ादी-अस्मत-आत्मसम्मान-आस्था सबको जख्मी किया, वो उस वक्त भी सत्ता के संरक्षण में यह सब कर रहे थे.

आज का शासन भी उनके लिए एक गिफ्ट है. भाषा के आधार पर अगर वंचित, दंडित करना ही है तो सीएम को ऐसे लोगों के खिलाफ अपनी हिम्मत दिखानी चाहिए.

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आंदोलन में हर वर्ग की रही है भूमिकाः संजय

संजय सेठ के मुताबिक झारखंड आंदोलन में सभी समाज की भूमिका रही. हर वर्ग ने झारखंड के लिए अपनी कुर्बानियां दीं. हर किसी ने अपनी क्षमता के अनुसार अपना त्याग किया.

बावजूद इसके मुख्यमंत्री के द्वारा ऐसा कहना समाज में विभेद पैदा करनेवाला है. सीएम को ऐसे बयान देने से पहले भारत की भाषाओं का इतिहास पढ़ना चाहिए. आज भोजपुरी और मगही के कलाकार वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं.

सीएम बार-बार कमजोर और दबा कुचला बोल कर झारखंड के बड़े आदिवासी समाज का भी अपमान करते हैं. हर क्षेत्र में आर्थिक संपन्नता ही विकास का पैमाना नहीं हो सकती.

आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा, रामदयाल मुंडा सहित कई विभूतियों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. आज भी झारखंड का आदिवासी समाज हर मुद्दे पर देश और समाज के साथ खड़ा होता है. मुख्यमंत्री इस तरह की बयानबाजी नहीं करें जिससे कि समाज में विभेद पैदा हो.

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