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#MaharashtraPolitics  :  विधायक बचाने की कवायद में जुटे दल,  कांग्रेस विधायक जयपुर, एनसीपी के बागी विधायक दिल्ली भेजे जा रहे

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Mumbai :  महाराष्ट्र में शनिवार सुबह  देवेंद्र फडणवीस ने  मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.  फडणवीस को 30 नवंबर से पहले विधानसभा में बहुमत साबित करने का आदेश राज्यपाल ने दिया है.  देवेंद्र फडणवीस के सामने असली चुनौती महाराष्ट्र विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने की है.  भाजपा के दांव से  फ्रंटफुट पर चल रही  कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना अचानक बैकफुट पर आ गयी.  जान लें कि अब सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने गुट के विधायकों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की कवायद में जुट गये हैं.

खबर है कि महाराष्ट्र में बदले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कांग्रेस अपने विधायकों को जयपुर भेज रही है.  कांग्रेस पहले अपने विधायकों को भोपाल शिफ्ट करने की सोच रही थी, लेकिन बाद में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले राजस्थान के  जयपुर में शिफ्ट करने का फैसला हुआ.   कांग्रेस अपने विधायकों के लिए जयपुर को ज्यादा सुरक्षित मान रही है.

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शरद पवार ने अजित का मामला अनुशासन समिति को भेजा

उधर एनसीपी के बागी विधायकों को प्राइवेट जेट से दिल्ली लाया जा रहा है.  महाराष्ट्र में इस महा-उलटफेर के बाद मीडिया के सामने आये शरद पवार ने दावा किया कि अजित पवार ने उनकी पार्टी तोड़ दी. उनका भरोसा तोड़ दिया, लेकिन जिस भतीजे अजीत पवार ने उनकी पार्टी को इतना बड़ा नुकसान पहुंचाया उसे तुरंत पार्टी से बाहर करने के बजाय शरद पवार ने उनका मामला अनुशासन समिति को भेज दिया.

अब सवाल उठाया जा रहा है कि शरद पवार ने अजीत पवार को तत्काल पार्टी से बाहर क्यों नहीं निकाला? उन्होंने अजित पवार को विधायक दल का नेता क्यों बने रहने दिया. अब विधानसभा में फ्लोर टेस्ट में अजित पवार के इशारे पर ही एनसीपी विधायक वोट करेंगे और जो नहीं करेंगे उनकी सदस्यता दल-बदल कानून के तहत दांव पर लग जायेगी.

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