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CBI जज लोया मर्डर केस की दोबारा जांच करवा सकती है महाराष्ट्र सरकार, बढ़ सकती है अमित शाह की मुश्किलें

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Mumbai: महाराष्ट्र सरकार सीबीआइ के जज बीएच लोया के मर्डर केस की जांच फिर से करवा सकती है. मामले पर बोलते हुए मंत्री और एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि सरकार जज बीएच लोया की संदेहास्पद मौत के मामले की जांच करवा सकती है, बशर्तें इसकी शिकायत पर्याप्त सबूतों के साथ मिले.

पर्याप्त सबूत के साथ मिली शिकायत तो फिर करेंगे जांच- मलिक

पार्टी मीटिंग के बाद मामले पर बोलते हुए मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि जस्टिस लोया की संदेहास्पद हालत में हुई मौत की जांच तब ही होगी, जब इसे लेकर किसी तरह के सबूत मिलते हैं.

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जस्टिस लोया की संदेहास्पद हालत में मौत हो गयी थी.

सरकार इस केस को फिर से खुलवा सकती है. एनसीपी चीफ शरद पावर की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पार्टी प्रवक्ता मलिक ने कहा कि शिवसेना-कांग्रेस के साथ सरकार में आने के बाद ही शरद पवार ने लोया केस की फिर से जांच होने की संभावना जताई थी. लेकिन बगैर किसी शिकायत या सूबत के इसका कोई औचित्य नहीं बनता.

मंत्री मलिक ने ये भी कहा कि राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी इसके संकेत दिये हैं.

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2014 में हुई थी संदेहास्पद मौत

गौरतलब है कि जस्टिस लोया की 1 दिसंबर, 2014 को दिल का दौरा पड़ने से नागपुर में मौत हो गई थी. जब वो अपने एक सहकर्मी की बेटी की शादी में गये थे. इसके बाद उनकी मौत को लेकर सवाल उठे थे कि उनकी मौत एक साजिश के तहत हुए है.

जस्टिस लोया गुजरात के हाई-प्रोफाइल केस सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ की सुनवाई कर रहे थे.

दरअसल, जस्टिस लोया गुजरात के हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई कर रहे थे. सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ की सुनवाई सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश बीजी लोया कर रहे थे.

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वीएचपी ने वारिस पठान के इस बयान की आलोचना की है. उधर, मुस्लिम मौलवियों ने वारिस पठान के इस बयान की आलोचना की है. उन्‍होंने कहा कि इस तरह के बयान घृणा को जन्‍म देते हैं.

हालांकि जस्टिस लोया की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एसआइटी जांच की मांग वाली पीआइएल को खारिज करते हुए जज बीएच लोया की मौत को स्वाभाविक बताया था. और मामले की जांच के लिए एसआइटी गठन की मांग को खारिज कर दिया था.

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क्यों संदिग्ध है जज लोया की मौत 

26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन अनवर हुसैन शेख़ की फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी. सोहराबुद्दीन की पत्नी को भी मार दिया गया था. इन हत्याओं के आरोप गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह पर लगे. उनकी गिरफ़्तारी भी हुई. न्यायालय के आदेश पर अमित शाह को राज्य-बदर कर दिया गया था.

सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी की हत्या का आरोप गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह पर लगे. इस मामले को लेकर अमित शाह कि गिरफ्तारी भी हुई थी.

अमित शाह को दिसंबर 2014 में आरोपमुक्त कर दिया गया था. जज एमबी गोसावी ने जांच एजेंसी के आरोपों को नामंज़ूर कर दिया था. फिर ये मामला जज लोया को सौंप दिया गया, मामले में अमित शाह जज लोया की अदालत में भी पेश नहीं हुए. एक दिसंबर 2014 को लोया की मौत नागपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी.

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जस्टिस लोया की मौत के बाद जिस जज ने इस मामले की सुनवाई की, उन्होंने अमित शाह को मामले में बरी कर दिया था. एक दिसंबर को जज लोया की मौत के तीन साल तक किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाये थे.

ये सारे सवाल मीडिया में आयी एक रिपोर्ट के बाद 2017 में उठाए गए. रिपोर्ट में परिजनों के बयान का वीडियो जारी किया गया, जिससे जज लोया की रहस्मय मौत पर कई सवाल खड़े होते हैं.

इसमें जज लोया की बहन का कहना है कि सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए जज लोया को 100 करोड़ रुपये और मुंबई में एक घर देने की पेशकश की गई थी.

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