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महाराष्ट्र : नरभक्षी बाघिन को मार गिराया गया, सवाल खड़े हो रहे हैं  

इसी साल 29 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने टी1 को गोली मारने के आदेश पर रोक लगा दी थी.  

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Nagpur : महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में नरभक्षी बन चुकी बाघिन टी1को शुक्रवार रात मार गिराया गया.  बता दें कि यहां पांढरकवडा में एक के बाद एक इंसानों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण बाघिन की तलाश शुरू की गयी थी. तलाशी अभियान में 200 से ज्यादा लोग लगे हुए थे. अभियान में हाथियों और पैराग्लाइडर्स की भी मदद ली गयी थी. खबरों के अनुसार कोर्ट ने बाघिन को बेहोश करने का आदेश दिया था. अब बाघिन के मारे जाने पर सवाल खड़े हो गये हैं. बता दें कि इस नरभक्षी बाघिन ने 13 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया था. बता दें कि इसी साल 29 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने टी1 को गोली मारने के आदेश पर रोक लगा दी थी.  अगस्त में दो और मौतों के बाद विभाग ने दूसरा ऑर्डर जारी किया था और उसपर भी पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी. जंगल में बनाये गये मचानों पर रेंजर्स लगातार निगरानी कर रहे थे  हाथियों पर सवाल होकर ट्रैंक्विलाइजर गन्स (बेहोश करने वाली बंदूकों) के साथ शार्प शूटर्स भी आदमखोर बाघिन की तलाश पर निकले थे.  बाघिन को कैद कर पास के एक चिड़ियाघर में भेजने की योजना बनाई गयी थी.  ऐसे में बाघिन को मारे जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान के बेटे असगर ने टी1 बाघिन को मार गिराया

हैदराबाद के शॉर्प शूटर नवाब शाफत अली खान के बेटे असगर ने टी1 बाघिन को मार गिराया. कहा गया कि इस दौरान उसके साथ वन विभाग का कोई कर्मचारी नहीं था. कहा जा रहा है कि वन विभाग ने अपने ही ऑर्डर का उल्लंघन किया जिनमें हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाघिन को पहले ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) करने की कोशिश करने को कहा गया था.  कोर्ट द्वारा इसमें सफलता न मिलने पर ही बाघिन के खिलाफ जानलेवा कदम उठाने को कहा गया था.  कहा गया है कि पिछले एक साल से चल रहे खोज अभियान में एक बार भी बाघिन को पकड़ने की कोशिश नहीं हई.  सूत्रों के अनुसार  मौके पर बाघिन के शरीर में एक डार्ट (बेहोश करने का इंजेक्शन) जरूर लगा दिखा, लेकिन ऐसा लग रहा था कि उसे बाद में हाथ से चुभाया गया हो.  जानकारों के अनुसार पूरी फरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि बाघिन को बेहोश करने की कोशिश की गयी थी या नहीं.

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हालांकि स्थानीय लोग हमेशा से इस बाघिन को मारने की बात कर रहे थी, क्योंकि बाघिन 13 से ज्यादा लोगों पर जानलेवा हमले कर चुकी थी. इस क्रम में  अगस्त में हुई तीन मौतों के बाद गांववालों में काफी आक्रोश था, लेकिन पशुओं के खिलाफ जानलेवा कदम को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी थी और इसे गैरकानूनी ठहराया गया था.

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