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#Chhath: नहाय-खाय के साथ लोकआस्था का महापर्व शुरू, बाजारों में छायी रौनक

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केरवा के पतवा पे उगेलान सुरूजमल झांके झुंके

ए करेलू छठ बरतिया कि झांके झुंके

Sport House

हम तोसे पूछीं बरतिया ए बरतिया से केकरा लागे

ए करेलू छठ बरतिया से केकरा लागे..

हम रोजे बेटवा कवने अइसन बेटवा कि ओकरे लागे…

Mayfair 2-1-2020

NW Desk:  देशभर में पूरे उल्लास और श्रद्धा भाव से छठ महापर्व मनाया जा रहा है. लोकआस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ आज से शुरू हो गया. इस पर्व में शुद्धता का  पूरा ख्याल रखा जाता है. बाजार में भी रौनक देखते ही बन रही है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर पूरी तरह से चलह-पहल दिख रही है. इस पर्व में व्रती 36 घंटे का कठित व्रत रखते हैं.

पूरी शुद्धता के साथ बनाया जाता है खाना

नहाय-खाय के दिन व्रती सूर्य भगवान की उपासना के बाद पूरी शुद्धता से खाना बनाते हैं. इस दिन चावल, चना दाल और कद्दू की सब्जी घी और सेंधा नमक में बनाया जाता है. व्रती इसी खाना को खाते हैं और लोगों को प्रसाद स्वरूप यह खाना बांटते भी हैं. छठ पर्व में आम का जतुवन और आम की लकड़ी का ही इस्तेमाल किया जाता है.

छठ पर्व विशेषकर बिहार में मनाया जाता है. लेकिन अब देश के हर हिस्से में इस पर्व की रौनक देखने को मिल रही है. अब तो लोग विदेश में भी छठ पर्व मनाया जाने लगा है. महिला ही नहीं बल्कि पुरूष भी इस पर्व को करते हैं. लोग छठ मईया से संतान प्राप्ति की कामना करते हैं. मुख्यतौर पर कहा जाता है कि ये पर्व परिवार की सलामती के लिए किया जाता है.

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क्या है छठ पर्व के पीछे की पौराणिक कहानियां

छठ पर्व के पीछे की भी कई पौराणिक कहानियां हैं. देश में सूर्योपासना ऋग वैदिक काल से होती आ रही है. भगवान सूर्य की उपासना का जिक्र विष्णु पुराण, भगवत पुराण, ब्रह्मा वैवर्त पुराण में भी किया गया है.

– छठ की कहानियों के पीछे की मान्यता है कि भगवान राम जब माता सीता से स्वयंवर के बाद घर लौटे थे तो उन्होंने कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ही परिवार के साथ पूजा की थी. जिससे छठ पर्व को लेकर माना जाता है कि इसी दिन से सूर्योपासना का पर्व छठ मनाया जाने लगा.

– एक मान्यता यह भी है कि पांडव जुए में जब अपना सारा राज-पाट हार गए थे. तब पांडवों के लिए द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था. और इस व्रत के बाद ही दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुई थीं. उस वक्त से ही व्रत को करने की प्रथा चली आ रही है.

छठ महापर्व की तिथि

31 अक्तूबर, गुरुवार: नहाय-खाय 
1 नवंबर, शुक्रवार : खरना 
2 नवंबर, शनिवार: डूबते सूर्य को अर्घ्य 
3 नवंबर, रविवार : उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण

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