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महागठबंधन की बैठक ने बजायी चुनावी रणभेरी, आंदोलनकारियों का बिगुल शांत कराने में जुटी बीजेपी

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: भले ही झारखंड में महागठबंधन का आकार तय नहीं हुआ हो. सीटों को लेकर अभी उठापटक बाकी हो. लेकिन महागठबंधन की बैठक के बाद सूबे में चुनावी रणभेरी विपक्ष की टीम ने बजा दी है. पिछले बार 14 में से 12 और इस बार क्लीन स्वीप की रणनीति लेकर आम चुनाव में उतरने वाली बीजेपी अब फ्रंट फुट पर आकर खेल रही है. एक-एक कर सभी आंदोलनकारियों का बिगुल बीजेपी सरकार शांत कराने में लग गयी है. इस काम में काफी हद तक बीजेपी को सफलता भी मिली है. पार्टी के लोकसभा चुनाव के प्रभारी मंगल पांडे बंद कमरे में चुनाव की रणनीतियों को लेकर जीत के हर मंत्र का उच्चारण विधायकों और दूसरे कार्यकर्ताओं को सिखा रहे हैं. वहीं सरकार भी अपने स्तर से पब्लिक के सामने ऑल इज वेल वाली स्थिति पेश करने में लगी हुई है.

सबसे बड़ा टेंशन पारा शिक्षकों को शांत कराया

15 नवंबर के बाद से ही पारा शिक्षक बीजेपी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन कर सामने आ गये थे. शुरुआत में सरकार ने माना कि वो शिक्षकों को डरा कर काम पर वापस लौटने के लिए बाध्य कर लेंगे. लेकिन पारा शिक्षकों ने भी सरकार की खूब किरकिरी की. एक-के-बाद-एक लगातार तीन वार्ता हुई. शिक्षा मंत्री नीरा यादव और विभाग के आला अधिकारियों के लाख समझाने के बावजूद पारा शिक्षक नहीं मान रहे थे. लेकिन आखिरी और तीसरी वार्ता के बाद पारा शिक्षक काम पर लौटने के लिए मान गये. सरकार की तरफ से वेतन वृद्धि से लेकर उन्हें परमानेंट किए जाने वाली नियमों को लेकर नए सिरे से सरकार ने काम करने का भरोसा दिलाया. तब जाकर पारा शिक्षक माने. अगर इस जमात को सरकार नहीं समझा पाती तो आने वाले दिनों में विपक्ष पारा शिक्षक वाले मामले को चुनावी मुद्दा बनाता, तो बीजेपी के वोट बैंक पर भी असर पड़ता. पारा शिक्षकों की संख्या करीब 67 हजार है. ऐसे में करीब तीन लाख वोट को राज्य भर में पारा शिक्षक प्रभावित कर सकते थे.

मनरेगा कर्मियों की 64 दिनों की हड़ताल खत्म करायी

मानदेय और दूसरी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे मनरेगा कर्मियों को सरकार वापस काम पर भेजने में कामयाब हुई. राज्य भर के करीब 6000 मनरेगा कर्मी 64 दिनों से लगातार हड़ताल पर थे. मनरेगा कर्मियों के  हड़ताल पर होने से मनरेगा के कई कामों पर इसका असर पड़ रहा था. सरकार इस हड़ताल को खत्म कर अपनी सफलता में जोड़ने का काम आने वाले चुनाव में कर सकती है.

आश्वासन पर दोबारा आंदोलन वापस लिया झासा ने

झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों ने दोबारा सिर्फ आश्वासन पर अपना आंदोलन वापस ले लिया. इससे पहले भी अधिकारी हड़ताल पर गये थे. सरकार के आश्वासन पर उन्होंने इससे पहले भी हड़ताल वापस लिया था. जबकि उनकी मांग मांगी नहीं गयी थी. दोबारा से उसी मांग को लेकर अधिकारी हड़ताल पर थे.  सरकार ने फिर से सिर्फ आश्वासन देकर अधिकारियों को काम पर वापस भेज दिया. यहां तक कि अधिकारियों ने 20 जनवरी को होनेवाली अपनी बैठक को भी स्थगित कर दिया है.

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