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मध्यप्रदेश की अदालतों ने मिसाल कायम की, 10 माह में 150 दुष्कर्मियों को आजीवन कारावास

खबरों के अनुसार ट्रायल अदालतों ने 28 फरवरी से अबतक के 16 मामलों में मौत की सजा सुनाई है. इनमें से 14 मामलों में पीड़ित नाबालिग थीं.

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Bhopal : मध्यप्रदेश की विभिन्न अदालतों ने महज 10 माह में लगभग 150 दुष्कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुना कर मिसाल कायम की है. बता दें कि यह अकेला ऐसा राज्य है जो सरकारी अभियोजकों को अपराधियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए अवॉर्ड के तौर पर प्वाइंट देता है.  खबरों के अनुसार ट्रायल अदालतों ने 28 फरवरी से अबतक के 16 मामलों में मौत की सजा सुनाई है. इनमें से 14 मामलों में पीड़ित नाबालिग थीं. जानकारी दी गयी है कि इतने कम समय में देश के अंदर सजा-ए-मौत देने के मामले में यह संख्या सबसे अधिक है. इनमें से हाई कोर्ट ने तीन मीमलों में मौत की सजा पर मुहर लगा दी है. तीन मामलों में फांसी की सजा घटाकर आजीवन कारावास कर दिया गया.

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सरकारी अभियोजक के निदेशक राजेंद्र कुमार ने बताया कि अभी तक हाई कोर्टने किसी को भी बरी नहीं किया है. कहा कि यह जांच की गुणवत्ता और अभियोजन पक्ष के अच्छे काम को दिखाता है. कुमार ने बताया कि 150 ट्रायल में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी है. इसमें पीड़ित नाबालिग थे.

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सजा की मौत को बरकरार रख पाने पर 1000 प्वाइंट मिलते हैं

बताया गया है कि सरकारी अभियोजक जो किसी मामले में सजा की मौत को बरकरार रख पाते हैं उन्हें 1000 प्वाइंट मिलते हैं. साथ् ही हर आरोपी को आजीवन कारावास दिलाने पर उन्हें 500 प्वाइंट दिये जाते हैं.  याद करें कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में मध्यप्रदेश में होने वाले क्विक ट्रायल का जिक्र किया था.  इस क्रम में पीएम मोदी ने शहडोल में चुनाव प्रचार के दौरान भी 15 अगस्त की बात दोहरायी थी. क्विक ट्रायल का नतीजा मौत की सजा होता है. मौत की सजा 21 अप्रैल को आपराधिक कानून में हुए संशोधन के कारण दी जा रही है.  इस कानून के अनुसार ट्रायल जज को यह अधिकार है कि वह 12 साल या उससे कम उम्र के बच्चों के साथ होने वाले दुष्कर्म के मामले में मौत की सजा दें.

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