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महिलाओं को केंद्र में रखकर फिल्म बनाने वाले मधुर भंडारकर

जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : नए फिल्म निर्देशकों में मधुर भंडारकर ऐसी शख़्सियत हैं जो महिलाओं को केंद्र में रखकर ही अपनी फिल्में बनाते आ रहे हैं. ये सुखद इत्तेफाक है कि आज ही महिलाओं की समानता का दिवस भी है. शुरुआती दौर में इन्होंने तब्बू को लेकर चांदनी बार बनाई थी. इस फिल्म में मुंबई के डांस बार में डांस करनेवाली डांसरों के जीवन के स्याह पहलू और उनकी मजबूरी को संवेदनशील ढंग से दिखाया गया था. तब्बू ने इसमें दमदार अभिनय किया है.

इसके बाद करीना और कंगना रनौत को लेकर फैशन फिल्म बनाई थी. इसमें मॉडलिंग की दुनिया की चकाचौंध के पीछे के अंधेरे को दिखाया था.

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मॉडल को किस तरह से यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है और उम्र हो जाने के बाद उनकी क्या स्थिति होती है इसे भी दिखाया गया है.

इसी तरह कोंकणा सेन को लेकर पेज थ्री फिल्म भी बनाई थी. इसमें फिल्म और अखबारों की दुनिया का हाल दिखाया गया था. इनकी हर फिल्म एक नए विषय को लेकर बनाई गई थी.

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इंदु सरकार शानदार

इनकी अंतिम फिल्म मैंने इंदु सरकार देखी थी. यह अच्छी फिल्म थी. भारत में राजनीतिक पृष्ठभूमि पर फिल्में बनाने की परंपरा ना के बराबर रही है. ऐसे में मधुर भंडारकर की इंदु सरकार 1975 की इमरजेंसी के कलंकित दौर के बैकड्रॉप पर बनी . इंदु सरकार बनी कीर्ति कुल्हारी ने जबरदस्त अभिनय किया है.

अनाथ इंदु की हकलाहट, बेबसी और जो सच और सही लगे उसके लिए घर और पति को भी छोड़ने का साहस दिखाती स्वाभिमानी महिला के किरदार को बखूबी निभाया है.

इमरजेंसी के दौर में संजय गांधी का ही सिक्का चलता था. वो एक तरह से कार्यकारी पीएम की तरह काम कर रहे थे. बैगर किसी पद के भी मंत्रियों और ब्यूरोक्रेसी को अपनी अंगुलियों पर नचाते थे. संजय गांधी के रोल में नील नीतिन मुकेश एकदम फीट बैठते हैं. उन्होंने अच्छा अभिनय किया है.

इमरजेंसी के समय जबरन नसबंदी, तुर्कमान गेट कांड, विपक्षी नेताओं को जेल में डालने, अखबारों पर सेंसरशिप और आंदोलनकारियों के दमन को फिल्म में बखूबी दर्शाया गया है.

वहीं इंदु के पति बने सरकारी अधिकारी नवीन सरकार बने टोया राय चौधरी ने भी अपनी भूमिका से न्याय किया है. फिल्म में जबरन गानों, सेक्स व हिंसा के मसाले नहीं डाले गए यह अच्छी बात है.

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इमरजेंसी की सच्ची घटनाओं पर आधारित

मधुर भंडारकर अच्छी फिल्म बनाई है. लेकिन एक बात अखरी की इमरजेंसी की सच्ची घटनाओं को सीधे सीधे इंदिरा गांधी और संजय गांधी के बरक्स ना दिखाकर इंदु सरकार का किरदार गढ़ना पड़ा.

अमेरिका के फिल्मकार ओलिवर स्टोन जैसे साहसी निर्देशक अपने यहां नहीं है जो जान एफ कैनेडी की हत्या पर बनी जेएफके जैसी साहसिक फिल्में बना सके.

अपना सेंसर बोर्ड भी माशाअल्लाह है वो शायद ही ऐसी फिल्मों को रिलीज होने देगा. शायद इसलिए ही मधुर को इंदिरा सरकार बनाने का साहस ना कर इंदु सरकार का किरदार गढ़ना पड़ा. हां मधुर ने एक चालाकी की इंदु नाम रखा जो कि इंदिरा गांधी का घरेलू नाम था.

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