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मधुपुर उपचुनाव : कभी गंगा ने रोका था राज का रथ, इस बार राज ने रोक दी गंगा की गति

SUNIL JHA

DEOGHAR : मधुपुर विधानसभा उप चुनाव बीजेपी जीत नहीं पाई. बीजेपी ने इस सीट से आजसू से गंगा नारायण सिंह को पार्टी में शामिल कर मंत्री हाफिजूल हसन के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था.

इससे आजसू और पलिवार खेमा नाराज हो कर अपना खेल कर दिया. जो बीजेपी प्रत्याशी के लिए हार का कारण बना. गंगा नारायण सिंह के पक्ष में एक दिन भी चुनाव प्रचार करने राज पलिवार नहीं निकले थे और आजसू का एक भी नेता चुनाव प्रचार करने मधुपुर आ जाता तो आराम से सीट गंगा निकाल लेते. मधुपुर में बीजेपी पूरी ताकत लगाकर भी हार गयी.

भले ही इस हार को बीजेपी कम मार्जिन वाला हार बताकर खुद को तसल्ली दे रही है, लेकिन हकीकत यही है कि बीजेपी का ओवर कॉन्फिडेंस, अपने दल के नेता (राज पलिवार) पर अविश्वास और सहयोगी पार्टी आजसू का असहयोग उसे इस उपचुनाव में ले डूबा.

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मधुपुर विधानसभा क्षेत्र में गंगा नारायण की लोकप्रियता और पकड़ देखकर बीजेपी ने बतौर उनपर दांव लगा दिया. लेकिन यहां की क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को अनदेखा कर दिया. बीजेपी ने पहले तो बगैर आजसू की सहमति के गंगा नारायण को पार्टी में शामिल करा लिया.

आजसू ने विरोध जाहिर तो नहीं किया, लेकिन उपचुनाव में वो बीजेपी के साथ खड़ी नहीं रही. आजसू का एक भी नेता एनडीए प्रत्याशी गंगा नारायण के पक्ष में चुनाव प्रचार करने नहीं गया और न ही पार्टी की ओर से मधुपुर में गंगा नारायण सिंह के समर्थन देने संबंधी कोई बयान जारी किया.

वहीं बीजेपी राज पलिवार का टिकट काटने के बाद उन्हें मनाने में भी नाकामयाब रही.

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आजसू का साथ मिलने पर बड़ी मार्जिन से जीतते गंगा

उपचुनाव में गंगा नारायण सिंह 5247 वोट से हारे हैं. अगर बीजेपी समय रहते आजसू को मना लेती और आजसू प्रमुख सुदेश महतो, सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी समेत पार्टी के अन्य नेता 1 दिन भी वहां चुनाव प्रचार करने पहुंच जाते तो गंगा नारायण सिंह चुनाव में बड़ी मार्जिन से जीत हासिल करते. बता दें कि 2019 के विधानसभा चुनाव में मधुपुर सीट से बीजेपी और आजसू अलग-अलग चुनाव लड़ी थी.

चुनाव में आजसू प्रत्याशी के तौर पर खड़े गंगा नारायण को 45,620 वोट मिले थे. जाहिर है आजसू की नाराजगी से बीजेपी को भारी नुकसान हुआ है.

राज पलिवार की नाराजगी बीजेपी पर पड़ी भारी

राज पलिवार की नाराजगी से भी बीजेपी को बड़ा नुकसान हुआ है. राज पलिवार का वोट बैंक अगर बीजेपी प्रत्याशी गंगा नारायण सिंह को मिल जाता तो वे आराम से जीत जाते.

जानकारों के अनुसार कम से कम 10 से 15 हजार वोट तो उनकी नाराजगी की वजह से कटी होगी. बीजेपी ने आनन-फानन में पूरे कॉन्फिडेंस के साथ गंगा नारायण सिंह पर दांव तो लगा दिया. लेकिन उसके बाद प्रदेश नेतृत्व पलिवार और आजसू को मैनेज करने में विफल रहा.

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प्रदर्शन बुरा नहीं, लेकिन मैनेजमेंट में फेल रही बीजेपी

मधुपुर उपचुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन बुरा नहीं है. लेकिन रणनीति और मैनेजमेंट के मामले में बीजेपी फेल हो गयी. कम मार्जिन से ही जीत हासिल कर हफीजुल हसन और जेएमएम ने अपनी प्रतिष्ठा बचा ली. उपचुनाव के नतीजों से प्रत्यक्ष तौर पर हेमंत सोरेन सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था.

लेकिन हफीजुल की जीत से सरकार की स्थिति और मजबूत हुई है. जेएमएम के मत प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई, 2019 के चुनाव में जेएमएम को करीब 88 हजार वोट मिले और इस बार एक लाख 10 हजार से अधिक वोट आए.

उप चुनाव में तीसरे नंबर रहा नोटा

मधुपुर विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी और जेएमएम के अलावा जनता को कोई और पसंद नहीं है. इस बार भी उपचुनाव में तीसरे नंबर पर नोटा आया है. उपचुनाव में खड़े 4 निर्दलियों पर नोटा भारी पड़ा है.

जेएमएम और बीजेपी के बाद तीसरे नंबर पर 5,123 वोट के साथ नोटा रहा. 2019 के विधानसभा चुनाव में भी 4,520 वोट के साथ नोटा चौथे नंबर पर रहा था.

गंगा नारायण सिंह आजसू प्रत्याशी के रूप में पिछले चुनाव में 45 हजार से अधिक मत प्राप्त तीसरे नंबर रहे थे और उस समय बीजेपी उम्मीदवार रहे पूर्व मंत्री राज पलिवार के हार का कारणा बना था. इस चुनाव में हाजी हुसैन अंसारी जीते थे.

जिनके निधन से उप चुनाव हुआ. उप चुनाव गंगा व राज भी चुनाव लड़ने के लिए जोर आजमाइश कर रहे थे. ऐसे फिर दोनों को हार का मुहं देखना पड़ता.

कहा जाता है कि पार्टी के अंदरूनी सर्वे में राज को संगठन में तो गंगा को जनता में भारी बताए जाने की वजह से बीजेपी ने गंगा पर विश्वास जताया था. जबकि राज व उनके समर्थक टिकट कटने से नाराज थे.

अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए राज व उनके समर्थक ग्रुप ने बीजेपी प्रत्याशी गंगा नारायण सिंह के खिलाफ काम किया. जबकि प्रदेश स्तर लाबिंग करने में राज के मुकाबले गंगा भारी पड़े.

जानकारी के अनुसार टिकट की लाबिंग के दौरान सिर्फ़ एक पूर्व सीएम ने राज का समर्थन किया. जबकि गंगा का समर्थन अन्य नेताओं ने किया था. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश सहित गोड्डा के बीजेपी सांसद डॉ निशिकांत दुबे, पूर्व मंत्री रंधीर सिंह आदि ने गंगा को जिताने के लिए पूरी कोशिश की.

सांसद निशिकांत दुबे व पूर्व मंत्री रंधीर सिंह तो स्वयं भू प्रत्याशी की भूमिका में चुनाव प्रचार के दौरान नजर आ रहे थे.

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