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धनबाद और आसपास के इलाके में मां मनसा पूजा की धूम

Dhanbad: सर्पों की देवी मां मनसा की पूजा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में धूमधाम के साथ मनाया गया. इस अवसर पर सैकड़ों लोगो ने पूजा अर्चना की और मां मनसा से दुआएं मांगी. कोविड-19 के कारण इस वर्ष मां मनसा की पूजा सादगी के साथ की जा रही है. मनसा पूजा के अवसर पर मनसा मां की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई है. सर्पदंश से सुरक्षित रखने के लिए श्रद्धालुओं ने विषहरि मां मनसा की आराधना की. ऐसी मान्यता है कि मां मनसा सर्प देवी हैं और मां मनसा की पूजा कर सर्पदंश से सुरक्षित रह सकते हैं.

जांत और झापान का होता है आयोजन

मनसा पूजा के दौरान जांत और झापान का आयोजन किया जाता है. धनबाद के अधिकांश गांवों में मनसा देवी की पूजा अर्चना की जाती है. इस अवसर पर मनसा मंगल पाठ के अलावा जांत और झापान का अयोजन होता है. जांत में मां मनसा देवी के गुणगान पर आधारित भजन कीर्तन किया जाता है. इसमें देवी के भक्तों की टोली वाद्य यंत्रों के साथ उनकी कहानी पर आधारित गीत गाती है. वहीं झापान में देवी के भक्त जहरीले सांपों के हैरतअंगेज खेलों का प्रदर्शन करते है.

भगवान शिव की मानस पुत्री है मां मनसा देवी

Sanjeevani

मान्यता के अनुसार मां मनसा देवी भगवान शिव की मानस पुत्री है वहीं, पुराने ग्रंथों में यह भी कहा गया कि इनका जन्म कश्यप के मस्तिष्क से हुआ है. कुछ ग्रंथों के अनुसार नागराज वासुकी की बहन पाने की इच्छा को पूर्ण करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें मनसा देवी को भेंट किए थे. मनसा देवी भक्तिभाव से पूजा करने वाले भक्तों केलिए बेहद दयालु और करूणामयी है. मनसा देवी का पंथ मुख्यत: भारत के उत्तर पूर्व क्षेत्रों में केंद्रीत है. माता मनसा देवी, नाम के अनुरूप ही भक्तों की समस्त मंशाओं को पूरी करने वाली देवी है. नाग उनके रक्षण में सदैव विद्यमान है. कई बार देवी के प्रतिमाओं में पुत्र आस्तिक को उनकी गोद में लिए दिखाता जाता है.

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